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भाजपा नेता कर रहे थे मॉनिटर लिजर्ड के गुप्त अंगों की तस्करी, छापेमारी में हुआ बड़ा खुलासा

BY -
Shreya Upadhyay  CE
Shreya Upadhyay CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: May 15, 2026, 11:18:51 AM

रांची (RANCHI): राजधानी में वन्यजीव तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है. वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई में मेन रोड स्थित एक होटल से मॉनिटर लिजर्ड यानी विषखोपड़ा के अंगों की अवैध तस्करी के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें एक भाजपा नेता का भी नाम शामिल है. इस कार्रवाई के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है. जानकारी के मुताबिक, वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो को गुप्त सूचना मिली थी कि डेली मार्केट स्थित होटल नटराज में कुछ लोग मॉनिटर लिजर्ड के अंगों की खरीद-बिक्री के लिए ठहरे हुए हैं. सूचना के आधार पर एक विशेष जांच टीम गठित की गई, जिसने होटल में छापेमारी की.

जांच के दौरान टीम होटल के कमरा नंबर-203 तक पहुंची, जहां संदिग्ध गतिविधियों की पुष्टि हुई. कमरे की तलाशी लेने पर एक काले रंग के प्लास्टिक बैग से मॉनिटर लिजर्ड के 30 गुप्त अंग बरामद किए गए. मौके पर मौजूद तीन व्यक्तियों से जब पूछताछ की गई तो उन्होंने मामले से अनजान होने की बात कही, लेकिन जांच एजेंसियों को उनके जवाब संदिग्ध लगे. गिरफ्तार किए गए आरोपियों में एक राजनीतिक दल से जुड़ा नेता, उसका बेटा और अरुण राम नामक व्यक्ति शामिल हैं. होटल प्रबंधन ने भी पुलिस को बताया कि कमरा नंबर-203 और 206 पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर निवासी विष्णु कुमार गुप्ता के नाम पर 13 मई 2026 से बुक थे. इसके बाद तीनों आरोपियों को हिरासत में लेकर डोरंडा स्थित वन प्रमंडल कार्यालय लाया गया, जहां उनसे पूछताछ जारी है.

वन विभाग के अनुसार, आरोपियों पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 (संशोधित 2022) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. यह अपराध संज्ञेय और दंडनीय श्रेणी में आता है. बताया जाता है कि मॉनिटर लिजर्ड के अंगों की तस्करी के पीछे अंधविश्वास एक बड़ी वजह है. इसके अंगों को “हत्था जोड़ी” नाम से बेचने का दावा किया जाता है, जिसे तांत्रिक क्रियाओं और कथित औषधीय उपयोग में काम आने वाला बताया जाता है. हालांकि विशेषज्ञ इसे पूरी तरह अवैज्ञानिक मानते हैं. भारत में मॉनिटर लिजर्ड संरक्षित वन्यजीव की श्रेणी में आता है, लेकिन इसके बावजूद अवैध तस्करी का नेटवर्क लगातार सक्रिय है. वन विभाग ने लोगों से वन्यजीवों की तस्करी और अंधविश्वास से दूर रहने की अपील की है.

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