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झारखंड में राजनीतिक हलचल के बीच गिरिडीह के गांडेय से सरफराज अहमद का इस्तीफा कहीं गिव एंड टेक पॉलिसी के तहत तो नहीं?

झारखंड में राजनीतिक हलचल के बीच गिरिडीह के गांडेय से सरफराज अहमद का इस्तीफा कहीं गिव एंड टेक पॉलिसी के तहत तो नहीं?

धनबाद(DHANBAD): झारखंड की राजनीतिक तपिश ठंड को भी मात दे रही है. नए साल में झारखंड में राजनीतिक तपिश तूफान बन कर उभरा है. गिरिडीह के गांडेय विधानसभा से डॉक्टर सरफराज अहमद ने इस्तीफा दे दिया है. लेकिन वह झारखंड मुक्ति मोर्चा की सदस्यता में बने हुए हैं. मतलब कहीं यह गिव एंड टेक का खेल तो नहीं है.

सरफराज अहमद ने भी कहा है कि यह उनका व्यक्तिगत फैसला है. उन्होंने यह कदम पार्टी, सरकार व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के हाथों को मजबूत करने के लिए उठाया है. उन्होंने यह भी कहा है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा से मेरी कोई नाराजगी नहीं है. मैं पार्टी के साथ हूं और पार्टी के लिए काम करूंगा. झारखंड में यूपीए की सेकुलर सरकार रहे, मैं यही चाहता हूं. उसी के हित में यह फैसला लिया है. हम यही चाहते हैं कि आने वाले दिनों में पार्टी जो फैसला करेगी, मैं वही काम करूंगा.

यहीं से एक सवाल उठता है कि क्या सरफराज अहमद को झारखंड मुक्ति मोर्चा गिरिडीह से संसदीय चुनाव लड़वाने का भरोसा दिया है. इसके संकेत इसलिए भी है कि टाइगर जगरनाथ महतो के निधन के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा को भी गिरिडीह से चुनाव लड़वाने का एक चेहरा चाहिए . सोमवार को चर्चा उठी की झारखंड मुक्ति मोर्चा से डॉक्टर सरफराज अहमद नाराज हैं. इसलिए इस्तीफा दे दिया है.एक साथ उन्होंने विधायक पद और झारखंड मुक्ति मोर्चा की सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है. लेकिन अब स्थिति स्पष्ट हुई है कि उन्होंने सिर्फ विधायक पद से इस्तीफा दिया है और वह झारखंड सरकार के हित में इस्तीफा दिया है. हालांकि राजनीति में ऊंट कब किस करवट बैठेगा, यह कोई नहीं जानता. लेकिन चर्चा तो यही है कि अगर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर कोई संकट आया तो वह अपनी पत्नी को मुख्यमंत्री का पद सौंप सकते है. इसके लिए उन्होंने सहयोगी दलों को राजी भी कर लिया है. ऐसी स्थिति में गांडेय विधानसभा से पत्नी को चुनाव लड़ा कर विधायक बनवा सकते हैं.

गांडेय विधानसभा झारखंड मुक्ति मोर्चा के लिए सुरक्षित सीट 

तकनीकी बातों को ध्यान में रखते हुए ऐसे समय में डॉक्टर सरफराज अहमद का इस्तीफा हुआ है, जिससे कि फिर से चुनाव हो सके. गांडेय विधानसभा को झारखंड मुक्ति मोर्चा के लिए सुरक्षित सीट माना जाता है .झारखंड बनने के बाद 2005 में पहली बार विधानसभा के चुनाव हुए थे. साल 2000 में इस सीट पर कांग्रेस से सरफराज अहमद विजई रहे थे. 2005 के विधानसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा के साल खान सोरेन ने सरफराज अहमद को पराजित कर दिया था. साल 2014 के चुनाव में भाजपा के जयप्रकाश वर्मा ने कांग्रेस व झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रत्याशियों को पराजित करते हुए पहली बार जीत दर्ज कर की थी .2019 में झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस ने गठबंधन कर चुनाव लड़ा.यह सीट झारखंड मुक्ति मोर्चा के खाते में आई. तब कांग्रेस छोड़ सरफराज अहमद ने झामुमो के टिकट पर चुनाव लड़ा और विजई रहे. भाजपा प्रत्याशी जयप्रकाश वर्मा को उन्होंने 56000 से भी अधिक वोट से हरा दिया. राजनीति गणित चाहे जो भी बैठाई गई हो, लेकिन झारखंड फिर एक बार चर्चा में है.

राज्य और झारखंड मुक्ति मोर्चा के हित में इस्तीफा दिया: राजेश ठाकुर 

आज झारखंड के प्रभारी गुलाम मोहम्मद मीर दो दिवसीय दौरे पर झारखंड पहुंच रहे हैं. राजनीतिक तपिश के बीच झारखंड के नए कांग्रेस प्रभारी का आना भी कई संकेत दे रहे हैं. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कहा कि गांडेय विधायक सरफराज अहमद ने विधायक पद से इस्तीफा दिया है. उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा की सदस्यता नहीं छोड़ी है. कुछ ना कुछ ऐसी बातें हुई होगी, जिसे उन्होंने राज्य और झारखंड मुक्ति मोर्चा के हित में इस्तीफा दिया होगा.

