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उत्कृष्ट विद्यालय के चकाचौंध के बीच आम सरकारी स्कूलों का हाल बेहाल, देखिए बहरागोड़ा में कैसे कैदी बन बच्चे कर रहे पढ़ाई

BY -
Aditya Singh
Aditya Singh
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 14, 2026, 12:13:19 PM

रांची(RANCHI): एक तरफ सीएम हेमंत 80 उत्कृष्ट विद्यालयों के साथ राज्य की शैक्षणिक व्यवस्था में आमूल चूक बदलाव का सपना संजो रहे है. झारखंड की बदहाल शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित कर राज्य के नौनिहालों का किस्मत बदलने का दावा कर रहे है. लेकिन इस के साथ ही एक कड़वी सच्चाई यह भी है कि पूरे राज्य में सरकारी विद्यालयों का हाल बेहाल है. वहां बुनियादी संरचनाओं का घोर आभाव है. साथ ही योग्य शिक्षकों की भी घोर कमी है. यह किसी एक विद्यालय की कहानी नहीं है. करीब-करीब झारखंड के सारे विद्यालयों कि दशा लगभग ये ही है.

कुछ इसी तरह का हाल बहारागोड़ा विधानसभा क्षेत्र के डोमजुड़ी गांव में स्थित मध्य विद्यालय स्कूल का है. जहां स्थिती काफी दयनिय हो चुकी है. यहां निम्न सुविधाओं के साथ-साथ शैक्षणिक सुविधाओं की भी काफी दिक्कत है. बता दें कि इस विद्यालय में मात्र चार कमरे है. जहां बच्चों को भेड़-बकरियों की तरह बैठाकर पढ़ाया जाता है. इस विद्यालय कि खास बात तो यह है कि विद्य़ालय के प्रधानाध्यापक का कार्यालय भी किसी गोदाम से कम नहीं है. मिली जानकारी के अनुसार इस विद्यालय में कक्षा एक से आठ तक पढ़ाई जाती है. जिसमे कुल 222 विद्यार्थी पढ़ते है. जिनमें 102 बालिका छात्र और 120 बालक पढ़ते है. साथ ही स्कूल में केवल तीन शिक्षक पदस्थापित है. अगर बात करे छात्राओं के लिए शौचालय की तो यहां एक कक्षा के कोने में छात्रों के लिए शौचालय बनाया गया है. साथ ही जगह के अभाव में किचन शेड तक नहीं बना है. इसलिए बच्चों के लिए भोजन विद्यालय के पास स्थित एक ग्रामीण की खलिहान पर बनाया जाता है. लिहाजा इस बात से आप यह अंदाज लगा सकते है कि कैसे इस परिस्थितियों मे विद्यालय के शिक्षक बच्चों को पढ़ाते है.

जनप्रतिनिधियों और शिक्षा विभाग को दी गई है इस बात की जानकारी

विद्यालय के प्रधानाध्यापक बासक चंद्र नायक ने बताया कि विद्यालय को संचालित करने में बड़ी परेशानी हो रही है. उन्होंने बताया कि इस संबंध में वे शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों को कई बार सूचित किया जा चुका है. लेकिन तब भी इस विद्यालय का कोई सुधार नहीं हो सका है. उन्होंने इसकी शिकायत जनप्रतिनिधियों और शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों को भी दी है. लेकिन तब भी अभी तक किसी के द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया गया है. वहीं उन्होंने बताया कि विद्यालय की सोलर जलापूर्ति योजना भी काफी लंबे समय से खराब है. जिसके कारण विद्यालय के छात्र  चापानल से पानी पिने को मजबूर है.

अब यह सवाल उठता है कि जिस प्रकार राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन राज्य में 80 उत्कृष्ट विद्य़ालय को शूरू कर राज्य में चल रही शिक्षा व्यवस्था को बढ़ाना चाहते है. लेकिन क्या राज्य की शिक्षा व्यवस्था सिर्फ उत्कृष्ट विद्य़ालय से ही ठिक होगी. या फिर राज्य में जो विद्यालय पहले से उपलब्ध है उसे ठिक कर राज्य में हर वर्ग के बच्चों को एक अच्छी शिक्षा दी जाए.

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