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विदेश यात्रा के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आज सेरेंगसिया घाटी में शहीदों को देंगे श्रद्धांजलि

विदेश यात्रा के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आज सेरेंगसिया घाटी में शहीदों को देंगे श्रद्धांजलि


चाईबासा (कोल्हान): झारखंड के कोल्हान क्षेत्र की पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच स्थित ऐतिहासिक सेरेंगसिया घाटी आज एक बार फिर आदिवासी स्वाभिमान, संघर्ष और बलिदान की गूंज से जीवंत होगी. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन विदेश यात्रा से लौटने के बाद आज पहली बार सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होंगे और शहीद दिवस के अवसर पर सेरेंगसिया घाटी पहुंचकर अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे.
मुख्यमंत्री सेरेंगसिया घाटी में करीब डेढ़ घंटे का समय बिताएंगे. इस दौरान वे श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करेंगे, विकास योजनाओं का शिलान्यास करेंगे और लाभुकों के बीच परिसंपत्तियों का वितरण भी करेंगे. मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर पूरे कोल्हान क्षेत्र में खास उत्साह देखा जा रहा है और प्रशासनिक स्तर पर व्यापक तैयारियां की गई हैं.
सेरेंगसिया घाटी 1837 के कोल विद्रोह की साक्षी रही है, जो ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ आदिवासी प्रतिरोध का एक महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है. इतिहासकारों के अनुसार पोटो हो के नेतृत्व में आदिवासी योद्धाओं ने इसी घाटी में अंग्रेजी सेना पर हमला किया था. तीर-धनुष से लैस आदिवासियों ने जंगल और पहाड़ी भूगोल का लाभ उठाते हुए अंग्रेजों को भारी नुकसान पहुंचाया. इस संघर्ष में कई वीर आदिवासी शहीद हुए, जिनकी स्मृति आज भी यहां स्थापित स्मारकों के जरिए जीवित है.
सेरेंगसिया घाटी में शहीद दिवस मनाने की परंपरा पिछले करीब 43 वर्षों से चली आ रही है. इसकी शुरुआत वर्ष 1982 में सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. देवेंद्रनाथ सिंकू के प्रयासों से हुई थी. आज यह आयोजन केवल स्मृति दिवस नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता, एकता और संघर्ष का प्रतीक बन चुका है. हर साल झारखंड और पड़ोसी राज्य ओडिशा से हजारों लोग यहां पहुंचकर शहीदों को नमन करते हैं और उनके बलिदान से प्रेरणा लेते हैं.

Published at:02 Feb 2026 04:11 AM (IST)
Tags:Hemant Soren newsChaibasa NewsSerengsia ValleyAdivasi Shaheed 1837 Kol revoltAdivasi ShaheedJharkhand NewsCM visit to Chaibasa
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