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बांग्लादेशी घुसपैठ के मुद्दे को जीवित रखना चाहती है भाजपा, बाबूलाल मरांडी ने आदिम जनजाति के विकास को लेकर उठाए सवाल

BY -
Shivani CE
Shivani CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 12, 2026, 4:41:16 PM

रांची(RANCHI): बांग्लादेशी घुसपैठ के मुद्दे को आधार बनाकर भाजपा को झारखंड में न तो लोकसभा में सफलता मिली और न ही झारखंड विधानसभा चुनाव में. इसके बावजूद भाजपा बांग्लादेशी घुसपैठ के मुद्दे को भाजपा जिंदा रखना चाहती है. यही वजह है की बाबूलाल मरांडी ने आदिम जनजाति पहाड़िया समाज के सर्वांगीण विकास को लेकर ट्वीट किया है. जिसमें सीएम से निवेदन किया है कि, राज्य सरकार विशेष समिति का गठन करें. अपने सोशल मीडिया एक्स अकाउंट में ट्वीट कर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि, राज्य के आदिम जनजाति खासकर संथाल परगना क्षेत्र में निवास करने वाली पहाड़िया समाज की सामाजिक आर्थिक स्थिति पर चिंता व्यक्त की है. उन्होंने अपने पोस्ट में कहा है कि, झारखंड की आदिम जनजाति विशेष रूप से पहाड़िया समाज की आर्थिक और सामाजिक स्थिति किसी से छिपी नहीं है. आज भी यह समुदाय विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर है और बुनियादी सुविधाओं से वंचित है. इनके गांवों तक आवागमन के लिए न तो सड़कों की उचित पहुंच है और न ही इन्हें स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल पाता है.  

बाबूलाल मरांडी ने आगे कहा है कि, इनके गांवों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और पीने का पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी घोर अभाव है. कुपोषण, एनीमिया, मलेरिया जैसी गंभीर बीमारियां इनके जीवन का हिस्सा बन चुकी हैं. पहाड़िया समाज के उत्थान के लिए बनाई गई योजनाओं का लाभ भी अधिकतर बिचौलिए हड़प लेते हैं. इन पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार दौरे पर जाने के बाद पहाड़िया समाज की दयनीय स्थिति को देखकर यह साफ जाहिर होता है कि उनकी हालत बेहद चिंताजनक है. आजादी के 75 वर्ष बाद भी आदिम जनजाति समाज की ऐसी स्थिति राज्य के लिए चिंताजनक है.

अपने इस पोस्ट में बाबूलाल मरांडी ने राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से भी निवेदन किया है कि, ‘झारखंड की आदिम जनजाति विशेष कर पहाड़िया समाज के समग्र उत्थान के लिए एक विशेष समिति का गठन किया जाए.  समिति द्वारा किए गए सर्वेक्षण और सिफारिशों के आधार पर एक वर्ष की ठोस कार्य योजना तैयार की जाए ताकि उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान हो सके.’  साथ ही अपने इस पोस्ट में बाबूलाल मरांडी ने पूर्ण विश्वास जताया है कि इस महत्वपूर्ण विषय पर अगले कैबिनेट में मुख्यमंत्री निर्णय लेकर विशेष समिति बनाकर पहाड़िया जनजाति के गांवों में ज़मीनी सच्चाई देखने भेजेंगे और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास कर पुण्य के भागी बनेंगे.

बाबूलाल मरांडी के इस ट्वीट पर सवाल उठता है कि, उनकी कर्मभूमि ही संथाल परगना रही है. राज्य के पहले मुख्यमंत्री होने के नाते उन्होंने हर जगह का दौरा किया. फिर चुनाव हारने के बाद ही क्यों उन्हें आदिम जनजाति की दुर्दशा नजर आ रही है. बाबूलाल मरांडी के इस ट्वीट पर अब राज्य सरकार क्या संज्ञान लेती है अब यह देखना दिलचस्प होगा. क्योंकि, इसी संथाल परगना क्षेत्र से विजयी होकर वे भी सीएम चुने गए हैं.

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