रांची(RANCHI): एक जरूरी सूचना जनहित में जारी है.राज्य की पूरी सरकार असम शिफ्ट हो गई. जिससे मंत्रालय में काम काज ठप सा पड़ गया.क्योंकि झारखंड के सभी मंत्री असम चुनाव में ताकत झोंक रहे है. खुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पिछले कई सप्ताह से असम में ही जमे हुए है. ऐसे में अब मंत्रालय में कई दिनों तक फाइल मंत्री और सीएम के इंतजार में पड़ी धूल फाँकते दिखेंगी. वैसे भी राज्य में फाइल एक टेबल से दूसरे टेबल पहुँचने में महीनों का समय लगता है. इस बार तो मंत्री और सीएम ही नहीं है कितने दिनों तक छुट्टी जैसा माहौल रहेगा. यह समय बताएगा.
सबसे पहले बात असम चुनाव की कर लेते है. यहां झामुमो और कांग्रेस दोनों दल अलग अलग चुनावी मैदान में है. झामुमो ने 20 सीट पर अपने उम्मीदवार उतारे है और सभी 20 सीट पर चुनाव प्रचार की कमान झारखंड मुक्ति मोर्चा ने अपने भरोसेमंद नेताओं को दी है. जिसमें सीएम हेमंत से लेकर उनके मंत्री चमरा लिंडा,सुदिव्य सोनू,हफ़िजूल हसन समेत अन्य मंत्री और विधायक शामिल है. सभी पार्टी का आदेश पालन करते हुए राज्य से बाहर चले गए और वह झामुमो उम्मीदवार को जिताने में खूब मेहनत कर रहे है. जिससे पार्टी की एक मजबूत उपस्थिति असम में दिखे.
वहीं कांग्रेस की बात करें तो कांग्रेस पार्टी के भी सभी मंत्री असम पहुंचे हुए है. मजे की बात है यहां झामुमो और भाजपा के खिलाफ प्रचार कर रहे है. यहां के चुनावी दंगल में मंत्री इरफान अंसारी,दीपिका पांडे सिंह,शिल्पी नेहा तिर्की उतर कर कांग्रेस पार्टी के लिए वोट मांग रही है.सभी अपने अपने दावे करने में लगे है. अगर इन तीन मंत्रियों के विभागों को देखे तो इसमें स्वास्थ्य एवं आपदा प्रबंधन मंत्री इरफान अंसारी जिनपर एक बड़ी जिम्मेवारी है. दीपिका पांडे सिंह ग्रामीण विकास विभाग यानि ग्रामीण क्षेत्रों का विकास का खाखा इनके टेबल से ही बनता है वहीं सबसे अहम कृषि मंत्री जिनपर किसानों की जिम्मेवारी है. लेकिन सभी चुनाव में शिद्दत के साथ लगे है.
अब लोगों में चर्चा शुरू है कि झारखंड के लोगों को कोई काम अपने मंत्री या सीएम से है तो उन्हे असम जाना पड़ेगा. वही पर किसी ना किसी विधानसभा में उनके मंत्री से मुलाकात होगी. नहीं तो फिर 9 अप्रैल तक इंतजार करना पड़ेगा.
क्योंकि 9 अप्रैल को मतदान है. ऐसे में मतदान से पहले सभी नेताओं को वापस लौटना पड़ेगा. तब वह वापस झारखंड आएंगे. और इसके बाद फिर चुनाव परिणाम तक झारखंड में भी नेताओं का मन शायद ही लगेगा. परिणाम के बाद फिर जीत या हार के जश्न और शोक में बीतेगा. यानि कुल मिला कर अप्रैल माह भी ऐसे ही निकलने वाला है. इसके बाद मई से काम काज थोड़ा शुरू हो पाएगा.