Bihar: बिहार में सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी को लेकर हंगामा है. उनके समर्थक नीतीश कुमार की सरकार को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं. गिरफ्तारी को दुर्भावना पूर्ण कार्रवाई बता रहे हैं. कह रहे हैं कि नीट छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले को पप्पू यादव ने जब सदन से लेकर सड़क तक उठाया तो बिहार सरकार बैकफुट पर आ गई और दुर्भावना पूर्ण कार्रवाई की है. वैसे, पप्पू यादव के पक्ष में शनिवार को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने भी ट्वीट किया था और कहा था कि यह कार्रवाई कतई स्वीकार नहीं की जा सकती। इधर,बिहार की राजनीति में बाबा के नाम से प्रसिद्ध , कभी नीतीश कुमार -लालू प्रसाद के प्रिय रहे पूर्व मंत्री शिवानंद तिवारी ने भी सवाल उठाया है. उन्होंने कई सवाल उठाए हैं.
सोशल मीडिया पर एक लंबा -चौड़ा पोस्ट कर उन्होंने कहा है कि
पप्पू यादव बिहार की राजनीति में एक अनोखे और विशिष्ट व्यक्तित्व हैं. वे ऐसे एकमात्र राजनेता हैं, जिन्होंने तीन बार निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतने का रिकॉर्ड बनाया है. निर्दलीय उम्मीदवार और भी रहे हैं, लेकिन एक से अधिक बार निर्दलीय चुनाव जीतने का इतिहास सिर्फ पप्पू यादव के नाम दर्ज है. कुल मिलाकर अब तक वे छह मर्तबा लोकसभा का चुनाव जीत चुके हैं. अपने चुनावी सफ़र की शुरुआत उन्होंने विधानसभा चुनाव से की थी. वह चुनाव भी वे निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में ही लड़े और जीते थे.पप्पू यादव का शरीर भले ही भारी-भरकम हो, लेकिन उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी खासियत उनकी असाधारण सक्रियता है.
भारी -भरकम शरीर वाले पप्पू यादव के क्यों हुए मुरीद ?
बिहार की राजनीति में शायद ही कोई ऐसा नेता हो, जो इतनी ऊर्जा और फुर्ती के साथ हर जगह मौजूद रहता हो. सुबह वे कहीं और दिखाई देते हैं, शाम को किसी दूसरे इलाके में—लगातार जनता के बीच कोरोना महामारी के दौरान यह पूरे बिहार ने देखा कि जब सरकार मृत्यु के आंकड़ों को लेकर सच्चाई से मुंह मोड़ रही थी, तब पप्पू यादव बिना मास्क के श्मशान घाटों पर खड़े होकर सच्चाई सामने ला रहे थे. पटना के विभिन्न श्मशान घाटों में हो रहे दाह-संस्कार इस बात की गवाही दे रहे थे कि सरकारी आंकड़े वास्तविकता से बहुत कम बताए जा रहे हैं. पटना के कंकड़बाग इलाके में जब छाती भर पानी भरा हुआ था, लोग पीने के पानी को तरस रहे थे और सरकारी सहायता कहीं दिखाई नहीं दे रही थी, तब पप्पू यादव उसी पानी में उतरकर लोगों तक पीने का पानी पहुँचा रहे थे. आज वही पप्पू यादव गिरफ्तार है.
एक्शन पर उठाये हैं कई गंभीर सवाल
बताया जा रहा है कि उनकी गिरफ्तारी किसी अत्यंत पुराने मामले में हुई है. हमारे देश की न्याय व्यवस्था की यह एक विडंबना है कि मुकदमे 25–30 वर्षों तक चलते रहते हैं और अचानक किसी एक दिन गिरफ्तारी हो जाती है. काग़ज़ों में लिखा होता है कि अभियुक्त को समन जारी किया गया, लेकिन वह अभियुक्त तक कभी पहुँचता ही नहीं. अचानक पुलिस गिरफ़्तारी का वारंट लेकर पहुँच जाती है. इसका व्यक्तिगत अनुभव हम लोगों को भी रहा है. पप्पू यादव की गिरफ्तारी ने एक बार फिर न्यायपालिका और पुलिस के काम करने के तरीके पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. हमें विश्वास है कि उन्हें जल्द जमानत मिल जाएगी, लेकिन इस घटना ने हमारी कानून व्यवस्था की कार्यप्रणाली को उजागर अवश्य कर दिया है. पप्पू यादव के प्रति मैं अपनी हार्दिक शुभकामनाएँ व्यक्त करता हूँ और आशा करता हूँ कि वे शीघ्र ही जेल से बाहर आकर पहले की तरह जनता के बीच सक्रिय होंगे। शिवानन्द
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
