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कोयला उद्योग से बड़ी खबर: टूट गई कोल इंडिया की मोनोपॉली, अब कैसे लागू हुआ है डिस्काउंट सिस्टम 

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: March 8, 2026, 2:02:49 PM

धनबाद(DHANBAD): देश के कोयला उद्योग से एक बड़ी खबर निकल कर आई है.  कोयला उत्पादन और बिक्री में अब कोल्  इंडिया का मोनोपॉली  टूट गई है.  प्राइवेट प्लेयर्स की एंट्री ने कोल इंडिया को इस कादर बाध्य  कर दिया है कि अब कोयले की बिक्री पर डिस्काउंट सिस्टम लागू करना पड़ा है.  यह सिस्टम कोल इंडिया की सेहत पर कितना असर डालेगा, यह आगे देखने वाली बात होगी।  डिस्काउंट सिस्टम की शुरुआत कोल इंडिया की सबसे बड़ी इकाई बीसीसीएल से हो रही है.  बीसीसीएल बोर्ड की बैठक में इसे पारित कर दिया गया है.  

₹100 से लेकर ₹600 तक प्रतिटन डिस्काउंट को ऑफर 

अब बीसीसीएल से कोयला उठाने वाले उपभोक्ताओं  को ई ऑक्शन  में ₹100 से लेकर ₹600 तक प्रतिटन  डिस्काउंट मिलेगा।  शनिवार को बीसीसीएल बोर्ड की बैठक में इसे स्वीकृति दे दी गई है.  जो परिस्थितियां  हैं ,उसके अनुसार यह  मान लेना चाहिए कि कोल्  इंडिया की अन्य सहायक कंपनियों में भी यह सिस्टम आगे चलकर लागू होगा।  बता दें कि बीसीसीएल को कोयले के खरीदार नहीं मिल रहे हैं.  मैनेजमेंट पर भारी दबाव है.  ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए डिस्काउंट सिस्टम लागू किया गया है, बावजूद यह  कंपनी की सेहत के लिए कितना फलदाई होगा, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी।  सूत्रों के अनुसार जो सिस्टम बना है, उसके अनुसार जो उपभोक्ता जितना अधिक कोयला लेगा, उसे उतना अधिक लाभ मिल सकता है. 

बीसीसीएल में कोयले के डिस्पैच में क्यों आई है भारी गिरावट ?

बीसीसीएल में फिलहाल डिस्पैच में भारी गिरावट देखी जा रही है.  फरवरी महीने में केवल 2.02 मिलियन टन डिस्पैच हुआ है. यह  प्रदर्शन बहुत ही निराशाजनक कहा जा सकता है.  चालू वित्तीय वर्ष के फरवरी तक बीसीसीएल का कोयला उत्पादन 31.01 मिलियन टन पहुंचा है, जबकि डिस्पैच 30.39 मिलियन टन पहुंचा है. टारगेट 46 मिलियन टन का है.  लक्ष्य हासिल करने के लिए कंपनी को काफी प्रयास करने होंगे, बावजूद इसे पाना संभव नहीं दिख रहा है.  वैसे भी, कोल्  इंडिया की सबसे महत्वपूर्ण इकाई बीसीसीएल ही है.यहां कोकिंग कोयले का अधिक उत्पादन होता है.  पावर प्लांट सहित अन्य उद्योग बीसीसीएल से भरपूर कोयला लेते थे, लेकिन धीरे-धीरे उनकी रुचि प्राइवेट प्लेयर्स की ओर बढ़ने लगी.  

बीसीसीएल के लचीलेपन के बावजूद क्यों नहीं बढ़ा डिस्पैच ?

नतीजा हुआ कि बीसीसीएल के लचीलेपन के बावजूद पावर प्लांट ने कोई रुचि नहीं दिखाई।  उसके बाद कोयले  का डिस्पैच बढ़ाने पर मंथन शुरू हुआ.  सुझाव आया कि डिस्काउंट सिस्टम से उपभोक्ता आकर्षित हो सकते हैं. इसलिए यह सिस्टम लागू किया गया है. दरअसल, जब ई ऑक्शन  सिस्टम कोल इंडिया में लागू हुआ था, उस  समय ही  कहा जा रहा था कि इसके दूरगामी  दुष्परिणाम सामने आ सकते हैं और अब वह सामने आ गए हैं. प्राइवेट प्लेयर्स के लिए भी रास्ता खोल दिया गया, इस वजह से प्राइवेट प्लेयर्स भी अब खुलकर खेल रहे हैं. नतीजा है कि कोल्  इंडिया की मोनोपॉली  अब टूट गई है.आगे इस विषम परिस्थिति को कोल् इंडिया कैसे संभालती है, या देखने वाली बात होगी.

रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो

Tags:DhanbadJharkhandCoal Indiacoal industryCoal worker

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