धनबाद (DHANBAD) : शायद यह पहला मौका होगा, जब राष्ट्रीय जनता दल के सर्वेसर्वा लालू प्रसाद यादव दही -चूड़ा भोज का आयोजन नहीं करेंगे. पार्टी की ओर से कहा गया है कि इसे अन्यथा नहीं लिया जाना चाहिए. क्योंकि लालू प्रसाद का स्वास्थ्य साथ नहीं दे रहा है. इधर, इस घोषणा के बाद चर्चा यह शुरू हो गई है कि लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेजस्वी यादव दही -चूड़ा का अलग आयोजन कर रहे हैं और इसमें लालू प्रसाद की तर्ज पर सभी नेताओं को आमंत्रित कर रहे है. तो क्या तेज प्रताप यादव लालू प्रसाद की राह पर चलेंगे. बिहार में दही- चूड़ा भोज भले ही एक परंपरा कही जाती है, लेकिन इसका राजनीतिक संदेश भी होता है. ऐसे में लालू प्रसाद यादव द्वारा इस आयोजन से अलग होना और तेज प्रताप यादव का अलग आयोजन करना, कई बातों को जन्म देता है.
राजद के प्रदेश अध्यक्ष मंगलीलाल मंडल ने मंगलवार को कहा कि लालू प्रसाद यादव दही -चूड़ा भोज का आयोजन नहीं करेंगे. उन्होंने साफ किया कि इस बार मकर संक्रांति पर राबड़ी देवी के आवास पर दही -चूड़ा भोज का आयोजन नहीं होगा. लालू प्रसाद यादव की सेहत को देखते हुए यह फैसला लिया गया है. इसे किसी विवाद से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए. यह सब कोई जानते हैं कि मकर संक्रांति पर लालू प्रसाद का दही -चूड़ा भोज बिहार की राजनीति का एक बड़ा हिस्सा माना जाता रहा है. इस भोज में तमाम दलों के नेता- कार्यकर्ता शामिल होते थे.
इसे राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन और मेल मिलाप के तौर पर भी देखा जाता रहा है. अब इस आयोजन का नहीं होना, चर्चा का विषय बन गया है. कुछ लोग इसे पारिवारिक विवाद से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ लोग अन्य कारणों से. कुछ लोग तो यह भी कह रहे हैं कि क्या तेज प्रताप यादव को पहले से मालूम था कि लालू प्रसाद दही -चूड़ा भोज नहीं करेंगे, इसलिए वह अलग भोज कर रहे है. तो क्या अब लालू प्रसाद की तर्ज पर राजनीति के लिए तेजप्रताप आगे बढ़ चुके है.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
