✕
  • News Update
  • Trending
  • Jharkhand
  • Bihar
  • Politics
  • Business
  • Sports
  • National
  • Crime Post
  • Life Style
  • Health Post
  • Foodly Post
  • TNP Special Stories
  • Big Stories
  • Know your Neta ji
  • Entertainment
  • Know Your MLA
  • Art & Culture
  • Tour & Travel
  • Local News
  • Special Stories
  • TNP Photo
  • Techno Post
  • covid -19
  • LS Election 2024
  • TNP Explainer
  • International
  • Blogs
  • Education & Job
  • Special Story
  • Religion
  • Top News
  • Latest News
  • Lok Sabha Chunav 2024
  • YouTube
☰
  1. Home
  2. /
  3. News Update

फिलहाल कोष में है 8000 करोड़,निकल रहे हर साल 2000 करोड़,ऐसे में तो रिटायर्ड कोल कर्मियों के इलाज पर गहरा जाएगा संकट,पढ़िए डिटेल्स 

BY -
Samiksha Singh
Samiksha Singh
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 13, 2026, 10:53:09 AM

धनबाद(DHANBAD): डेढ़ से 2000 करोड़ की हर साल हो रही है निकासी, फिलहाल कोष में है केवल 8000 करोड रुपए, अंशदान बढ़ाने पर दिया गया है जोर, ऐसा इसलिए किया गया है या किया जा रहा है, क्योंकि रिटायर्ड कोयला कर्मियों के इलाज पर अब संकट के बादल मंडराने लगे हैं. कोल इंडिया मुख्यालय में कंट्रीब्यूटरी पोस्ट रिटायरमेंट मेडिकल स्कीम नॉन एग्जीक्यूटिव ट्रस्टी बोर्ड की बैठक में प्रस्तुत रिपोर्ट में इस तरह की आशंका व्यक्त की गई है. रिपोर्ट के मुताबिक जिस रफ्तार में फंड खर्च हो रहा है, वह अगले 6 या 7 साल में पूरी तरह से खत्म हो जाएगा. अंशदान बढ़ाने पर जोर दिया गया है. इस फंड के माध्यम से रिटायर्ड कोल कर्मियों को 8 लाख तक का indore इलाज एवं गंभीर रोगों में उपचार की पूरी राशि देने का इंतजाम है.

प्रतिवर्ष आउटडोर इलाज के लिए अब पति-पत्नी को 25-25 हजार रुपए मिलेंगे

एक निर्णय यह जरूर हुआ है कि कोयला कर्मियों को प्रतिवर्ष आउटडोर इलाज के लिए अब पति-पत्नी को 25-25 हजार रुपए मिलेंगे. पहले कोल इंडिया ने पति-पत्नी को मिलाकर ₹25000 देने का आदेश जारी किया था. लेकिन हाल में हुई बैठक में इसे संशोधित कर पति-पत्नी दोनों को 25-25 हजार देने का निर्णय लिया गया है. कारण बताया गया है कि कोयला कंपनियों में नई नियुक्ति कम होने और सेवानिवृत कोयला कर्मियों की संख्या बढ़ने से यह स्थिति उत्पन्न हुई है. फिलहाल 8000 करोड रुपए का फंड है. फिलहाल वन टाइम अंशदान ₹40000 कोयला कर्मी और कोल इंडिया की ओर से प्रति कर्मी 18000 रुपए दिया जाता है. लेकिन फिलहाल अंशदान से कई गुना अधिक निकासी हो रही है. निकासी की रफ्तार इसी तरह बनी रही तो संभावना व्यक्त की गई है कि 2031 तक पूरी राशि खत्म हो जाएगी. फिर तो रिटायर्ड कोल कर्मियों के इलाज पर संकट छा जाएगा.

आउटसोर्सिंग कंपनियों के जरिए हो रहा काम 

कोयला उद्योग के राष्ट्रीयकरण के बाद अब स्थितियां बदल गई हैं. कंपनी खुद से कोयला खनन करने के बजाय आउटसोर्सिंग कंपनियां पर भरोसा कर रही है .नतीजा है कि नई नियुक्तियां अब ना के बराबर हो रही हैं .कोल इंडिया मैनेजमेंट भी आउटसोर्स के जरिए ही काम करने को आसान तरीका मान रहा है. धनबाद कोयलांचल की बात की जाए तो यहां संचालित कोल इंडिया की अनुषंगी इकाई बीसीसीएल में 90% तक कोयला का उत्पादन आउटसोर्स कंपनियों के भरोसे हो रहा है .यह अलग बात है कि अ वैज्ञानिक ढंग से कोयले के उत्खनन से पर्यावरण को खतरा बढ़ रहा है. धनबाद कोयलांचल में तो आउटसोर्सिंग कंपनियों के खिलाफ आवाज उठने लगी है .लेकिन इसमें बदलाव के कोई संकेत दिख नहीं रहे हैं.

रिपोर्ट: धनबाद ब्यूरो 

Tags:jharkhand newscoal indiadhanbaddhanbad coal karmiretired coal workers

© Copyrights 2023 CH9 Internet Media Pvt. Ltd. All rights reserved.