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Big Breaking:धनबाद के पूर्व सांसद ददई दुबे का निधन,दिल्ली के अस्पताल में ली अंतिम सांस,पूरे झारखंड में शोक

Big Breaking:धनबाद के पूर्व सांसद ददई दुबे का निधन,दिल्ली के अस्पताल में ली अंतिम सांस,पूरे झारखंड में शोक

धनबाद(DHANBAD):कोयलांचल के मजदूरों के लिए हमेशा दहाड़नेवाली आवाज हमेशा हमेशा के लिए बंद हो गई. धनबाद के पूर्व सांसद ददई दुबे का गुरुवार की रात सवा आठ बजे दिल्ली स्थित अस्पताल में निधन हो गया. वह बीमार चल रहे थे. इंटक के बैनर तले कोयला मजदूरों की सेवा में आजीवन लग रहे. मंत्री पद को भी सुशोभित किया. मूल रूप से पलामू के बिश्रामपुर के रहने वाले ददई दुबे किसी नाम के मोहताज नहीं थे. बाबा के नाम से वह प्रसिद्ध थे .ददई दुबे का निधन कोयला मजदूर संगठन के लिए एक अपूरणीय क्षति बताई जाती है.

श्रमिक नेता के तौर पर पहचान 

चंद्रशेखर दुबे ने लंबे समय तक श्रमिकों और आम जनता के लिए संघर्ष किया। उनका राजनीतिक सफर 1970-77 में मुखिया के रूप में शुरू हुआ, जिसके बाद उन्होंने 1985-2000 तक बिहार विधान सभा में तीन बार विधायक का कार्य किया. झारखंड गठन के बाद वे 2000-2004 तक झारखंड विधान सभा के मंत्री रहे और श्रम मंत्री पद संभाला। 2004 में वे धनबाद लोकसभा सीट से सांसद बने और कोयला एवं स्टील मामलों की संसदीय समितियों में सक्रिय भूमिका निभाई .
अगस्त 2013 में, वे झारखंड सरकार में ग्राम विकास, पंचायती राज, श्रम एवं रोजगार मंत्री बने .

 इंटक और मजदूर आंदोलन

ददई दुबे राष्ट्रीय कोयला मजदूर संघ (राष्ट्रिय कोयला मज़दूर संघ), जो कि INTUC से जुड़ा था, के महासचिव और INTUC के वरिष्ठ नेता रहे.वे लगातार खनन क्षेत्र के मजदूरों के अधिकारों के लिए आवाज उठाते रहे. एक समाचार में यह भी वर्णित है, “उनकी सक्रिय भूमिका श्रमिक आंदोलनों में रही”  . उन पर कभी-कभी विवादित गतिविधियों के आरोप भी लगे, जैसे कि INTUC से निलंबित होने और पद दावा विवाद.

 पारिवारिक जीवन

ददई दुबे का जन्म 2 जनवरी 1946 को गढ़वा, झारखंड में हुआ था। उनकी पत्नी का नाम दुलारी देवी है.उनका वैवाहिक जीवन और तीन संतानें हैं . वे पलामू जिले के विश्रामपुर क्षेत्र से छह बार विधायक रहे, झारखंड कांग्रेस के मजबूत स्तंभ थे और श्रमिकों के मित्र माने जाते थे.

एक युग का अंत 

चंद्रशेखर ‘ददई’ दुबे का निधन झारखंड कांग्रेस और मजदूर समुदाय के लिए एक अपूरणीय क्षति है.राजू व केशव महतो सहित कई नेताओं ने संवेदनाएँ व्यक्त कीं, बताते हुए कि उनकी कमी पार्टी और मजदूर वर्ग दोनों में खली है.एक निष्ठावान नेता और ‘बाबा’ की उपाधि स्वाभाविक रूप से उन्होंने अर्जित की, जो जीवन पर्यंत मजदूरों की सेवा और संघवाद की लड़ाई में समर्पित रहकर एक जीवंत विरासत छोड़ गए.

Published at:10 Jul 2025 03:57 PM (IST)
Tags:Big Breaking: Former minor Dadaji of Dhanbad passed awaybreathed his last in Delhi hospitalmourning in entire JharkhandDadai dubeyJharkhanddadai dubey deathjharjharkhandranchiDhanbad
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