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एके राय की बनाई यूनियन की टूट को जोड़ने की कोशिश, जानिए पूरा मामला 

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 13, 2026, 7:52:14 AM

धनबाद (DHANBAD): पूर्व सांसद व चिंतक एके राय ने बहुत पहले बिहार कोलियरी  कामगार यूनियन (बीसीकेयू ) का गठन किया था. इसमें हुई टूट को फिर से जोड़ने के लिए सीटू के केंद्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व सांसद वासुदेव आचार्य आगे आए हैं.  मंगलवार को पहले उन्होंने मासस के नेताओं से निरसा में मुलाकात की.  उनका पक्ष जाना.  निरसा के पूर्व विधायक अरूप चटर्जी ने बुधवार को इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि पूर्व सांसद का  मानना है कि छोटे-छोटे कारणों से यूनियन नहीं बंटनी चाहिए. वासुदेव आचार्य ने कहा कि अभी देश स्तर पर वामपंथियों को एकजुट रहने  की जरूरत है. 

पूर्व विधायक अरूप चटर्जी ने की है पुष्टि 

अरूप चटर्जी ने इसकी भी पुष्टि की कि 6 सितंबर को मासस  की कार्यकारिणी की बैठक बुलाई गई है.  उस बैठक में मासस के पक्ष के बारे में निर्णय लिया जाएगा. पूर्व सांसद अरूप चटर्जी से मिलने के बाद सीटू के नेताओं से भी मिलेंगे और उनका भी पक्ष जानने की कोशिश करेंगे. बिहार कोलियरी  कामगार यूनियन पर कोयलांचल की नज़ारे टिकी हुई है. अभी यह यूनियन बीसीकेयू (सीपीएम) और बीसीकेयू (मासस) के नाम से जानी जा रही है. आपको बता दे कि  प्रख्यात चिंतक व राजनीतिक संत पूर्व सांसद  एके राय ने एफसीआई सिंदरी से नौकरी छोड़ कर मजदूरों को शोषण मुक्त कराने के लिए बिहार कोलियरी  कामगार यूनियन की स्थापना 70 के दशक में की थी.  बिहार कोलियरी  कामगार यूनियन के दसवें सम्मेलन में यह टूट हुई थी. यह सम्मेलन  रामगढ़ में संपन्न हुआ था. 

रामगढ के सम्मलेन में हुई थी टूट 
 
बीसीकेयू (मासस )ने मिथिलेश सिंह को अध्यक्ष तथा निरसा के पूर्व विधायक अरूप चटर्जी को महासचिव घोषित किया तो बीसीकेयू (सीपीएम) ने सुंदर लाल महतो को अध्यक्ष और मानस चटर्जी को महासचिव बनाया.  बुजुर्ग बताते हैं कि 70 के दशक में शिमलाबहाल कोलियरी में माफिया के द्वारा मजदूरों का शोषण देख एके राय विचलित हो गए.  एक दिन उन्होंने मीटिंग बुलाई.  इस मीटिंग में उस समय के दिग्गज बिनोद बिहारी महतो,  मुकुट धारी सिंह,एसके बक्शी , जमुना सहाय ,राजनंदन प्रसाद, रामदेव सिंह समेत कई मजदूर नेता शामिल हुए.  लोग बताते हैं कि जमुना सहाय ने मजदूर संगठन के गठन का विरोध किया, उनका कहना था कि पहले से ही जनवादी मजदूर संगठन चल रहा है तो दूसरे संगठन की कोई जरूरत नहीं है.

पहले झामुमो भी था इस यूनियन में शामिल 
  
बिनोद बिहारी महतो ने जमुना सहाय का विरोध किया और मजदूर संगठन के गठन का समर्थन किया.  कई घंटों तक चली बैठक के बाद बिहार कोलियरी कामगार यूनियन का गठन हुआ, हालांकि उस मीटिंग में कई तरह के विरोध भी हुए. इस संगठन में मासस, सीपीएम और झारखंड मुक्ति मोर्चा शामिल थे.  हालांकि बाद में झारखंड मुक्ति मोर्चा ने अपना एक अलग मजदूर संगठन बना लिया. पूर्व सांसद एके राय और एसके बख्शी जब तक जीवित रहे, अध्यक्ष -महासचिव का पद संभालते रहे.  दोनों अलग-अलग पार्टी में थे पर यूनियन में एक साथ होते थे. जुलाई 2019 में पूर्व सांसद एके राय का निधन हो गया. पिछले साल एसके बख्शी का भी निधन हो गया. उसके बाद से ही खटराग शुरू हो गया था. 

Tags:News

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