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रांची में 30 साल पुरानी एक और बस्ती होगी वीरान, निगम ने चिपकाया नोटिस, इलाके में फैली सनसनी

BY -
Shreya Upadhyay  CE
Shreya Upadhyay CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 15, 2026, 12:23:17 AM

रांची (RANCHI): राजधानी रांची के खादगढ़ा–महुआ टोली इलाके में रहने वाले करीब 40 गरीब परिवारों के सामने एक बार फिर बेघर होने का खतरा खड़ा हो गया है. जिन मकानों में ये परिवार पिछले तीन से साढ़े तीन दशक से रह रहे हैं, अब उन्हीं घरों को तोड़ने की तैयारी रांची नगर निगम ने शुरू कर दी है. नगर निगम की ओर से 15 जनवरी तक मकान खाली करने का नोटिस दिए जाने के बाद इलाके में डर और आक्रोश का माहौल है.

स्थानीय लोगों के मुताबिक, वर्ष 1990 में तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के निर्देश पर गरीब और जरूरतमंद परिवारों को बसाने के उद्देश्य से यहां पक्के मकानों का निर्माण कराया गया था. उस समय कई परिवारों को यहां बसाया गया, लेकिन वर्षों बीत जाने के बावजूद आज तक उन्हें स्थायी मालिकाना हक से जुड़े स्पष्ट दस्तावेज नहीं दिए गए. इसके बावजूद लोग यहीं रहकर अपनी पूरी जिंदगी बसा चुके हैं.

इलाके में रहने वाले कई परिवारों के मकानों पर होल्डिंग टैक्स लिया जा रहा है. बिजली और पानी के कनेक्शन भी वर्षों से चालू हैं. लोगों का कहना है कि जब सरकार और नगर निगम ने सभी बुनियादी सुविधाएं दीं, तो अब अचानक मकानों को अवैध कैसे बताया जा सकता है. नगर निगम का तर्क है कि संबंधित जमीन उसकी नहीं थी, इसलिए उस पर बने मकान अवैध माने जा रहे हैं.

जानकारी के अनुसार, कुल 40 मकानों पर कार्रवाई की तलवार लटकी है. इनमें से करीब 30 मकानों को पहले होल्डिंग नंबर और जमीन आवंटन से जुड़ी प्रक्रिया में शामिल किया गया था, फिर भी अब इन्हें अवैध करार दिया जा रहा है. नगर निगम का कहना है कि 15 जनवरी तक लोगों को मकान खाली करने का समय दिया गया है. साथ ही जमीन और आवंटन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है. यदि आवंटन सही पाया गया तो समाधान निकाला जाएगा, अन्यथा तोड़फोड़ की कार्रवाई की जाएगी.

इस पूरे मामले ने लोगों की जिंदगी अस्त-व्यस्त कर दी है. स्थानीय निवासियों का कहना है कि “पहले सरकार ने घर दिया, अब वही घर छीनने की तैयारी है. गरीब लोग जाएं तो जाएं कहां.” हालात ऐसे हैं कि न लोगों को ठीक से नींद आ रही है, न ही चैन से खाना मिल पा रहा है. बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग लगातार डर में जी रहे हैं.

इस बीच, मकान टूटने की आशंका के सदमे में 55 वर्षीय एक बुजुर्ग की मौत हो जाने से मामला और संवेदनशील हो गया है. अब सवाल उठ रहे हैं कि इस मौत की जिम्मेदारी कौन लेगा और क्या मृतक के परिवार को कोई मुआवजा मिलेगा.

स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर निगम लगातार गरीबों को निशाना बना रहा है. उनका कहना है कि न तो रोजी-रोटी के साधन सुरक्षित हैं और न ही सिर पर छत. ऐसे हालात में गरीब और कमजोर तबके के लिए जीवन और भी मुश्किल होता जा रहा है.

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