रांची(RANCHI): क्या सच में सिस्टम की मार और सरकार के अजर अंदाज करने से लोग नक्सली बनते है. क्या उद्योगपति और बड़े कारोबारी के जुल्म और शोषण से नक्सली पैदा होते है. यह सवाल आज फिर झारखण्ड में गूंज रहा है.आखिर कब तक जमीन और जान दोनों झारखण्ड के लोगो की प्लांट और रोजगार के नाम पर जाती रहेगी. यह सवाल ऐसे समय में उठा जब एक प्लांट के आगे पूरा सिस्टम नतमस्तक हो गया और गांव के लोगों की आवाज़ को सुनने से ही इंकार कर दिया. अब सोशल मीडिया पर सरकार और सिस्टम से लोग सवाल पूछ रहे है.
दरअसल झारखण्ड की राजधानी रांची से 40 किलो मीटर दूर रामगढ़ जिले के मौजूद मांडू प्रखंड के एक छोटे से इलाके बूढ़ाखाफ में प्लांट खुला.अलोक स्टील के नाम पर शुरुआत में बड़े बड़े सपने स्थानीय लोगों को दिखाया गया.लेकिन देखते ही देखते गांव ही बर्बाद हो गया.अब हर तरफ धूल की चादर दिखती है.यहाँ के पेड़ पौधे हरे नहीं बल्कि उजले दिखने लगे.मानो सब कुछ दूसरी दुनिया का हो.यहाँ कोई फसल लगती है तो वह भी आधी बर्बाद प्रदूषण के वजह से हो रही है.
स्थनीय बुढाखाप गांव के लोगों ने इसके खिलाफ आवाज़ उठानी शुरू की.पहले अपने प्रखंड और जिला के बड़े अधिकारियों के पास गए.जहाँ उम्मीद थी की बात सुनी जाएगी.लेकिन हर बार अनदेखा किया गया.जब आवाज़ को दबाने की कोशिश की गयी.आखिर में उम्मीद अब अबुआ सरकार के मुखिया से बचा.किसी तरह स्थानीय लोगों ने अपनी बात सोशल मीडिया के जरिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तक पहुंचा दी.मुख्यमन्त्र हेमंत सोरेन ने इसपर गंभीरता भी दिखाया दिखाया और डीसी रामगढ़ को तुरंत इसपर कार्रवाई का आदेश दे दिया.
लेकिन इसके बाद भी कोई कार्रवाई अब तक नहीं हुई.आखिर में अब फिर से युवक ने वीडियो बनाया.जिसमें उसका गुस्सा दिख रहा है.युवक सीधे बोल रहा है कि अगर कार्रवाई नहीं हुई.तो आखिर में नक्सली बन जायेंगे.वह युवक पूछ रहा है.आखिर कब तक शोषण और अत्याचार सहते रहेंगे.कबतक कॉर्पोरेट और सिस्टम की मार झेलेंगे.जब खेती करते है उसमें भी प्लांट का प्रदुषण दीखता है जब खाना खाते तो उसमें भी शरीर के अंदर जाता है.
अब सवाल है कि आखिर जब 31 मार्च 2026 को गृह मंत्रालय ने नक्सलवाद के खात्मे की बात कही है.हर तरफ नक्सलियों के खात्मे को लेकर सुरक्षा बल के जवानो का अभियान चल रहा है.लेकिन क्या सच में नक्सली ख़त्म हो जायेंगे.जब तक शोषण और अत्याचार ख़त्म नहीं होंगे तब तक नक्सली बनते रहेंगे।