चाईबासा(CHAIBASA):पश्चिमी सिंहभूम जिले के मझगांव प्रखंड क्षेत्र के बेनिसागर क्षेत्र में शनिवार को भी हाथियों का आतंक देखने को मिल रहा है.जहां हाथियों नें कई घरों में तोड़ फोड़ किया है जिससे क्षेत्र के लोग दहशत के साये में रातें गुजारने को विवश है.वही झारखंड-ओडिशा सीमा पर स्थित बनीसागर क्षेत्र में एक बिछड़े हुए जंगली हाथी का आतंक अब जानलेवा स्तर पर पहुँच गया है.
खूनी हाथी’ झारखंड की सीमा में दाखिल
शुक्रवार को तीन लोगों को बेरहमी से कुचलने के बाद, यह ‘खूनी हाथी’ एक बार फिर झारखंड की सीमा में दाखिल हो गया है. वन विभाग की तमाम कोशिशों के बावजूद हाथी को अब तक नियंत्रित नहीं किया जा सका है.कल देर शाम चाईबासा वन विभाग ने घंटों की मशक्कत के बाद हाथी को ओडिशा के जंगलों की ओर खदेड़ा था लेकिन पहले से ही मुस्तैद ओडिशा के वन कर्मियों ने सुरक्षा कारणों से हाथी को वापस झारखंड की ओर खदेड़ दिया.
हाथी की आक्रामकता के आगे विशेषज्ञ भी बेबस
देर रात हाथी ने पुनः चाईबासा सीमा में प्रवेश किया, जिसके बाद से वन विभाग की टीमें ‘सर्च ऑपरेशन’ में जुटी है.वहीं वनतारा रेस्क्यू टीम भी रही असफल, विशेषज्ञ ने गंवाई जान. इधर हाथी को काबू करने के लिए पश्चिम बंगाल, ओडिशा और गुजरात से आई ‘वनतारा रेस्क्यू टीम’ ने आधुनिक संसाधनों के साथ मोर्चा संभाला हालांकि, हाथी की आक्रामकता के आगे विशेषज्ञ भी बेबस नजर आएवन विभाग ने हाथी को बेहोश करने के लिए तीन बार ट्रेंकुलाइज गन का इस्तेमाल किया, लेकिन तीनों ही प्रयास असफल रहे.
विशेषज्ञ की मौत
बचाव अभियान के दौरान हाथी ने हाथियों को भगाने के एक विशेषज्ञ पर जानलेवा हमला कर दिया. गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान उन्होंने भी दम तोड़ दिया.
10 दिनों में 21 मौतें: दहशत में ग्रामीण
यह हाथी 1 जनवरी से अब तक कुल 21 लोगों की जान ले चुका है. वन अधिकारियों के मुताबिक, झुंड से बिछड़ने के कारण यह हाथी अत्यंत हिंसक हो गया है. इसकी रफ्तार भी चिंता का विषय है; यह प्रतिदिन लगभग 30 किलोमीटर की दूरी तय कर रहा है, जिससे इसकी सटीक लोकेशन ट्रैक करना मुश्किल हो रहा है.
रिपोर्ट-संतोष वर्मा
