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बड़ा सवाल: पैसा मिला तो गया कहां, धनबाद के कस्तूरबा विद्यालयों में जरुरत का साबुन भी नहीं मिलता बच्चियों को

BY -
Prakash Tiwary
Prakash Tiwary
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 13, 2026, 10:41:05 PM

धनबाद(DHANBAD): शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर लगातार आरोप लगते रहे हैं कि कार्यालय से निकलकर जमीनी हकीकत जानने नहीं जाते. शुक्रवार को तोपचांची के कस्तूरबा विद्यालय में बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम पहुंची. बच्चों को मिल रही सुविधाओं को देखकर माथा पीट लिया. व्यवस्था देखकर आश्चर्य प्रकट किया. टीम को एक संकरे बेड पर दो बच्चियों के सोने का पता चला. शौचालय से भी बदबू आ रही थी. पानी की भी समस्या दिखी. बच्चियां तीन मंजिला तक पानी ले कर जाती हैं. तब जाकर उनका काम चलता है.

शिक्षकों की भी है भरी कमी

तोपचांची कस्तूरबा विद्यालय में शिक्षकों की भी कमी है. ऐसे में क्या पढ़ाई होती होगी, बच्चियां कैसे रहती होगी, यह अपने आप में एक बड़ा सवाल है. बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम के तोपचांची कस्तूरबा विद्यालय पहुंचते ही अफरा-तफरी मच गई. पानी संकट के कारण तीन मंजिला तक पानी लेकर बच्चियों को चढ़ना पड़ता है.  क्लास के हिसाब से टीचर हैं, जो बहुत कम है. आयोग के सदस्य सुनील वर्मा, आभा अकींचन, सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष उत्तम मुखर्जी ने प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को फटकार लगाई.

जरुरत के हिसाब से साबुन तक नहीं मिलता

नियमित कोई विजिट भी नहीं करता है. एक संकरी बेड पर दो बच्ची सोती है, साबुन तक एक छोटा सा मिलता है. पूछने पर अकाउंटेंट हकलाने लगा, शिक्षा अधिकारी भी बगले झांकने लगे. धनबाद जिले में 6 कस्तूरबा विद्यालय हैं और तीन झारखंड आवासीय बालिका विद्यालय, कस्तूरबा विद्यालय केंद्र सरकार की योजना है जबकि झारखंड आवासीय बालिका विद्यालय राज्य सरकार की योजना है. राष्ट्रीय महिला साक्षरता दर से जहां साक्षरता दर कम  मिली, वहां कस्तूरबा विद्यालय खोले गए लेकिन जहां राष्ट्रीय से साक्षरता दर अधिक मिली वहां पर राज्य सरकार ने बच्चों की सुविधा के लिए झारखंड आवासीय बालिका विद्यालय खुलवाया. दोनों ही तरह के विद्यालयों की देखरेख समग्र शिक्षा अभियान के तहत किया जाता है और यह सब जिला शिक्षा विभाग के अधीन होता है.

रिपोर्ट: सत्यभूषण सिंह, धनबाद

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