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चीन के बाद विश्‍व की दूसरी सबसे बड़ी दीवार कुंभलगढ़ किले का करना चाहते हैं दीदार तो आइए देवघर, दिखेगी राजस्थानी संस्कृति

चीन के बाद विश्‍व की दूसरी सबसे बड़ी दीवार कुंभलगढ़ किले का करना चाहते हैं दीदार तो आइए देवघर, दिखेगी राजस्थानी संस्कृति

देवघर(DEOGARH): शारदीय नवरात्र अब अपने अंतिम चरण में है. तमाम पूजा पंडाल, मंदिर या घरों में नवरात्र का पर्व भक्तिभाव से मनाया जाता है. पूरे नौ दिन तक का वातावरण पूरी तरह मां दुर्गा के मंत्रोच्चारण से गूंज उठता है. बात अगर पूजा पंडाल की करें तो सभी पूजा समिति अपने-अपने जेब अनुसार बेहतर रूप रंग और साज-सज्जा देने में कोई कोर कसर नही छोड़ते. वर्तमान परिदृश्य हो या किताबों के पन्ने में दिखने वाले इतिहास पूजा समिति द्वारा इसी थीम पर आकषर्क पूजा पंडाल का निर्माण कराया जाता है. इसी क्रम में बाबा नगरी देवघर में राजस्थानी परंपरा और इतिहास को पूजा पंडाल का रूप देकर लोगों को कई तरह से ऐतिहासिक जानकारी और महत्व को बतलाया जा रहा है.

पूजा पंडाल को कुंभलगढ़ किले का दिया गया है हूबहू रूप

बाबानगरी देवघर में तमाम पूजा समिति द्वारा एक से बढ़कर एक पंडाल का निर्माण कराया गया है. कृष्णापुरी पूजा समिति द्वारा इस बार कुम्भलगढ़ किले का स्वरूप वाला पंडाल का निर्माण कराया गया है. कुंभलगढ़ महाराणा प्रताप का जन्मस्थान है. राजस्थान में स्थित कुम्भलगढ़ किला अपने आप मे कई इतिहास समेटे हुए हैं. किले की दीवार विश्व के सात अजूबे या धरोहर में शामिल है. चीन की दीवार के बाद इस किले की दीवार की चर्चा होती है.

पूजा समिति द्वारा कुंभलगढ़ किले की रूप वाले पंडाल को पूरी तरह इको फ्रेंडली बनाया गया है और इसके निर्माण में 3 माह से अधिक का समय लगा है. इस पूजा पंडाल में मां की प्रतिमा का उदघाटन होने के बाद यहां लोगो का हुजूम उमड़ पड़ा है. जो भी लोग यहां आ रहे है सभी पूजा पंडाल और मां की प्रतिमा की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं. वहीं, भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पूजा समिति के सदस्यों के अलावा पर्याप्त संख्या में पुलिस बल की भी तैनाती की गई है. पूरे मेला परिसर की सीसीटीवी के जरिये मॉनिटरिंग की जा रही है.

राजस्थान की संस्कृति और कला की भी प्रदर्शन

राजस्थान की संस्कृति और कला के दीवानें सभी लोग हैं. राजस्थानी नृत्य तो सभी को पसंद है. कृष्णापुरी पूजा समिति द्वारा राजस्थान के इतिहास की जानकारी देने के लिए राजस्थान के कलाकारों को बुलाया है. जिनके द्वारा राजस्थानी नृत्य और वहां से जुड़ी सभ्यता संस्कृति की प्रस्तुति दी जा रही है. यहां आने वाले लोग मां की प्रतिमा की पूजा अर्चना के बाद राजस्थानी सभ्यता और संस्कृति का आनंद उठाने के साथ साथ वहां के इतिहास की जानकारी भी ले रहे हैं.

रिपोर्ट: ऋतुराज सिंहा/देवघर 

Published at:10 Oct 2024 10:27 AM (IST)
Tags:चीन की दीवारप्रसिद्ध कुंभलगढ़ किलादेवघरराजस्थानी संस्कृतिबाबा नगरी देवघरराजस्थानी सभ्यतादुर्गा पूजा पंडालशारदीय नवरात्रकुम्भलगढ़ किलानवरात्रिदुर्गोत्सवझारखंडझारखंड न्यूजGreat Wall of ChinaFamous Kumbhalgarh FortDeogharRajasthani CultureBaba Nagari DeogharRajasthani CivilizationDurga Puja PandalShardiya NavratriKumbhalgarh FortNavratriDurgotsavJharkhandJharkhand News
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