धनबाद (DHANBAD) : बीसीसीएल में संचालित आउटसोर्सिंग कंपनियां मजदूरो का " बाप" बनने की कोशिश नहीं करें अन्यथा उन्हें बोरिया बिस्तर समेट कर जाना होगा. गुरुवार को पहली बार ऐसा दिखा कि मजदूर संगठन और बीसीसीएल मैनेजमेंट देवप्रभा आउटसोर्सिंग कंपनी के खिलाफ सख्त थे. दरअसल, बीसीसीएल में संचालित आउटसोर्सिंग तमाम कंपनियों की समानांतर व्यवस्था चलती है. उन्हीं के अनुसार नियम बनता है और प्रोडक्शन होता है. सूत्रों की माने तो कोई भी आउटसोर्सिंग कंपनी एनआईटी के हिसाब से काम नहीं करती हैं. कोयला उत्पादन बढ़ाने के लिए किसी भी हद तक जाती है. कोयला चोरी कराने के भी आरोप लगते रहे हैं. इस बार मारपीट का मामला तूल पकड़ लिया है. सेंट्रल हॉस्पिटल में घायलों से मिलने बीसीसीएल के सीएमडी मनोज अग्रवाल भी पहुंचे। और उन्होंने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि इस मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. बीसीसीएल के अधिकारी आउटसोर्स कंपनी के खिलाफ एफआईआर करने का हिम्मत कर लिए हैं. घायलों से मिलने सेंट्रल हॉस्पिटल में पूर्व विधायक संजीव सिंह भी पहुंचे.
इसबार का मामला आउटसोर्स कंपनी के लिए उल्टा पड़ गया है
दरअसल, इस बार का मामला कहीं फंसता दिख रहा है. झरिया विधायक रागिनी सिंह, पूर्व विधायक संजीव सिंह समर्थकों के साथ परियोजना स्थल पर पहुंचे, तो दूसरी ओर पूर्व मेयर इंदु देवी , आसनी सिंह , अभिषेक सिंह, तारा देवी , सुरेश प्रसाद, एके झा समर्थकों के साथ झरिया- बलियापुर मार्ग को जाम कर धरने पर बैठ गए. दोनों समूह मारपीट के आरोपियों पर कार्रवाई और विभागीय परियोजना को चलाने की गारंटी की मांग करने लगे. संजीव सिंह ने तो परियोजना में खड़े होकर काटे गए रास्ते को भरवा दिया। वहीं, संयुक्त मोर्चा ने विरोध में कई आउटसोर्सिंग परियोजनाओं का काम बंद करा दिया। जानकारी के अनुसार सड़क जाम कर रहे नेताओं से मिलने बीसीसीएल के डायरेक्टर टेक्निकल, डायरेक्ट पर्सनल भी पहुंचे. उन्होंने आश्वासन दिया कि जो भी दोषी होंगे, उन पर कार्रवाई होगी। 8 घंटे बाद सड़क जाम खत्म हुआ.
आउटसोर्सिंग कंपनी को हद में रहने की चेतावनी क्यों दी गई
संजीव सिंह और रागिनी सिंह ने आउटसोर्सिंग कंपनी को हद में रहने की चेतावनी दी. साथ ही कहा कि वह पीड़ित मजदूरों से माफी मांगे, इस दौरान काफी संख्या में मजदूर मौजूद थे. दरअसल, लोदना के नॉर्थ साउथ तिसरा , जिनागोड़ा विभागीय परियोजना जाने वाले मुख्य मार्ग को बुधवार की रात में काट दिया गया था. गुरुवार की सुबह बीसीसीएल के विभागीय कर्मियों ने इसका विरोध किया. देखते-देखते प्रोजेक्ट रण क्षेत्र में बदल गया. आउटसोर्सिंग कंपनी के महाप्रबंधक वहां पहुंचे ,बातचीत के क्रम में मामला बिगड़ गया और मारपीट शुरू हो गई. इसमें महाप्रबंधक भी घायल हो गए. प्रतिशोध में आउटसोर्सिंग समर्थकों ने भी बीसीसीएल कर्मियों से मारपीट करनी शुरू कर दिए. उसके बाद विवाद बढ़ा , हालांकि गुरुवार का पूरा आंदोलन दो गुटों में बंटा रहा. एक तरफ जनता मजदूर संघ और जनता श्रमिक संघ थे तो दूसरी ओर संयुक्त मोर्चा के लोग थे.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
