रांची(RANCHI): झारखंड में शिक्षक नियुक्ति में सरकार के द्वारा दोहरी नीति अपनाने के बाद राज्यभर में उबाल है. एनसीटी की गाइडलाइन को ताक पर रखते हुए झारखंड सरकार ने अल्पसंख्यक विद्यालयों में वैसे अभ्यर्थियों की नियुक्ति कर दी, जिनके पास ना ही कार्यानुभव है और ना ही वे टेट पास हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि वह सामान्य विद्यालय हो या अल्पसंख्यक क्या वहां पढ़ाई या सिलेबस की रूपरेखा अलग होती है. यदि नहीं होती तो इतने बड़े पैमाने पर आनन-फानन में सरकार के द्वारा उस समय अल्पसंख्यक स्कूलों में मात्र प्रशिक्षित आहर्ता वालों की नियुक्ति कैसी हो सकती है. राज्य में हजारों की संख्या में टेट पास अभ्यर्थी मौजूद हैं और अपनी नियुक्ति के लिए वर्षों से सरकार से भीख मांग रहे और आंदोलनरत भी हैं.
टेट पास नियुक्ति की मांग रहे भीख
नई शिक्षा नीति के तहत विद्यालयों में टेट पास अभ्यर्थियों की नियुक्ति करनी है. ऐसे में शिक्षा के साथ भद्दा मजाक झारखंड सरकार को महंगा पड़ सकता है. दूसरी तरफ सरकारी स्कूलों में लगभग 20 वर्षों से शिक्षा की रीढ़ बने सहायक अध्यापक ( पारा शिक्षक ) टेट उत्तीर्ण कर 6 वर्षों से समायोजन के लिए आंदोलनरत है. लेकिन अब तक उन्हें सरकारी शिक्षक के रूप में नियुक्त नहीं किया जा रहा है. टेट उत्तीर्ण सहायक अध्यापक अपने 50 फीसदी आरक्षण पर सीधे समायोजन की मांग कर रहे हैं, जो उनका अधिकार है.
गैर टेट को बना दिए शिक्षक
सरकार की मनमानी रवैया जनता के सामने हैं. क्या सरकार जनता को यह जवाब दे पाएगी कि महज प्रशिक्षित शिक्षक बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दे पाएंगे. उन्हें यह भी जवाब देना होगा कि राज्य में अहर्ता धारी टेट पास उत्तीर्ण सहायक अध्यापक और अन्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति कब देगी. राज्य के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के कमी के कारण शिक्षण व्यवस्था चौपट हो रही है. जो शिक्षक है भी उन्हें गैर शैक्षणिक कार्यों में लगा दिया जाता है. इससे भी शिक्षकों में अशांति व्याप्त है.
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ऐसा नहीं है कि झारखंड सरकार में कैबिनेट से ऐतिहासिक फैसले नहीं लिए हैं हो पुरानी पेंशन की बहाली हो या छात्रों के छात्रवृत्ति राशि में बढ़ोतरी की बात हो. इससे हटकर शिक्षा में सुधार के लिए सरकार के कुछ निर्णय समझ से बिल्कुल परे हैं, जिसमें शिक्षकों के वेतनमान में कमी कर चपरासी का वेतन लागू करना. टेट पास उत्तीर्ण सहायक अध्यापक और अन्य अभ्यर्थियों को सीधे अब तक नियुक्त नहीं करना सरकार पर बड़े सवाल खड़े करता है.
बता दें राज्यभर में इन दो फैसलों का कड़ा विरोध हो रहा है. इन फैसलों से आक्रोश में आए अभ्यर्थी अलग-अलग रणनीति बनाकर आंदोलन करने की तैयारी कर रहे हैं. इस गंभीर मुद्दे पर सरकार किसी तरह से समझौते के लिए तैयार नहीं है. ऐसे में राज्य सरकार की नीति ने एक बार फिर राज्य को आंदोलन के आग में झोंकने की राह तैयार कर दी है.