सत्ता की कमान मुख्यमंत्री की पत्नी कल्पना सोरेन को सौंपी जा सकती है

इधर प्रवर्तन निदेशालय ने रांची जमीन घोटाले में हेमंत सोरेन को पहला समन 13 अगस्त 2023 को दिया था. लेकिन उसके बाद के 6 समन पर भी वह अनुपस्थित रहे. राज्यपाल ने 11 दिसंबर को मीडिया के सवाल पर कहा था कि खनन लीज मामले में मुख्यमंत्री की विधानसभा सदस्यता को लेकर भारत निर्वाचन आयोग से मिले मंतव्य का राज भवन अध्ययन कर रहा है. यह भी कहा था कि जिन लोगों ने गलत काम किया है और दोषी पाए गए हैं, उन्हें परिणाम भी भुगतना होगा. यह सब ऐसे संकेत है जो बता रहे हैं कि मुख्यमंत्री की कुर्सी खतरे में पड़ सकती है . ऐसे में विकल्प के तौर पर उन्होंने जो योजना बनाई होगी, उसमें सरफराज अहमद का इस्तीफा देना महत्वपूर्ण हो जाता है. सियासी हलकों में यह चर्चा तेज है कि अब सत्ता की कमान मुख्यमंत्री की पत्नी कल्पना सोरेन को सौंपी जा सकती है. भाजपा इस मामले को लेकर हमलावर हो गई है .

जानिए बाबूलाल ने क्या कहा 

पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि अब जो परिस्थितिया बनी है, वह मुख्यमंत्री ने खुद बनाई है. उससे स्पष्ट है कि उनकी गिरफ्तारी होगी. बाबूलाल मरांडी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने जिस तरह अवैध खनन से लेकर जमीन घोटाले अपने राज्य में कराए ,इसके बाद ईडी के समन पर भी उपस्थित नहीं होकर कानून का सम्मान नहीं किया है. उनके पास अब कहने को कुछ नहीं है, लेकिन सत्ता की चाबी परिवार के बाहर नहीं जाए, इसलिए वह पत्नी को ही सी एम बनाना चाहते हैं.वह नहीं चाहते कि परिवार के बाहर भ्रष्टाचार का राज खुले. नेता प्रतिपक्ष अमर कुमार बाउरी ने कहा है कि अगर मुख्यमंत्री द्वारा पत्नी की ताजपोशी सीएम के तौर पर होती है, तो यह परिवार के भीतर भी परिवार बाद वाली स्थिति है. सोरेन परिवार में पहले से मुख्यमंत्री के अलावे सीता सोरेन व बसंत सोरेन राजनीति में है. दोनों विधायक भी हैं. लेकिन परिवार के भीतर के ही इन सदस्यों को सी एम नहीं बना कर अपनी पत्नी को सी एम बनाना चाहते हैं, तो यह परिवार के भीतर भी परिवारवाद की स्थिति है .

निशिकांत का दावा, गांडेय विधानसभा चुनाव नहीं कराया जा सकता

इधर, गोड्डा के सांसद निशिकांत दुबे ने दावा किया है कि वर्तमान स्थिति में गांडेय विधानसभा चुनाव नहीं कराया जा सकता. उन्होंने मुंबई हाई कोर्ट के एक फैसले का भी जिक्र किया है. जो भी हो लेकिन बयान बाजी तेज हो गई है. हर दल नजर गड़ाए हुए हैं. चुनाव आयोग की तरफ से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की विधानसभा सदस्यता को लेकर दिए मंतव्य पर राजभवन भी कुछ निर्णय ले सकता है. दूसरी तरफ प्रवर्तन निदेशालय आगे क्या कदम उठाता है, यह भी झारखंड के चर्चा के केंद्र में है. वैसे पूरे मामले में मुख्यमंत्री भी कानूनी राय सलाह ले रहे हैं.

आज कांग्रेस के नए झारखंड प्रभारी के स्वागत की पूरी तैयारी

फिलहाल अगर झारखंड में राजनीतिक दलों की स्थिति को देखा जाए तो सरफराज अहमद के इस्तीफा के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा के पास 29 विधायक हैं. बाबूलाल मरांडी को शामिल करने के बाद भाजपा के पास 26 विधायक हैं .प्रदीप यादव को जोड़कर कांग्रेस के पास 17 विधायक हैं. आजसू पार्टी के पास तीन विधायक हैं. माले के पास एक विधायक हैं. रांकपा के पास एक विधायक हैं. राजद के पास एक विधायक हैं. अन्य दो हैं. रिक्त की संख्या एक है. अब देखना है कि झारखंड में नया साल का पहला सप्ताह कैसे गुजरता है. ऊंट किस करवट बैठता है. वैसे आज कांग्रेस के नए झारखंड प्रभारी के स्वागत की पूरी तैयारी है. यहां से भी कुछ नए संकेत निकल जाए तो कोई आश्चर्य नहीं.

रिपोर्ट: धनबाद ब्यूरो 

Published at:02 Jan 2024 09:56 AM (IST)
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