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सर्दी के मौसम में एशिया ही नहीं बल्कि यूरोप,अमेरिका,न्यूज़ीलैंड, अफ्रीका जैसे देशों से भी यहां आते हैं पक्षी, वन विभाग कर रहा है संरक्षण

सर्दी के मौसम में एशिया ही नहीं बल्कि यूरोप,अमेरिका,न्यूज़ीलैंड, अफ्रीका जैसे देशों से भी यहां आते हैं पक्षी, वन विभाग कर रहा है संरक्षण

देवघर (DEOGHAR) : सर्दी का मौसम शुरु होते ही देवघर की जलवायु से प्रभावित हो कर बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी यहाँ के ताल-तालाब को अपना आशियाना बनाने पहुंचने लगते हैं. देवघर के सिकटिया बराज, बाघमारी गांव और पुनासी डैम ऐसे ही प्रवासी पक्षियों से भर गया है. आने वाले समय मे इन सभी को वन विभाग द्वारा पर्यटन विभाग के साथ मिलकर विकसित कर पर्यटक स्थल बनाएगा.

किया जा रहा पक्षियों का सर्वे 

इन दिनों यह सभी जगह प्रवासी पक्षियों के कलरव से गुंजायमान हो रहा यह है. खास बात है कि प्रत्येक वर्ष सर्दी के मौसम की आहट के साथ ही ये पाहुन पक्षी मध्य एशिया ही नहीं बल्कि यूरोप, अमेरिका, न्यूज़ीलैंड, अफ्रीका के देशों से हज़ारों मील की दूरी तय कर यहां पहुंच रहे हैं. इसके अलावा सर्दी बढ़ने के साथ ही देवघर के दर्जनों तालाब इन खूबसूरत रंग-बिरंगी विदेशी पक्षियों से भर जा रहा हैं. क्षेत्रीय वन पदाधिकारी राज कुमार साह के अनुसार इन दिनों देवघर में कई ऐसे प्रवासी पक्षी देखने को मिलाते हैं जो इस जिला के लिए नए है. फिलहाल विभाग द्वारा सभी स्थानों को चिन्हित कर पक्षियों का सर्वे कराया जा रहा है. जनवरी तक सर्वे पूरा होने की बात की जा रही है।तभी आकलन लगेगा कि देवघर में कौन कौन से प्रवासी पक्षी और कितनी संख्या में आए हैं. अभी तक जो पक्षी देखने को मिला है उसका विवरण निम्न है :

RUDDY SHELDUCK

आम बोलचाल में इसको चकवा चकवी के रूप में जाना जाता है. यह बत्तख के टडोरना वंश की एक जाति है. जो यूरोप और एशिया के उत्तरी भाग में पाया जाता है. इसके बारे में कहा जाता है कि सूर्योदय से सूर्यास्त तक यह जोड़े में रहता है. जैसे ही सूर्यास्त होता है यह अलग अलग हो जाते है. महान कवि और संत ने भी अपने दोहे "सांझ पड़े बितबै,चकवी दीन्ही रोए. चल चकवा और  देश को जहां रैन नहि होए" में इसका वर्णन किया है.

BLUE THROAT

यह विलुप्त हो रही गोरैया पक्षी की प्रजाति है जिसे नीला गला भी कहते है. यह पक्षी यूरोप से यहां आती है. लगभग 15 सेंटीमीटर लंबी यह पक्षी नदी किनारे झाड़ियों में दिखाई देती है.

BAR HEADED GOOSE

यह सवान या कल हंस के रूप में भी पहचाना जाता है. मध्य एशिया से सर्दियों में यहां निवास करता है.

GREYLAG GOOSE

यह भी एक हंस है. जो उत्तरी यूरोप और एशिया से यहां आता है.

GREAT CRESTED GREBE

आम भाषा मे इसे शिव हंस भी कहते हैं. यह उत्तरी अफ्रीका से लेकर यूरोप और एशिया के ठंडा क्षेत्र में दिखाई देते हैं. फिलहाल इनको आप देवघर में देख सकते हैं. 

EURASIAN COOT

देवघर के नदी,ताल तालाबों में इन दिनों यह दिखने वाली पक्षी एशिया, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड,नार्थ अफ्रीका से आकर सर्दियों का आनंद लेते हैं.

NORTHERN PINTAIL

यह पक्षी उत्तर अमेरिका, यूरोप, एशिया के उत्तरी भाग से आकर देवघर के ताल तालाबों और नदियों की शोभा बढ़ा रहे हैं. इसके अलावा भी कई अन्य पक्षी है जिसका आकलन वन विभाग द्वारा किया जा रहा है.

पर्यटकों को आकर्षित करते हैं ऐसे अदभुत नज़ारे 

देवघर में प्रकृति के इस अदभुत नज़ारे की ओर पर्यटकों को आकर्षित करने के उद्देश्य से वन विभाग अब सभी चिन्हित स्थानों को विकसित करने का निर्णय लिया है. पर्यटन विभाग से मिलकर सर्दी के मौसम में प्रवासी पक्षियों के निवास स्थान और आसपास बुनियादी सुविधाएं विकसित करने और मनोरंजन के साधन उपलब्ध करने की योजना बनाने का आश्वासन दिया जा रहा है. साथ ही सभी संभावित स्थानों पर जहां प्रवासी पक्षी निवास करते हैं. वहां वनपाल से निगरानी कराई जा रही है. डीएफओ (dfo) के अनुसार प्रवासी पक्षियों का कोई शिकार न कर सके इसके लिए भी कई आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं.

रोज़गार का ज़रिया

देवघर की पहचान एक प्रसिद्ध तीर्थस्थल के साथ मनोरम पर्यटन स्थल के रुप में भी है. खास कर सर्दी के मौसम में बड़ी संख्या में दूसरे प्रदेशों से पर्यटक यहां के पर्यटन स्थल के भ्रमण के लिए पहुंचते हैं. ऐसे में विदेशी रंग-बिरंगी पक्षियों से भरा तालाब, नदी उनके लिए एक अलग आकर्षण का केंद्र बन सकता है. क्षेत्र को पर्यटन के लिहाज से विकसित करने पर स्थानीय लोगों के लिए रोज़गार का भी जरिया साबित हो सकता है.

रिपोर्ट: रितुराज सिन्हा, देवघर

Published at:27 Dec 2022 10:40 AM (IST)
Tags:foreign birds coming to deoghardeoghar picnic spotdeoghar newsjharkhand latest newsthe news post
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