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आपूर्ति विभाग की बड़ी लापरवाही, कंप्यूटर ऑपरेटर के सहारे चल रहा है पूरा विभाग, लोगों का बुरा हाल, जानें मामला

BY -
Samir Hussain
Samir Hussain
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 14, 2026, 3:07:23 AM

दुमका(DUMKA):आम लोगों की सुविधा को लेकर सरकार कितनी उदासीन है. इसकी एक बानगी झारखंड की उपराजधानी दुमका में देखने को मिल रही है. जहां लगभग 85 प्रतिशत आवादी जिस विभाग से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा है. वह विभाग मानव संसाधन के मामले में बदहाल है. हम बात कर रहे है आपूर्ति विभाग की. एक मात्र जिला आपूर्ति पदाधिकारी के सहारे यह विभाग चल रहा है.

आपूर्ति विभाग कार्यालय में एक भी क्लर्क नहीं

जिले में 10 प्रखंड है। सभी प्रखंड में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी का पद सृजित है. लेकिन सभी पद खाली पड़ा है. कार्यालय में एक भी क्लर्क नहीं है ,जबकि दुमका के आपूर्ति विभाग के ऊपर जिले के सभी जरूरतमंदों को खाद्यान्न के अतिरिक्त अन्य सामान उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी होती है. देखा जाए तो यह काफी महत्वपूर्ण विभाग है. इसके बावजूद झारखंड सरकार की ओर से दुमका में इस विभाग में एक ही विभागीय पदाधिकारी की पोस्टिंग की गई है. जो जिला आपूर्ति पदाधिकारी का पद है.

कंप्यूटर ऑपरेटर के सहारे पूरा विभाग चल रहा है

इसके अतिरिक्त जिले के जो 10 प्रखंड है. उसमें प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी होनी चाहिए पर सभी दस पद रिक्त है. दूसरे विभाग से आए दो क्लर्क और अनुबंध के कंप्यूटर ऑपरेटर के सहारे पूरा विभाग चल रहा है. कहा जा सकता है कि उधार के अधिकारियों और कर्मियों के सहारे दुमका का आपूर्ति विभाग संचालित हो रहा है.

 85 प्रतिशत आबादी पर विभाग के पास केवल एक ही व्यक्ति

दुमका जिले में 85 प्रतिशत आबादी को जिला आपूर्ति विभाग राशन के तौर पर चावल, गेहूं, नमक, केरोसिन उपलब्ध कराता है. इसके साथ ही सरकार की महत्वपूर्ण योजना सोना सोबरन धोती-साड़ी योजना से धोती, लुंगी और साड़ी उपलब्ध कराया जाती है. केरोसीन तेल भी हर महीने उपलब्ध कराया जाता है. पर 85 प्रतिशत आबादी तक पहुंचने वाले इस विभाग के पास विभागीय केवल एक ही व्यक्ति है. और वह है जिला आपूर्ति पदाधिकारी. जिला आपूर्ति पदाधिकारी बंका राम अपने पद के अतिरिक्त दुमका एसएफसी के जिला प्रबंधक के भी प्रभार में हैं.

आपूर्ति पदाधिकारी का पद खाली रहने से कई तरह के काम प्रभावित

जिला आपूर्ति विभाग के कार्यालय में लिपिक, लेखापाल और चपरासी तक प्रतिनियोजन में ही है. अनुमंडल स्तर पर देखें, तो अनुमंडल आपूर्ति पदाधिकारी का पद यहां लंबे समय से खाली ही पड़ा हुआ है. जिले में दस प्रखंड हैं, जहां प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी का पद सृजित है. इन पदों के प्रभार में संबंधित प्रखंड विकास पदाधिकारी ही है.  जिनके पास खुद कार्यबोझ है. प्रखंडों में लंबे अर्से से प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी का पद खाली रहने से कई तरह के काम, पर्यवेक्षण और निरीक्षण कार्य प्रभावित होता है.

दुमका में लगभग 12 लाख लोगों को राशन कार्ड से अनाज दिया जाता है

दुमका में लगभग 12 लाख लोगों को राशन कार्ड से अनाज दिया जाता है. इसमें गेहूं और चावल शामिल है. इसके साथ ही केरोसिन, धोती, साड़ी, लुंगी, पेट्रोल सब्सिडी भी दी जाती है. इसमें लाल कार्डधारकों की संख्या 2 लाख 12 हज़ार 434 परिवार (09 लाख 35 हज़ार सदस्य) है. जबकि 48 हज़ार 316 परिवार अंत्योदय योजना के लाभुक हैं. जिन्हें पीला कार्ड निर्गत किया जाता है. हरा कार्ड धारी 19 हजार 487 परिवार शामिल है.

 आपूर्ति विभाग क्यों नहीं कर रहा है रिक्त पदों की नियुक्ति

जबकि सफेद कार्ड धारी जिन्हें सिर्फ केरोसिन तेल मिलता है. वैसे परिवारों की संख्या 10 हज़ार 26 है. इन सभी के लिए जो खाद्यान्न सरकार की ओर से तय किया गया है. उन्हें उन तक पहुंचाने की जिम्मेदारी आपूर्ति विभाग की है. अब जाहिर है कि इतनी बड़ी संख्या में लाभुक हैं. और पदाधिकारियों और कर्मियों की संख्या नगण्य है. तो कैसे सुचारू रूप से अनाज का वितरण होता होगा और कितनी निगरानी होती होगी. खामियाजा आम जनता को ही भुगतना पड़ता होगा. इसलिए जरूरत है सरकार की नजरें इनायत इस विभाग पर हो ताकि सरकारी योजना का लाभ सुचारू रूप से जरूरतमंदों तक पहुच सके.

रिपोर्ट-पंचम झा

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