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DHANBAD: टूट गई राजनीतिक संत एके राय की बिहार कोलियरी कामगार यूनियन, जाने क्यों और कैसे 

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 13, 2026, 3:36:29 AM

धनबाद (DHANBAD) : धनबाद में वामदलों में टूट हो गई है.  बिहार कोलियरी कामगार यूनियन (बीसीकेयू ) अब बट गई है.  यह अब  बीसीकेयू (सीपीएम) और बीसीकेयू (मासस) के नाम से जानी जाएगी.  प्रख्यात चिंतक व राजनीतिक संत पूर्व सांसद  एके राय ने एफसीआई सिंदरी से नौकरी छोड़ कर मजदूरों को शोषण मुक्त कराने के लिए बिहार कोलियरी  कामगार यूनियन की स्थापना 70 के दशक में की थी.  

52 साल के बाद हो गए दो गुट 

लेकिन 52 साल के बाद अब यह यूनियन बंट गई है. बिहार कोलियरी  कामगार यूनियन के दसवें सम्मेलन में यह सब हुआ है.  यह सम्मेलन शनिवार और रविवार को रामगढ़ में संपन्न हुआ.  बीसीकेयू (मासस )ने मिथिलेश सिंह को अध्यक्ष तथा निरसा के पूर्व विधायक अरूप चटर्जी को महासचिव घोषित किया तो बीसीकेयू (सीपीएम) ने सुंदर लाल महतो को अध्यक्ष और मानस चटर्जी को महासचिव बनाया.  बुजुर्ग बताते हैं कि 70 के दशक में शिमलाबहाल कोलियरी में माफिया के द्वारा मजदूरों का शोषण देख एके राय विचलित हो गए.  एक दिन उन्होंने मीटिंग बुलाई.  इस मीटिंग में उस समय के दिग्गज बिनोद बिहारी महतो, , मुकुट धारी सिंह,एसके बक्शी , जमुना सहाय ,राजनंदन प्रसाद, रामदेव सिंह समेत कई मजदूर नेता शामिल हुए.  लोग बताते हैं कि जमुना सहाय ने मजदूर संगठन के गठन का विरोध किया, उनका कहना था कि पहले से ही जनवादी मजदूर संगठन चल रहा है तो दूसरे संगठन की कोई जरूरत नहीं है.  बिनोद बिहारी महतो ने जमुना सहाय का विरोध किया और मजदूर संगठन के गठन का समर्थन किया.  कई घंटों तक चली बैठक के बाद बिहार कोलियरी कामगार यूनियन का गठन हुआ, हालांकि उस मीटिंग में कई तरह के विरोध भी हुए.  

पहले झारखंड मुक्ति मोर्चा भी था शामिल 

इस संगठन में मासस, सीपीएम और झारखंड मुक्ति मोर्चा शामिल थे.  हालांकि बाद में झारखंड मुक्ति मोर्चा ने अपना एक अलग मजदूर संगठन बना लिया.  पूर्व सांसद एके राय और एसके बख्शी जब तक जीवित रहे, अध्यक्ष -महासचिव का पद संभालते रहे. कहीं कोई खतर पटर नहीं हुई.  दोनों अलग-अलग पार्टी में थे पर यूनियन में एक साथ होते थे.  बातों की अहमियत ऐसी होती थी कि एस के बक्शी निरसा से मासस उमीदवार स्वर्गीय गुरुदास चटर्जी के खिलाफ विधानसभा का चुनाव भी लड़ा फिर भी यूनियन में  साथ साथ थे. जुलाई 2019 में पूर्व सांसद एके राय का निधन हो गया.  पिछले साल एस के बख्शी का भी निधन हो गया.  उसके बाद शनिवार और रविवार को रामगढ़ में हुए अधिवेशन में यह  यूनियन बट गई.  बता दें कि पूर्व सांसद एके राय एफसीआई, सिंदरी में नौकरी करते थे.  वह बीटेक की डिग्री हासिल किए हुए थे.  

मजदूरों का शोषण नहीं देख सके एके राय तो बनाई यूनियन 

नौकरी के समय से ही मजदूरों का शोषण उनको खटक रहा था और नौकरी करते हुए जैसा कि लोग बताते हैं, उन्होंने एक सभा में हिस्सा लिया. हालांकि उस सभा में किसी दूसरे नेता को पटना से आना था लेकिन उनके नहीं पहुंचने पर मजदूरों ने  ए के राय  से संबोधन कराया.  उसके बाद एफसीआई मैनेजमेंट ने उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया.  हालांकि बाद में समझौता में यह शर्त प्रभंधन ने रखी  कि एके राय को नौकरी में तो बहाल कर लिया जाएगा लेकिन उनका तबादला दूसरी जगह कर दिया जाएगा.  इस पर एके राय  तैयार नहीं हुए और उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया और मजदूर संगठन के काम में लग गए.  77 के चुनाव में जेल में रहते हुए वह पहली बार सांसद बने.  उनका पूरा जीवन राजनीतिक संत की तरह रहा. 

Tags:News

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