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अवैध खनन मामला: राज्य में अवैध खनन की जांच में राज्य सरकार को मिला केंद्र का साथ, राज्य में हो रहे अवैध खनन का सर्वे कराएगा केंद्र

BY -
Prakash Tiwary
Prakash Tiwary
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 14, 2026, 10:06:12 PM

टीएनपी डेस्क(TNP DESK): झारखंड में अवैध खनन धड़ल्ले से जारी है. लगातार इसे लेकर केन्द्रीय जांच एजेंसी ईडी द्वारा कार्रवाई की जा रही है. राज्य सरकार ने भी अवैध खनन में शामिल अधिकारियों के खिलाफ जांच के लिए एक उच्च स्तरीय टीम बनाने का निर्णय लिया है. इसी बीच अब केंद्र सरकार ने भी एक बड़ा निर्णय लिया है. झारखंड में चल रहे अवैध खनन को लेकर केंद्र सरकार ने सर्वेक्षण कराने का फैसला किया है. बता दें कि ईडी ने केंद्र सरकार को झारखंड में हो रहे अवैध खनन के बारे में बताया था. ईडी ने केंद्र सरकार को बताया कि अवैध खनन पर्यावरण के लिए खतरनाक है. ईडी की इस सूचना के बाद एक हाई लेवल मीटिंग की गई, जिसके बाद केंद्र सरकार ने ये फैसला किया. जल्द ही राज्य में सर्वेक्षण का काम शुरू किया जाएगा.

राज्य में बड़े पैमाने पर अवैध खनन हो रहा है. इसका खुलासा ईडी ने अपनी जांच में किया है. इसके साथ ही लगातार अवैध खनन में लगे लोग पुलिस की गिरफ्त में आते रहते हैं. धनबाद में अवैध कोयले के कारोबार का लगातार खुलासा होता रहता है. हाल ही में गिरिडीह में कई अवैध क्रशर को पुलिस ने बंद किया था. इसके साथ ही साहेबगंज में अवैध पत्थर के खनन का मामले से तो सभी परिचित हैं ही.

ईडी ने पर्यावरण विभाग की सचिव लीना नंदन को लिखा पत्र

ईडी ने साहेबगंज में 1000 करोड़ के अवैध खनन का खुलासा किया है. इसमें ईडी ने पाया है कि अवैध खनन के कारण कई पहाड़ गायब हो गए. इसी संबंध में ईडी ने केंद्रीय वन एवं पर्यावरण विभाग की सचिव लीना नंदन को एक पत्र लिखा था. इसी पत्र के आधार पर ये सर्वेक्षण कराने का फैसला लिया गया है. इस पत्र में ईडी ने लिखा था कि साहेबगंज में अवैध खनन की जांच में पता चला कि राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में अवैध खनन किया जा रहा है. ये खनन सामान्य क्षेत्रों में तो हो ही रहे हैं. इसके साथ ही वन क्षेत्र और जंगल-झाड़ों में भी अवैध खनन हो रहा है. जंगल में भी अवैध खनन किया जा रहा है. ईडी ने ये भी बताया कि जिन्हें खनन के लिए लीज नहीं मिला है, वे भी खनन किये जा रहे हैं. इसके साथ ही जिन्हें लीज मिला है, वे भी अवैध खनन कर रहे हैं. इनके द्वारा लीज वाली जगह से अलग अन्य जगहों पर अवैध खनन किया जा रहा है.

ईडी ने बताया कि अवैध खनन से एक तो राजस्व को नुकसान हो ही रहा है, इसके साथ ही पर्यावरण को भी भारी नुकसान हो रहा है. पहाड़ गायब हो रहे हैं, पहाड़ी क्षेत्र समतल होते जा रहे हैं. जमीन की उर्वरता कम हो रही है. ये स्थिति बेहद ही गंभीर है. इन्हीं सब बातों पर गहन विचार-विमर्श के बाद अब सर्वेक्षण कराया जाएगा.  

