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दल-बदल मामले में क्या बाबूलाल मरांडी की जा सकती है विधायकी! जानिये इनके अलावा और किस-किस पर लटकी तलवार

दल-बदल मामले में क्या बाबूलाल मरांडी की जा सकती है विधायकी!  जानिये इनके अलावा और किस-किस पर लटकी तलवार

रांची (RANCHI): सिर्फ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की विधायकी पर ही खतरा नहीं मंडरा रहा है, राज्य के और विधायक भी इसके रडार पर हैं. इसमें प्रमुख हैं पूर्व सीएम और भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी. इसके अलावा हेमंत के छोटे भाई व झामुमो विधायक बसंत सोरेन, पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री मिथिलेश कुमार, कांके विधायक समरीलाल, कांग्रेस के विधायक इरफान अंसारी, राजेश कच्छप और नमन विक्सल कोंगाड़ी. इनकी भी विधानसभा सदस्यता जाने की आशंका है. आपको याद ही होगा कि विधानसभा चुनाव के बाद बाबूलाल मरांडी ने अपनी पार्टी झाविमो का विलय भाजपा में कर दिया था. इसका विरोध करने पर विलय से पहले उन्होंने अपने दो विधायक प्रदीप यादव और बंधु तिर्की को पार्टी से निष्कासित कर दिया था. बाद में दोनों ने कांग्रेस की सदस्यता ली. बाबूलाल मरांडी को भाजपा विधायक के रूप में तो प्रदीप यादव और बंधु तिर्की को निर्दलीय विधायक के रूप में स्वीकृति मिली.

बाबूलाल पर दल-बदल का मामला चल रहा है. 30 अगस्त को भी स्पीकर न्यायाधिकरण में सुनवाई है. दसवीं अनुसूची के तहत मामले में सुनवाई होगी. दसवीं अनुसूची दल बदल से जुड़ी हुई है. बता दें दल-बदल की शिकायत स्पीकर से झामुमो विधायक भूषण तिर्की, कांग्रेस विधायक दीपिका पांडेय सिंह, विधायक प्रदीप यादव और माले से पूर्व विधायक राजकुमार यादव ने की थी. स्पीकर रवींद्रनाथ महतो दस बिंदुओं पर चार्ज फ्रेम कर सुनवाई की है. दोनों पक्षों की ओर से बहस पूरी हो चुकी है.

हेमंत सोरेन पर लटकी तलवार क्यों

ऑफिस ऑफ प्रॉफिट मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की विधानसभा सदस्यता खत्म हो सकती है. लेकिन अबतक न निर्वाचन आयोग, और ना ही राजभवन से इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि हुई. इसके बावजूद जहां यूपीए खेमे में बेचैनी है, तो भाजपा के गलियारे चुस्कियां ले रहे हैं. अब क्यों हेमंत की विधायकी पर तलवार लटकी है, आप सभी जानते ही हैं. चलिये याद करा देते हैं. दरअसल हेमंत सोरेन पर रांची के अनगड़ा में 88 डिसमिल पत्थर माइनिंग लीज लेने का आरोप है. 10 फरवरी को पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के नेतृत्व में भाजपा के एक प्रतिनिधि मंडल ने मामले में हेमंत सोरेन की सदस्यता रद्द करने की मांग की थी. कहा था कि सोरेन ने पद पर रहते हुए माइनिंग लीज ली है. यह लोक जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (RP) 1951 की धारा 9A का उल्लंघन है. राज्यपाल ने यह शिकायत चुनाव आयोग को भेज दी थी. खबर है कि आयोग ने राजभवन अपना मंतव्य भेज दिया है, अब राज्यपाल अपनी अनुशंसा आयोग को भेजेंगे.

क्या है बसंत सोरेन का मामला

हेमंत और बसंत- दोनों भाई के मामले में कई बातें कॉमन हैं. दोनों पर आरोप भाजपा ने लगाया है. दोनों पर आरोप पत्थर खदान लीज लेने का है. दोनों पर इल्ज़ाम भाजपा ने लगाए हैं। बसंत दुमका से झामुमो विधायक है. इनका मामला भी निर्वाचन आयोग में चल रहा है. बसंत सोरेन ने आयोग को अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उन्होंने कोई तथ्य नहीं छिपाया है. चुनाव के दौरान सौंपे गये शपथ पत्र में भी इसका उल्लेख है,  22 अगस्त के बाद आज भी सुनवाई हुई.

मिथिलेश कुमार ठाकुर का मामला समझें

पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री मिथिलेश कुमार पर भी तलवार लटकी है. वह गढ़वा से झामुमो के विधायक हैं. इनपर चुनावी नामांकन फॉर्म में गलत जानकारी देने का आरोप है. ऑफिस ऑफ प्रॉफिट का मामला इनके साथ भी जुड़ा है. 2019 में मेसर्स सत्यम बिल्डर्स चाईबासा कंपनी ने कई ठेका लिए. इस कंपनी में मिथिलेश की सोझेदारी है. मामले में गढ़वा डीसी ने रिपोर्ट चुनाव आयोग को भेज दी है. आयोग में सुनवाई चल रही है.

SC और ST के जाल में फंस चुके हैं भाजपा विधायक समरीलाल

रांची के पास की कांके विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है. यहां से भाजपा से समरीलाल विधायक हैं. उनके प्रतिद्वंद्वी रहे कांग्रेस के सुरेश बैठा का आरोप है कि समरीलाल एससी कैटेगरी से नहीं आते हैं. जबकि समरीलाल का तर्क है कि उनके पुर्वज बहुत पहले राजस्थान से झारखंड आए थे और वो एससी ही हैं. विधानसभा स्पीकर से होते हुए यह मामला अब झारखंड हाईकोर्ट पहुंच चुका है. याचिका में कहा गया है कि वर्ष 1956 में एकीकृत बिहार में उस जाति को एसटी में शामिल किया गया था, जिस जाति से समरीलाल आते हैं. बता दें कि झारखंड विधानसभा की जाति छानबीन समिति समरी लाल का जाति प्रमाण पत्र रद्द कर चुकी है.

कांग्रेस के तीन विधायकों पर भी उठे सवाल

जामताड़ा विधायक इरफान अंसारी की कार से करीब 49 लाख रुपए बंगाल पुलिस ने जब्त किये थे. यह 30 जुलाई की घटना है. कार में उनके अलावा खिजरी विधायक राजेश कच्छप और कोलीबिरा विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी भी थे. तीनों कांग्रेसी विधायकों को बंगाल पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था. 31 जुलाई को उन्हें स्थानीय अदालत में पेश किया गया था, जहां से 10 दिनों के रिमांड पर भेज दिया गया था. इधर, कांग्रेस ने तीनों को निलंबित कर दिया. उधर, कोलकाता सीआईडी ने उनसे गहन पूछताछ की. रांची तथा जामताड़ा स्थित संबंधित विधायकों के ठिकानों पर छापेमारी की. बाद में उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. पिछले दिनों अदालत ने इस शर्त पर जमानत दी है कि ये तीन माह तक कोलकाता से बाहर नहीं जाएंगे.

Published at:30 Aug 2022 01:01 PM (IST)
Tags:News
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