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1985 का समर्थन करने वाली AJSU, डुमरी उपचुनाव में 1932 के सहारे, यह कैसी राजनीति

BY -
Samir Hussain
Samir Hussain
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 15, 2026, 7:14:21 AM

रांची(RANCHI):  झारखंड में उपचुनाव का बिगुल बज चुका है. सभी दल अब कई मुद्दे को लेकर मैदान में उतर गए. मुद्दे कई है लेकिन 1932 का मुद्दा सभी दल जोर शोर से उछाल रहा है. INDIA गठबंधन एनडीए को 1932 विरोधी बता कर मतदाताओं को अपने ओर खिचने में लगी है तो दूसरी ओर एनडीए भी इसी मुद्दे से सरकार पर सवाल उठा रही है. लेकिन खास बात यह है कि जो आजसू कभी रघुवर सरकार में 1985 के समर्थन में मतदान किया उसे भी आज डुमरी उपचुनाव में 1932 की याद आगई.सवाल उठ रहे है आखिर यह कैसी राजनीति. कभी सदन में 1985 का समर्थन फिर अब चुनाव में 1932 के नाव पर क्यों सवार होना चाहते है.

1932 के सहारे नैया पार करणे में लगी आजसू

अगर बात आजसू की करें तो डुमरी उपचुनाव के मैदान में यशोदा देवी को प्रत्याशी बनाया है. एनडीए के सामने INDIA गठबंधन की ओर से संभावित चेहरा बेबी देवी हो सकती है.बेबी देवी दिवंगत शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो की पत्नी है.अगर बात दिवंगत जगरनाथ महतो की करें तो वह शुरू से 1932 के पक्षधर रहे.मंत्री रहते हुए कैबिनेट से 1932 के प्रस्ताव को पास करने के बाद फिर सदन के पटल पर रखा.इस चुनाव में भी बेबी देवी और INDIA 1932 पर जोर देने में जुटी है.लेकिन अब 1932 के नाव पर आजसू भी सवार हो गई है.       

जनता के सामने मुसीबत बन गया 1932         

बात आजसू की करें तो रघुवर सरकार में सदन में जब 1985 के स्थानीयता का प्रस्ताव लाया गया तो इसमें आजसू भी साथ थी. सदन से प्रस्ताव पास होने के बाद राज्य में जश्न मन रहा था.उस जश्न में आजसू भी आगे दिख रही थी. आजसू के कई कार्यकर्ता आतिशबाजी और मिठाई बाट रहे थे.लेकिन जैसे ही लगा की अब डगर मुश्किल है वह 1985 की बात ना कर 1932 के सहारे नैया पार लगाने की कोशिश में है.अब जनता के सामने एक बड़ी मुसीबत खड़ी है यह मुसीबत 1932 है ,लोग सोच रहे है कि कौन 1932 का असली समर्थक है कौन विरोधी.    

1932 के मुद्दे पर सूबे की बागडोर हेमंत को मिली          

1932 खातियान हर झरखंडी के सेंटीमेंट से जुड़ा हुआ मुद्दा है,वर्तमान सरकार भी सत्ता में इसी मुद्दे से आई है. सत्ता में आने के बाद 1932 के खतियान के प्रस्ताव को हेमंत सोरेन सरकार ने पिछले वर्ष पास किया. जैसे ही 1932 का प्रस्ताव कैबिनेट और सदन से पास हुआ पूरे झारखंड में जश्न मनने लगा. ऐसा लग रहा था की होली और दीपावली लोग एक साथ मना रहे है.इस जश्न में सूबे के मुखिया हेमंत सोरेन से लेकर एक आम झरखड़ी भी शरीक दिखा था. लेकिन कुछ दिनों के बाद इस प्रस्ताव को राजभवन ने लौटा दिया. अब सरकार इसे दोबारा से राजभवन भेजने की तैयारी में है. 

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