जमशेदपुर (JAMSHEDPUR): बांस अब सिर्फ एक पेड़ नहीं रहा, बल्कि यह लोगों की रोजी-रोटी का अहम साधन बन गया है. पहले जहां बांस का इस्तेमाल सीमित कामों तक ही होता था, वहीं अब इससे जुड़े काम गांव के लोगों को रोजगार और बेहतर आमदनी दे रहे हैं. पूर्वी सिंहभूम जिले के चाकुलिया में बांस की खेती काफी होती है. ग्रामीण परिवार बांस की खेती कर रहे हैं और इसे बाजार में बेचकर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. इसके साथ ही बड़ी संख्या में लोग बांस से तरह-तरह के उत्पाद बनाकर अपनी आय बढ़ा रहे हैं. बांस से टोकरी, सूप, फर्नीचर, सजावटी वस्तुएं और घरेलू उपयोग की चीजें बनाई जा रही है. बांस के उत्पादों की बाजार में अच्छी मांग है. स्थानीय बाजार के अलावा महानगरों में भी बांस के उत्पाद बेचे जा रहे है.
ग्रामीणों को दिया जा रहा प्रशिक्षण
बांस के उत्पाद को बढ़ावा देने के लिए वन विभाग ग्रामीणों को बांस से उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण भी दे रहा है. हाल ही में 25 ग्रामीणों को वन विभाग ने प्रशिक्षण दिलाया. ग्रामीणों को बांस से कुर्सी, टेबल, सोफा, फ्लावर वास और सजावटी सामान बनाना सिखाया गया है. प्रशिक्षण के बाद ये लोग अपने घरों पर ही उत्पाद तैयार कर बाजार में बेच रहे हैं. उन्हें अच्छा मुनाफा हो रहा है. बांस आधारित काम के लिए ज्यादा पूंजी की जरूरत नहीं होती. कम खर्च में लोग अपना काम शुरू कर सकते हैं और धीरे-धीरे इसे बढ़ा सकते हैं. यही वजह है कि ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के बीच यह काम तेजी से लोकप्रिय हो रहा है.
बांस के पौधे भी रोपे जा रहे
वन विभाग द्वारा बांस के पौधों का रोपण भी किया जा रहा है, ताकि भविष्य में कच्चे माल की कमी न हो. दलमा क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर बांस लगाए गए हैं, जिससे न सिर्फ पर्यावरण को फायदा हो रहा है, बल्कि लोगों को रोजगार के नए अवसर भी मिल रहे हैं. बांस से जुड़े इस बढ़ते काम ने गांवों में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया है. अब लोग शहरों की ओर पलायन करने के बजाय अपने गांव में ही रोजगार पा रहे हैं. दलमा में हाल ही में दलमा बुरु हाट खोला गया है. यहां एक दंपति द्वारा बांस से बने उत्पादों की बिक्री की जा रही है. बांस के उत्पाद दलमा आने वाले पर्यटकों को काफी पसंद आ रहा है.
बांस उत्पादन का हब है चाकुलिया
चाकुलिया क्षेत्र को बांस उत्पादन के बड़े हब के रूप में जाना जाता है. यह इलाका सिर्फ राज्य ही नहीं, बल्कि आसपास के कई राज्यों के लिए भी बांस की आपूर्ति का प्रमुख केंद्र है. चाकुलिया रेंज में करीब 25,000 एकड़ जमीन पर बांस की खेती की जाती है. हर साल लगभग 5 करोड़ के बांस का उत्पादन होता है. यहां के ग्रामीणों के लिए बांस किसी साधारण फसल से बढ़कर है. इसे नकदी फसल यानी कैश क्रॉप के रूप में देखा जाता है और स्थानीय लोग इसे किसानों का एटीएम भी कहते हैं. जरूरत पड़ने पर वे बांस बेचकर तुरंत पैसा जुटा लेते हैं. चाकुलिया में तैयार होने वाले बांस की मांग देश के कई राज्यों में है. हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में यहां से नियमित आपूर्ति होती है. हर महीने करीब 150 से 200 ट्रक बांस इन राज्यों में भेजे जाते हैं. इस तरह बांस की खेती ने चाकुलिया के ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाई है.