अवैध खनन को लेकर सीएम ने बनाई हाई लेवल जांच टीम

बता दें कि केंद्र के इस फैसले से राज्य सरकार को भी अवैध खनन रोकने में मदद मिलेगी. क्योंकि अवैध खनन से केंद्र और राज्य दोनों के राजस्व का नुकसान होता है. साथ ही पर्यावरण की दृष्टि से भी इसे रोकना आवश्यक है. अवैध खनन को रोकने के लिए राज्य सरकार भी अब गंभीर है. हाल ही में झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने एक हाई लेवल टीम बनाने का निर्णय लिया है, जो अवैध खनन में शामिल अधिकारियों के खिलाफ जांच करेगी. इस बारे में सीएम हेमंत सोरेन ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को एक पत्र लिखा है. इस पत्र के जरिए सीएम ने अवैध खनन और इसके परिवहन में रेलवे पदाधिकारियों की संलिप्तता और अन्य सभी संबंधित बिन्दुओं की जांच के लिए बनाई गई टीम को सहयोग करने के लिए रेलवे अधिकारियों को निर्देश देने का आग्रह किया है.

अवैध खनन में रेलवे अधिकारी भी शामिल

सीएम हेमंत ने लिखा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के द्वारा साहेबगंज में अवैध पत्थर खनन की जांच के दौरान विगत दो वर्षों में साहेबगंज जिले से विभिन्न (9) Loading Points से तीन हजार पांच सौ एकतीस (3531) से भी अधिक रेलवे रेक (Railway Rake) से बगैर चालान के पत्थर के परिवहन का आरोप लगाया है. अवैध परिवहन के रोकथाम से संबंधित The Jharkhand Minerals (Prevention of illegal Mining, Transportation and Storage) Rules, 2017 के अधिसूचित होने के उपरान्त इसका अनुपालन रेलमार्ग से हो रहे खनिज परिवहन के लिए भी किया जाना है. इस संदर्भ में सचिव, खान और भूतत्व विभाग द्वारा कई पत्राचार किये गये हैं और विभिन्न जिलास्तरीय पत्रों के माध्यम से वैध ई-चालान के साथ खनिजों के परिवहन के लिए निर्देश निर्गत किये गये हैं. इन सभी प्रयासों के बावजूद भी इस प्रकार की सूचनाएं प्राप्त हो रही हैं कि रेलवे के माध्यम से बिना वैध चालान के खनिज का परिवहन / प्रेषण किया गया है.

मुख्यमंत्री ने लिखा कि झारखण्ड में अवैध खनन को बढ़ावा देने में रेलवे और इनके पदाधिकरियों की संलिप्तता प्रतीत होती है और एक साजिश के तहत रेलवे के द्वारा झारखण्ड राज्य के JIMMS पोर्टल से अपने FIOS को integrate नहीं किया जा रहा है और बगैर चालान अथवा फर्जी चालान के आधार पर अवैध रूप से खनिज संपदा का रेल मार्ग से परिवहन किया जा रहा है. ऐसी परिस्थिति में राज्य सरकार के द्वारा अवैध खनन और इसके परिवहन में रेलवे पदाधिकारियों की संलिप्तता और अन्य सभी संबंधित बिन्दुओं की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय जांच समिति के गठन का निर्णय लिया गया है. सीएम ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि मुझे आशा ही नहीं बल्कि पूर्ण विश्वास है कि आपके द्वारा रेलवे के पदाधिकारियों को इस उच्च स्तरीय जांच समिति को पूरा सहयोग करने के लिए निर्देशित किया जायेगा.

100 करोड़ के अवैध खनन मामले का जांच कर रही है ईडी

बता दें कि राज्य में लगातार अवैध खनन के मामले सामने आ रहे हैं. ईडी ने भी अपनी जांच में 1000 करोड़ के अवैध खनन मामले का खुलासा किया है. ईडी की इस जांच में सीएम हेमंत के विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा सहित कई लोगों के नाम सामने आए हैं. ईडी ने अपनी जांच में रेलवे के द्वारा अवैध खनन की भी बात कही थी. जिसके बाद सीएम हेमंत ने जांच टीम बनाने का निर्णय लिया. अब राज्य भर में अवैध खनन को लेकर केंद्र ने भी सर्वेक्षण कराने का बड़ा फैसला लिया है. जिससे राज्य सरकार को भी काफी मदद मिलने की संभावना है.  

 

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