रांची(RANCHI): बिरसा मुंडा केन्द्रीय कारा राज्य में सुर्खियों में बना है.पहले एक महिला कैदी के गर्भवती होने की खबर सामने आई. पूरे सिस्टम में हड़कंप मचा लेकिन देर शाम होते होते मामला पलट गया और मेडिकल बोर्ड ने रिपोर्ट को नेगेटिव बता दिया. लेकिन मामला अब भी शांत नहीं हुआ. भाजपा इस पूरे खेल में बड़े साजिश होने का आरोप लगा रही है. इसी कड़ी में प्रदेश भाजपा कार्यालय में प्रदेश प्रवक्ता अजय शाह ने प्रेस वार्ता कर पूरे मामले की न्यायिक जांच की मांग की है.
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अजय साह ने पत्रकार वार्ता के दौरान जेल अधीक्षक कुमार चंद्रशेखर पर गंभीर और तीखे आरोप लगाए. अजय साह ने कहा कि स्वयं को ईमानदार और सम्मानित अधिकारी बताने वाला कुमार चंद्रशेखर दरअसल एक आदतन आरोपी हैं, जिस पर पहले भी लगातार गंभीर आरोप लगते रहे हैं.
अजय साह ने दावा किया कि देवघर में पदस्थापना के दौरान कुमार चंद्रशेखर पर एक महिला शिक्षिका ने यौन शोषण का आरोप लगाया था, लेकिन सत्ता और प्रभाव के दम पर उस मामले को दबा दिया गया. इसके बाद देवघर में ही एक होमगार्ड महिला ने भी उन पर यौन शोषण का आरोप लगाया. वहीं, हजारीबाग जेल में कुख्यात अपराधी विकास तिवारी को संरक्षण और सहयोग पहुंचाने के मामले में भी वह दोषी पाए गए थे. अजय ने यह भी आरोप लगाया कि हजारीबाग में पदस्थापना के दौरान एक सिपाही की पत्नी के शोषण के आरोप भी उन पर लगे थे.
अजय साह ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि पीड़ित महिला कैदी के साथ यौन शोषण नहीं हुआ था, तो 17 मई को गर्भावस्था जांच कराने की जरूरत आखिर क्यों पड़ी? उन्होंने कहा कि जेल के चिकित्सक के बयान से यह स्पष्ट होता है कि 14 अप्रैल को महिला गर्भवती थी और उसके बाद पूरे मामले को छिपाने के लिए गुप्त तरीके से उसका गर्भपात कराया गया.
उन्होंने जेल महानिरीक्षक सुदर्शन मंडल पर भी तीखा हमला करते हुए कहा कि जिस तेजी से सबूत मिटाने और मामले को दबाने की कोशिश हुई, उससे साफ प्रतीत होता है कि यह केवल एक व्यक्ति का अपराध नहीं, बल्कि पूरे तंत्र की मिलीभगत का मामला है. मथुरा रेप केस का उल्लेख करते हुए और बॉम्बे उच्च न्यायालय की टिप्पणी को उद्धृत करते हुए अजय साह ने इस घटना को “कस्टोडियल रेप” बताया. अजय ने कहा कि अगर कोई महिला ड्रग मामले या किसी अन्य अपराध में जेल में है तो क्या उसके यौन शोषण का लाइसेंस मिल जाता है?
अजय साह ने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए जेल अधीक्षक कुमार चंद्रशेखर और जेल महानिरीक्षक सुदर्शन मंडल को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए. उन्होंने कहा कि जब तक दोनों अधिकारियों को पद से हटाया नहीं जाता, तब तक सबूतों से छेड़छाड़ और पीड़िता पर दबाव बनाए जाने की आशंका बनी रहेगी.
अजय साह ने आगे कहा कि रांची उपायुक्त को अंतिम समय तक इस घटना की जानकारी नहीं होना यह साबित करता है कि प्रशासन का जेल पर कोई नियंत्रण नहीं बचा है. उन्होंने आरोप लगाया कि बिरसा मुंडा जेल अब माफियाओं के सिंडिकेट द्वारा नियंत्रित है. जेल अब अपराधियों और माफिया गिरोहों का सुरक्षित अड्डा बन चुकी है, जहां जेल जाने के बाद भी अपराधियों को नृत्य, संगीत और शारीरिक सुख जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं. भाजपा ने पूरे मामले की न्यायिक जांच की मांग करते हुए इसे राष्ट्रीय महिला आयोग, मानवाधिकार आयोग और अल्पसंख्यक आयोग के समक्ष ले जाने की बात कही है.