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प्रतिबंधित कफ सिरप कांड: कार्रवाई से पहले सफाया, सवालों के घेरे में पुलिस-प्रशासन

BY -
Vinita Choubey  CE
Vinita Choubey CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 16, 2026, 11:04:20 PM

दुमका (DUMKA) : दुमका में प्रतिबंधित कफ सिरप का अवैध कारोबार अब चोरी-छिपे नहीं, बल्कि खुलेआम चल रहा है. समय-समय पर छापेमारी में इसके सबूत भी मिलते रहे हैं. इसके बावजूद यह सवाल उठना लाजमी है कि आखिर यह कारोबार फल-फूल कैसे रहा है? ताजा मामला तो सीधे तौर पर पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर ही गंभीर सवाल खड़े करता है.

मंगलवार को मिली पुख्ता सूचना, पुलिस ने की खानापूर्ति

मंगलवार को मुफस्सिल थाना क्षेत्र के कुसुमडीह स्थित एक मकान में प्रतिबंधित कफ सिरप छिपा कर रखने की पुख्ता सूचना स्वास्थ्य विभाग और पुलिस को मिली. पुलिस मौके पर पहुंची जरूर, लेकिन ताला बंद देखकर बिना किसी ठोस कार्रवाई के लौट गई. न तो ताला तुड़वाया गया, न ही स्थल की निगरानी की व्यवस्था की गई. सवाल उठता है कि क्या पुलिस को पहले से पता था कि अंदर क्या है?

ड्रग इंस्पेक्टर की गैरमौजूदगी या जानबूझकर टालमटोल?

सूचना के वक्त ड्रग इंस्पेक्टर पाकुड़ में थे. दुमका लौटने पर उन्होंने सहयोग मांगा, लेकिन उसी दिन सड़क दुर्घटना के बाद हुए जाम का हवाला देकर पुलिस और अंचल प्रशासन ने हाथ खड़े कर दिए. क्या एक गंभीर नशा तस्करी का मामला सड़क जाम से कम अहम था? या यह सिर्फ एक बहाना था?

बुधवार को सन्नाटा, प्रशासन ने साधी चुप्पी

मंगलवार के बाद पूरा बुधवार बीत गया, लेकिन किसी भी स्तर पर कोई आधिकारिक कार्रवाई नहीं हुई. ऐसा प्रतीत हुआ मानो प्रशासन को भरोसा था कि मामला दब जाएगा. यही वह समय था जब कथित तौर पर साक्ष्य मिटाने की जमीन तैयार की गई.

अखबार में छपी खबर तो सिस्टम में आया भूचाल

शनिवार को जब मामला एक दैनिक अखबार में प्रमुखता से प्रकाशित हुआ, तब जाकर प्रशासन हरकत में आया. सवाल यह है कि अगर मीडिया में खबर नहीं छपती तो क्या यह मामला हमेशा के लिए दफन हो जाता?

रविवार को जांच, लेकिन तब तक सब कुछ साफ

रविवार को ड्रग इंस्पेक्टर, मुफस्सिल थाना प्रभारी और सदर अंचलाधिकारी जांच के लिए पहुंचे. लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. मकान का ताला बदला जा चुका था, कमरे से कफ सिरप की एक भी बोतल नहीं मिली और दीवार में सेंधमारी के साफ निशान मौजूद थे. यह कोई साधारण चोरी नहीं, बल्कि सुनियोजित सबूत मिटाने की कार्रवाई प्रतीत होती है.

मकान मालकिन के खुलासे से हड़कंप

मकान मालकिन ने जो बताया, उसने पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया. उनका कहना है कि मंगलवार को ही एक कॉल आया, जिसमें कहा गया कि ताला चोरी हो गया है और नया ताला लगाया जा रहा है. रविवार को अधिकारियों के समक्ष जब महिला ने उस नंबर पर कॉल किया तो मुफस्सिल थाना के एसआई निरंजन कुमार के मोबाइल पर घंटी बजने लगी. यही नहीं, महिला के मोबाइल में 9065080340 नंबर से मिस कॉल भी दर्ज है. सवाल साफ है एक दारोगा इस निजी मकान के ताले से जुड़ी जानकारी क्यों दे रहा था?

पांच दिन की देरी, किसे मिला फायदा?

मंगलवार को सूचना, रविवार को जांच, बीच में पूरे पांच दिन. इस दौरान कमरा खाली हो गया, ताला बदल गया और दीवार तक तोड़ दी गई. यह सब किसके संरक्षण में हुआ? और किसे इसका सबसे ज्यादा फायदा मिला?

अधिकारियों की चुप्पी, रटा रटाया जवाब

ड्रग इंस्पेक्टर राजेश कुमार मीडिया से बचते नजर आए, जबकि सीओ अमर कुमार और थाना प्रभारी सत्यम कुमार ने वही रटा रटाया जवाब दोहराया कि मामले की जांच की जा रही है. लेकिन सवाल यह है कि जब सबूत ही गायब हो चुके हैं, तो जांच आखिर किस बात की?

रेजल अंसारी फरार, पुलिस की नाकामी उजागर

मकान बाबूलाल किस्कू का है, जो गिरिडीह में सहायक पुलिस में रसोइया के पद पर कार्यरत है. उसने बिना रेंट एग्रीमेंट के ₹2500 में कमरा रेजल अंसारी को दिया था. रेजल अंसारी पार्सल कारोबार की आड़ में यह धंधा चला रहा था. हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े मामले के बाद भी पुलिस अब तक रेजल अंसारी को पकड़ नहीं पाई है.

पुलिस नशा माफिया गठजोड़ की बू

पूरा घटनाक्रम नशा माफिया और पुलिस के संभावित गठजोड़ की ओर इशारा करता है. एसआई निरंजन कुमार सिर्फ मोहरा हैं या पूरी कहानी का हिस्सा, यह जांच का विषय है. लेकिन यह मानना मुश्किल है कि थाना प्रभारी को इसकी भनक तक न हो.

सीसीटीवी फुटेज से खुल सकता है राज, लेकिन क्या होगी जांच?

घर के सामने सीसीटीवी कैमरा लगा हुआ है. अगर ईमानदारी से फुटेज खंगाली जाए तो सारा सच सामने आ सकता है. सवाल सिर्फ इतना है कि क्या प्रशासन सच सामने लाना चाहता है, या इस मामले को भी बाकी मामलों की तरह फाइलों में दफना दिया जाएगा?

रिपोर्ट-पंचम झा

Tags:dumka newsBanned cough syrup scandaEvidence destroyedaction takenpoliceadministration under scrutiny

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