टीएनपी डेस्क (TNP DESK):जमशेदपुर को मिनी मुंबई के नाम से जाना जाता है, जहां आज बड़े-बड़े मॉल, चौड़ी सड़कें और हर तरह की आधुनिक सुविधाएं मौजूद है, जो लोग मेट्रो सिटी में रहकर भोगते है. वैसा ही आज जमशेदपुर में भी देखने को मिलता है. शहर की नई पहचान उसकी शानदार बिल्डिंगों, खूबसूरत मैदानों और ऐतिहासिक जगहों से भी जुड़ी हुई है, जो यह याद दिलाती हैं कि जमशेदपुर का इतिहास कितना गौरवशाली रहा है. आज हम ऐसी ही एक जगह की बात करने वाले हैं, जो पुराने जमाने में लोगों के बीच चर्चा का विषय हुआ करती थी, लेकिन आज भी मॉडर्न जमाने में उसकी अहमियत कम नहीं हुई है.आज भी वहां रोजाना रौनक देखने को मिलती है. आज हम बात करेंगे जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित रिगल मैदान की.
युवाओं का सबसे पसंदीदा अड्डा था रिगल मैदान
जमशेदपुर का रिगल मैदान कभी जमशेदपुर के युवाओं का सबसे पसंदीदा अड्डा हुआ करता था. यह सिर्फ एक मैदान नहीं था, बल्कि शहर की धड़कन जैसा था, जहां हर शाम लोगों की भीड़ लग जाती थी.दोस्तों की टोलियां, कॉलेज के स्टूडेंट्स और परिवार लोग यहां समय बिताने आते थे. उस समय न तो इतने मॉल थे, न ही मोबाइल और सोशल मीडिया का इतना चलन था. लोग असली जिंदगी जीने के लिए बाहर निकलते थे. रिगल मैदान में क्रिकेट खेलते बच्चे, चाय की टपरी पर बैठकर बातें करते बुजुर्ग और बेंच पर बैठकर हंसते-खेलते युवा यह नजारा आम था. यह जगह सिर्फ घूमने की नहीं थी, बल्कि लोगों की यादों से जुड़ी हुई थी। यहां दोस्ती बनती थी, प्रेम कहानियां शुरू होती थीं और कई सपनों को उड़ान मिलती थी.शाम होते ही पूरा माहौल बदल जाता था हल्की रोशनी, ठंडी हवा और लोगों की चहल-पहल इसे और खास बना देती थी.
आज भी कम नहीं हुई है मैदान की अहमियत
आज भले ही जमशेदपुर में बड़े-बड़े मॉल, पार्क और नए-नए एंटरटेनमेंट स्पॉट बन गए हैं, लेकिन रिगल मैदान की बात ही अलग है. आज भी जब लोग बिष्टुपुर जाते है, तो एक बार यहां जरूर रुकते हैं और पुरानी यादों में खो जाते है. कहते है कि समय बदल जाता है, लेकिन कुछ जगहें हमेशा दिल में अपनी जगह बनाए रखती है. रिगल मैदान भी उन्हीं में से एक है. आज भी यह मैदान जमशेदपुर के दिल की तरह धड़कता है शांत होकर भी बहुत कुछ कहता है.यही वजह है कि चाहे कितने भी नए जगह बन जाएं, रिगल मैदान की यादें और उसका आकर्षण कभी पुराना नहीं पड़ता.यह सिर्फ एक मैदान नहीं, बल्कि जमशेदपुर की पहचान और युवाओं की पुरानी यादों का गवाह है आज यहां आए दिन कई तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम और मेले लगते हैं, जहां चहल-पहल देखने को मिलती है.