गिरिडीह (GIRIDIH): चाईबासा में हुए मुठभेड़ में मारे गए पीरटांड़ थाना क्षेत्र के ढाई करोड़ रुपये के इनामी नक्सली पतिराम मांझी का शव रविवार शाम उसके पैतृक गांव पहुंचाया गया. शव के पहुंचते ही गांव और परिजनों में शोक की लहर दौड़ गई. सीआरपीएफ और झारखंड पुलिस के सैकड़ों जवानों की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पीरटांड़ थाना प्रभारी दीपेश कुमार के नेतृत्व में शव को वाहन से उतारकर उसके घर के बाहर एक खटिया पर रखा गया. शव को देखते ही परिजनों का करुण क्रंदन शुरू हो गया, जिसने वहां मौजूद सभी लोगों को झकझोर कर रख दिया.
गांव में चीख-पुकार
माहौल तेजी से तनावपूर्ण होता देख पुलिस बल तत्काल वहां से लौट गया. इस दौरान सुरक्षा कारणों से शव का चेहरा भी नहीं खोला जा सका.करीब शाम छह बजे पुलिस बल का काफिला नारायणपुर मोड़ होते हुए दीवानडीह झारहा गांव पहुंचा, जहां शव को पुनः रखा गया. शव लाए जाने की सूचना पहले ही स्वजनों को दे दी गई थी, जिसके कारण गांव में पहले से ही बड़ी संख्या में लोग जमा थे. जैसे ही पुलिस का काफिला पहुंचा, गांव में चीख-पुकार मच गई. लोग तेज गति से घरों से बाहर निकल आए और शव को देखने के लिए उमड़ पड़े.
इलाके में तनाव का माहौल
शव को इनोवा वाहन से लाया गया था. वाहन से उतारते ही लोग शव के चारों ओर इकट्ठा हो गए.शव से दुर्गंध आने के कारण उस पर सेंट का छिड़काव किया गया. प्रशासन की ओर से बताया गया कि पतिराम मांझी के शव को सड़क किनारे स्थित उसकी जमीन में ही दफनाया जाएगा, जिसके लिए स्थल का चयन कर लिया गया है.घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है, हालांकि पुलिस प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है.
रिपोर्ट-दिनेश कुमार रजक
