रामगढ़ (RAMGARH): झारखंड के प्रमुख प्राकृतिक पर्व सरहुल को लेकर पूरे राज्य में उत्सव और आस्था का माहौल है. इसी कड़ी में भुरकुंडा रिवर साइड स्थित केंद्रीय सरना स्थल पर पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना की शुरुआत हो गई है. यहां केंद्रीय पाहन देवलाल मुंडा ने विधि-विधान से सरहुल पूजा संपन्न कराई.
सरना स्थल पर आयोजित इस विशेष पूजा में आदिवासी समुदाय के लोगों की भारी भीड़ उमड़ी. श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे और प्रकृति की आराधना में शामिल हुए. पूजा के दौरान जल, जंगल और जमीन को जीवन का आधार मानते हुए उनकी पूजा की गई.
केंद्रीय पाहन देवलाल मुंडा ने बताया कि सरहुल केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति और मानव के बीच गहरे संबंध का प्रतीक है. इस अवसर पर लोग सुख-समृद्धि, अच्छी फसल और समाज में शांति की कामना करते हैं. उन्होंने कहा कि यह पर्व आदिवासी संस्कृति और परंपरा की पहचान है, जिसे पीढ़ियों से मनाया जा रहा है.
सरहुल को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह देखने को मिल रहा है. लोग पारंपरिक नृत्य, गीत और सामूहिक आयोजन के जरिए इस पर्व को धूमधाम से मना रहे हैं. भुरकुंडा का केंद्रीय सरना स्थल इस अवसर पर आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुट रहे हैं.
रिपोर्ट : अनुज कुमार