धनबाद: आज 11 मार्च है, 18 मार्च को धनबाद में डिप्टी मेयर के चुनाव की अधिसूचना जारी हो गई है. 18 मार्च को डिप्टी मेयर के लिए वोटिंग होगी. अब केवल एक सप्ताह का समय बच गया है. रेस में तो कई चल रहे हैं ,लेकिन हर दिन और हर रात समीकरण बदल रहे हैं. जिन नाम पर चर्चा चल रही है, वह तो रेस में है ही, लेकिन कुछ "साइलेंट प्लेयर" भी हैं, जिनकी पीठ पर राजनीतिक दल के बड़े-बड़े नेताओं का हाथ है.
ऐसे में इस बात की संभावना बन गई है कि रेस से इतर कोई डिप्टी मेयर बन सकता है. चूंकि धनबाद में जिस तरह से मेयर का चुनाव हुआ और संजीव सिंह ने भारी मतों से विजय हासिल की, उससे धनबाद में एक नया राजनीतिक समीकरण तैयार होता दिख रहा है .इस नए समीकरण को कमजोर करने के लिए साइलेंटली तैयारी की जा रही है.
कहा जा रहा है कि डिप्टी मेयर के पद पर संजीव सिंह के विरोधी खेमे के लोग अपना आदमी बैठना चाहते हैं. इसको लेकर राजनीतिक दल के लोग सक्रिय हैं. लेकिन सामने नहीं आ रहे हैं . परदे के पीछे से खेल शुरू है .कहा जा सकता है कि डिप्टी मेयर का चुनाव भी कम रोचक नहीं होगा. धनबाद नगर निगम के डिप्टी मेयर का पद एक बार फिर राजनीतिक दलों की ताकत का अखाड़ा बन सकता है.
मेयर चुनाव में बैक फुट पर गए कई राजनीतिक दल के नेता भीतर ही भीतर कोई ना कोई गुल खिला सकते हैं. यह अलग बात है कि पार्षदों का दल लगातार नवनिर्वाचित मेयर संजीव सिंह से संपर्क कर रहा है. लेकिन इस बात की पक्की सूचना है कि कई दल के नेता पर्दे के पीछे से मोर्चा संभाल रहे हैं. यह बात भी सच है कि कई दावेदार बैक फुट पर भी चले गए हैं. वजह के बारे में कई कारण बताएं और गिनाए जाते हैं.
दरअसल निगम चुनाव परिणाम के बाद निगम बोर्ड के महत्वपूर्ण पद डिप्टी मेयर की कुर्सी के लिए सियासत तेजी से बदल रही है. जोड़-तोड़ और समर्थन जुटाने की कोशिश चल रही है. वैसे तो नगर निगम के चुनाव का परिणाम आने के बाद से ही संभावित दावेदार सक्रिय हैं ,लेकिन कभी वह आगे बढ़ रहे हैं तो कभी पीछे हट रहे हैं. कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि डिप्टी मेयर की कुर्सी एक बार फिर धनबाद के राजनीतिक दलों की ताकत की परीक्षा ले सकता है.
वैसे संजीव सिंह चाहेंगे कि उनका कोई समर्थक ही डिप्टी मेयर बने .लेकिन इसका पता तो 18 मार्च को ही चलेगा.