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धनबाद की अनिता तिवारी: दुखों का पहाड़  भी नहीं डिगा पाया हौसले को, जानिए पूरा डिटेल्स 

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 17, 2026, 1:53:08 AM

धनबाद(DHANBAD): धनबाद की अनिता  तिवारी उन लोगों के लिए प्रेरणा हैं , जो थोड़ी बहुत परेशानियों में ही  हिम्मत हार जाते हैं और सब कुछ नियति पर छोड़ देते है. अनिता  तिवारी की कहानी प्रतिकूल परिस्थितियों में संघर्ष कर मुकाम हासिल करने के लिए ऐसे सभी लोगों को प्रेरणा देती रहेगी, जो कुछ करने की जज्बा रखते है. 37 साल के उम्र में पंचायत सचिव के पद पर चयनित हुई है. अनिता  तिवारी धनबाद के गांधीनगर की हल्दी पट्टी में  फिलहाल रहती है. अभी वह बैंक मोड में एक ज्वेलर्स सेंटर में काम करती है.  

पति की मौत के बाद भी हिम्मत नहीं हारी 

उनकी संघर्ष की कहानी तब शुरू होती है, जब कम उम्र में ही उनकी शादी हो जाती है. ससुराल का माहौल भी एकदम पढ़ाई को लेकर विपरीत था. पढ़ाई बंद हो गई, 2007 तक उन्हें दो बेटियां हुई. उसके बाद पढ़ाई शुरू करने को ठानी. 2008 में दसवीं बोर्ड की परीक्षा पास की. उसके बाद छोटी बेटी की तबीयत खराब हो गई, इस कारण काफी दिनों तक दिल्ली में रहना पड़ा. 2011 में इंटर की पढ़ाई पूरी की, बीबीएम डिग्री कॉलेज से वर्ष 2014 में राजनीति विज्ञान में स्नातक की  पढ़ाई पूरी की. पढ़ाई के लिए तो उन्हें ताने सुनने पड़ ही रहे थे कि उनके जीवन में दुखों का पहाड़ टूट गया. 2018 में हार्ट  अटैक से पति की मृत्यु हो गई. उसके बाद तो बिल्कुल टूट गई लेकिन जिम्मेदारियां उन्हें पीछे मुड़ कर नहीं देखने दी. पति की मौत के बाद दोनों बेटियों और  घर को संभालने के लिए काम शुरू की. 

डाटा एंट्री ऑपरेटर से लेकर कई काम किये

डाटा एंट्री ऑपरेटर से लेकर कई काम किये. बेटियों को देखकर उनका हौसला कभी कम नहीं हुआ. समय निकालकर तैयारी जारी रखी. पिछले दिनों पंचायत सचिव के पद पर चयनित हुई है. बड़ी  बेटी 18  साल की है,और छोटी की उम्र लगभग 16 साल है. मां की सफलता पर दोनों बेटियां खुश है. वह कहती हैं कि मैंने और मेरी दोनों बेटियों ने काफी कठिनाइयों का सामना किया. भगवान किसी को ऐसा दुःख नहीं दे , लेकिन भगवान पर आस्था रखते हुए कहती है कि रास्ता भी भगवान ने ही दिखाया.

रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो  

Tags:dhanbadanitatiwaryhausalapanchayat sachiwa

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