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भोला की ’पुराने कपड़े की दुकान’ निर्धनों के लिए बना तन ढंकने का जरिया, पढ़ें पूरी खबर 

BY -
Samiksha Singh
Samiksha Singh
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 13, 2026, 6:02:40 PM

लातेहार(LATEHAR): कहा जाता है कि ऐसा हवन नहीं करना चाहिए कि खुद का भी हाथ जल जाए, लेकिन समाजसेवा ऐसा जुनून है जिसमें लोग खुद की तकलीफ सहकर भी दूसरे की मदद के लिए तैयार रहते हैं. समाज सेवा के क्षेत्र में कुछ ऐसा ही काम करके लोगों के बीच मिशाल बना हुआ है लातेहार जिला मुख्यालय का एक युवक, जो खुद तंगहाली में अपने परिवार का पेट पाल रहा है, लेकिन निर्धनों के तन ढंकने का एक जरिया बन गया है. देखिए हमारी यह खास रिपोर्ट

जानिए भोला के नेक काम की कहानी 

दरअसल लातेहार जिला मुख्यालय के शहीद चौक चौक निवासी भोला प्रसाद खुद तंगहाली में जीवन यापन कर रहे हैं, लेकिन ये निर्धन परिवारों के लिए एक कपड़े की दुकान के मालिक भी हैं, जो निर्धन परिवार के लिए बिना पैसे यानी कि मुफ्त में कपड़े उपलब्ध करवाता है. ऐसे तो भोला प्रसाद एक फुटकर व्यापारी हैं, जो ग्रामीण इलाकों में लगने वाले साप्ताहिक हाटों, बाजारों में आयुर्वेदिक दवा और श्रृंगार की दुकान लगाते हैं. भोला बताते हैं, "मेरा बचपन अभावों में गुजरा है. बड़ा हुआ तो परिवार का बोझ कंधे पर आ गया और साप्ताहिक बाजारों में दुकान लगाने लगा. इसी दौरान मैंने गर्मी के दिनों में लू के थपेड़े और ठंड के दिनों में ठिठुरते निर्धन परिवार के बच्चों को देखकर दिल में चुभन होती थी, इसी के बाद मैंने गरीबों के तन ढंकने की शुरूआत की. "उन्होंने बताया पहले वे घर-घर जाकर बेकार कपड़ों को इकट्ठा करते थे और गांव-गांव जाकर निर्धन परिवारों के बीच कपडे बांटा करते थे. प्रसाद बताते हैं कि इस कार्य में खुद के व्यवसाय के लिए वे समय नहीं निकल पाते थे. इसके बाद उन्होंने पुराने कपडों की दुकान खोल डाली. भोला बताते हैं कि अब लोग यहां घर के पुराने और बेकार पड़े कपड़े देने पहुंच जाते हैं और निर्धन परिवार के लोग यहां से कपड़े लेकर चले जाते हैं. 

 24 घंटे गरीबों के लिए कपड़ा रहता है उपलब्ध 

भोला बताते हैं कि 'पुराने कपड़े की दुकान' में जरूरतमंद लोगों को उनकी साइज के मुताबिक कपडा मुफ्त में उपलब्ध करवाया जाता रहा है. उन्होंने बताया कि नए इलाकों में वे खुद भी पुराने कपड़े इकट्ठा करने जाते हैं और जब लोगों को पता चल जाता है तो वे खुद कपड़ा पहुंचाने दुकान पर आते हैं. भोला के पुराने कपड़े की दुकान में आज जींस पैंट, टीशर्ट, फ्रॉक, सलवार शूट, साडी, स्वेटर, जैकेट, धोती, शॉल सहित कई पुराने कपड़ों का भंडार है. उन्होंने बताया कि उनका यह काम अनवरत सात वर्षों से चल रहा है. भोला बताते हैं कि प्रारंभ में कई लोगों के ताने और आलोचना भी सहने को मिला लेकिन जैसे-जैसे समय गुजरता गया लोगों का सहयोग भी मिलता गया. अपने जुनून और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ भोला के कदम इस काम से कभी नहीं डिगे. भोला को अब आसपास के लोग कपड़ा इकट्ठा करने में भी सहयोग कर रहे हैं. गरीबी को नजदीक से देखने वाले भोला कहते हैं कि वे कई निर्धन परिवारों को खुद के पैसे से नए कपड़े भी खरीदकर बांटे हैं और फिर उन बच्चों के चेहरे पर जो मुस्कान दिखती है उससे उन्हें आत्मसंतुष्टि मिलती है. उनके इस नेक काम को देखकर स्थानीय स्तर के लोगों ने भी दिल खोलकर उन्हें इस काम में मदद देने लगे हैं. जहां 24 घंटे गरीबों के लिए मुफ्त कपड़ा उपलब्ध रहता है. सुबह में भोला अपनी पत्नी और बच्चों के साथ मिलकर कपड़ा दुकान में काम करते हैं और कपड़ा लेने आए गरीबों को मुफ्त में वस्त्र देते हैं. भोला बताते हैं कि लॉक डाउन में भी उन्होंने लोगो की खूब मदद की थी. चौक चौराहे पर तैनात जवानों को सत्तू पिलाने से लेकर लोगो के बीच मास्क सेनिटाइजर का भी वितरण करने का कार्य उन्होंने किया है. उन्होंने कहा यह कार्य आगे भी जारी रहेगा. 

बेटी ने कहा बड़ी होकर पापा की तरह करूंगी नेक काम 

इधर कपड़ा वितरण के कार्य में पिता की हमेशा मदद करती भोला प्रसाद की बेटी जूही गुप्ता बताती है कि वह पिता के इस नेक कार्य से बहुत खुश है वह कहती है कि बड़ी होकर वह भी पिता के जैसे ही गरीबों की सेवा करने का कार्य करेगी. वह कहती है वह पापा के इस नेक कार्य को देखकर गर्व महसूस करती है. इधर मुफ्त कपड़ा दुकान में कपड़ा लेने पहुँचे ग्रामीण महिला संगीता देवी बताती है कि उसके छोटे छोटे बच्चे हैं इतने पैसे भी नही है कि ठंड से बचाव के लिए पैसे देकर कपड़े की खरीदारी की जाए,लेकिन मुफ़्त कपड़ा में आसानी से बिना पैसे के बच्चों के साथ साथ मुझे भी ठंड से बचाव के लिए कपड़ा मिल जाता है. संगीता कहती है कि इतना मदद तो हम गरीबों को सरकार भी नहीं कर रही है. जितना इस मुफ्त कपड़ा दुकान से हमलोगों को लाभ मिल रहा है. ग्रामीण भोला प्रसाद के इस नेक कार्य के लिए धन्यवाद देते नहीं थकते हैं. 

Tags:jharkhand newsdhanbad newsBhola's 'old clothes shop' became a means of covering the body for the poor

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