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'बूढ़ी हड्डियों' का ऐलान -पेंशन की रकम ₹49  से दस हज़ार नहीं हुई तो कार्यालय के बाहर भूखे मरेंगे 

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 13, 2026, 12:00:59 PM

धनबाद(DHANBAD): झारखंड ,बंगाल की  'बूढ़ी हड्डियों' ने सोमवार को धनबाद कोल माइंस प्रोविडेंट फंड कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया और सरकार को घेरा.  उनका कहना था कि विश्व का कोई भी ऐसा देश नहीं है ,जो अपने सीनियर सिटीजन को आंदोलन के लिए मजबूर करे. लेकिन हमलोग मजबूरन आज सड़क पर उतरने को बाध्य हुए है. अगर हम लोगों की मांगें नहीं मानी जाएगी तो कोल माइन्स प्रोविडेंट फंड कार्यालय के सामने बैठकर  भूखे मर जाएंगे. उन लोगों का कहना है कि आज भी उन्हें सिर्फ ₹49 पेंशन मिलती है. 

1998 के बाद नहीं हुआ है कोई संशोधन 

1998 के बाद इसमें कोई परिवर्तन नहीं किया गया है. जो आंकड़ा बताया गया ,उसके अनुसार ₹49 से 1000 पेंशन पाने वालों की संख्या पूरे कोल इंडस्ट्री में 1,26,000 है ,जबकि 5000 से कम पेंशन पाने वालों की संख्या तीन लाख से अधिक है. ' बूढ़ी हड्डियों' ने कहा कि उनका प्रदर्शन देश की व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्न चिन्ह है.  जिन लोगों ने खून पसीना बहा कर कोयला उद्योग को खड़ा किया, आज वह आंदोलन के लिए मजबूर किए जा रहे है.  उनका यह भी कहना था कि प्रकृति खिलाफ  विषम परिस्थितियों में  कोयला खनन का काम किए हैं और राष्ट्र को समृद्ध बनाने में अपना योगदान दिए है.  बावजूद उनके साथ अन्याय हो रहा है और इस अन्याय को देखने -सुनने वाला कोई नहीं है.  

पूर्व विधायक भी पहुंचे समर्थन देने 

उनके आंदोलन को समर्थन देने पूर्व विधायक अरूप चटर्जी भी पहुंचे थे. उन्होंने कहा कि जेबीसीसीआई की बैठक में यह  मुद्दा उठाते रहे है  और आगे और भी जोर देकर मामला उठेगा. पूर्व विधायक की  मांग है कि पेंशन की राशि कम से कम ₹10000 निर्धारित की जाये. वही, पेंशनर एसोसिएशन के अध्यक्ष रामानुज प्रसाद ने कहा कि 1998 के बाद पेंशन में कोई संशोधन नहीं हुआ है. सीनियर सिटीजन को आंदोलन के लिए बाध्य किया जा रहा है.  उनकी यह भी मांग थी कि जिस तरह वेतन का निर्धारण जेबीसीसीआई से होता है ,उसी तरह से  पेंशन का भी निर्धारण जेबीसीसीआई से होना चाहिए. अगर नहीं हुआ तो वह लोग कार्यालय के सामने बैठकर भूखे मर जाइए. आंदोलन में काफी संख्या में कोल्  पेंशनर्स शामिल हुए, इसमें महिलाओं की संख्या भी कम नहीं थी. 'बूढ़ी हड्डियों' की आंखों में आक्रोश साफ झलक रहा था. 

Tags:News

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