रांची(RANCHI): झारखंड विधानसभा का शीतकालीन सत्र आ रहा है. 15 दिसंबर से इसकी शुरुआत होगी. 6 कार्य दिवसीय इस शीतकालीन सत्र में वर्तमान वित्तीय वर्ष का अनुपूरक बजट पेश किया जाएगा.इसके लिए सभी विभागों से मांग भेजने को कहा गया है. इसके बारे में विस्तार से जानिए.
जानिए अनुपूरक बजट की क्या जरूरत होती है
संवैधानिक प्रावधान है कि एक पैसा भी अगर खर्च होता है तो उसे विधानसभा से अनुमति लेकर ही खर्च किया जाता है.अनुमति पहले लिया जाए या फिर बाद में, यह कोई महत्वपूर्ण बात नहीं है.सदन की सहमति बजट पर होनी चाहिए.अब जानिए वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए वित्त विभाग ने सभी विभागों को अपने खर्चे के लिए मांग भेजने को कहा है.वित्त विभाग के संयुक्त सचिव चंद्र भूषण प्रसाद ने सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव,प्रधान सचिव सचिव और विभाग के अध्यक्षों को पत्र लिखकर जल्द से जल्द जरूरत के पैसे के एवज में मांग भेजने का निर्देश दिया है.
अनुपूरक बजट के संबंध में व्यवस्था को भी जानिए
एक होता है बजट. दूसरा होता है अनुपूरक बजट. एक बजट आम बजट कहलाता है जो साल में एक बार विधानसभा में पेश किया जाता है.वह वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए पिछले मार्च में पेश किया गया था जो अप्रैल 2023 से लागू है. अब यह सवाल आपके जेहन में उठ सकता है कि एक बजट पेश कर दिया गया तो फिर अनुपूरक बजट क्यों. दरअसल बजट एक अनुमान है.एक अनुमान के हिसाब से यह तय किया जाता है कि इस वित्तीय वर्ष में कितना खर्च होगा और कितनी आमदनी होगी. अनुमान कभी भी परफेक्ट हो जाए, ऐसा नहीं के बराबर होता है. खर्च घटता बढ़ता रहता है. इसलिए जब सरकार को कोई अतिरिक्त खर्च का वहन करना पड़ता है तो उसके लिए पैसे के इंतजाम किए जाते हैं.जैसा कि पहले बताया गया कि सदन की अनुमति के बगैर एक पैसा भी सरकार खर्च नहीं कर सकती है. इसलिए नए खर्च को पूरा करने के लिए अनुपूरक बजट लाया जाता है. यह भी होता है कि कुछ योजनाओं के लिए आवंटित सालाना बजट के पैसे अगर खर्च नहीं होते हैं तो उन्हें सरेंडर कर दिया जाता है और फिर उसका पैसा डायवर्ट कर दिया जाता है.ऐसा सामान्यतः वित्तीय वर्ष के अंत में ही होता है. ऐसा भी होता है कि सरकार कोई नई योजना शुरू करती है तो उसके लिए पूंजीगत व्यय श्रेणी में पैसे का प्रावधान करना पड़ता है तो अनुपूरक बजट के माध्यम से पैसे सरकार लेती है. यह भी होता है कि केंद्र सरकार किसी योजना के लिए अपना शेयर निर्गत करती है तो उस योजना के लिए राज्य सरकार को भी अपना अंशदान देना होता है. इसके लिए भी पैसे के इंतजाम अनुपूरक बजट से किए जाते हैं.
संवैधानिक प्रावधान के हिसाब से एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम तीन अनुपूरक बजट पेश किया जा सकते हैं. झारखंड विधानसभा के इस शीतकालीन सत्र में दूसरा अनुपूरक बजट पेश किया जाएगा यह लगभग 4000 करोड़ का हो सकता है सभी विभागों की ओर से अपनी जरूरत के हिसाब से मांग वित्त विभाग को भेजी जा रही है.सभी का संकलन करके फिर सत्र के दौरान अनुपूरक बजट को वित्त मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव पेश करेंगे. सदन से पारित होने के बाद यह बजट का पैसा सरकार के लिए उपलब्ध होगा. शीतकालीन सत्र 22 दिसंबर तक चलेगा.
