धनबाद(DHANBAD): धनबाद भाजपा की महानगर और ग्रामीण जिला कमेटी के गठन को लेकर एक बार फिर रूठने - मनाने का खेल शुरू हो गया है. धनबाद नगर निगम चुनाव में जो कुछ भी हुआ, वह सब के सामने है. प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय नेताओं के हस्तक्षेप के बाद भी बागी मैदान में डटे रहे. सिर्फ डटे ही नहीं रहे, बागी मेयर का चुनाव भी जीत गए. भाजपा समर्थित उम्मीदवार चार नंबर पर धकेल दिए गए. इतना तो तय है कि निगम चुनाव के बाद भाजपा जिला कमेटी बनाने का प्रयास रोचक हो सकता है. पार्टी के अंदर निगम चुनाव में गतिरोध सबने देखा और महसूस किया। इस बार जैसा कि सूत्र बता रहे हैं, महानगर और ग्रामीण जिला अध्यक्षों को स्पेशल निर्देश है कि वह जिला कमेटी के गठन के पहले सांसद और विधायकों की राय जरूर लें. बैठक का सिलसिला भी शुरू हो गया है, लेकिन इतनी जल्दी राय बन जाएगी, इसमें संशय है.
पहले वाली समिति में असन्तुष्टो को नहीं मिली थी जगह ---
इसके पहले जो जिला कमेटी बनी थी, उसमें असंतुष्टों को जगह नहीं मिली थी. इस वजह से हंगामा भी हुआ था. नाराजगी भी व्यक्त की गई थी. इस बार जिला समिति के गठन में क्या असंतुष्टों का ख्याल रखा जाएगा या फिर पुराने ढर्रे पर काम होगा, यह देखने वाली बात होगी। दरअसल, धनबाद महानगर जिला अध्यक्ष के चयन को लेकर पहले भी काफी खींचतान चली थी. कहा जाता है कि सांसद समर्थकों की सक्रिय सदस्यता को होल्ड पर डालकर उन्हें महानगर अध्यक्ष पद के चुनाव से दूर रखा गया और श्रवण राय फिर से महानगर अध्यक्ष बना दिए गए. आरोप था की सक्रिय सदस्यता होल्ड पर करने में सिर्फ सांसद ही नहीं, बल्कि झरिया और बाघमारा विधायक के समर्थकों के साथ भी उचित व्यवहार नहीं किया गया. श्रवण राय धनबाद विधायक के समर्थक माने और बताए जाते हैं.
महानगर की जिला समिति में क्या असन्तुष्टो को मिलेगी जगह ?
महानगर की जिला समिति में क्या इस बार सांसद ढुल्लू महतो , विधायक रागिनी सिंह, विधायक शत्रुघ्न महतो के समर्थकों को जगह मिलेगी अथवा इस बार फिर "पावर" का खेल चलेगा, यह देखने वाली बात होगी। प्रदेश समिति ने एक सप्ताह के भीतर जिला कमेटी का खाका प्रदेश को भेजने को कहा है. इसमें महिलाओं के आरक्षण का भी ख्याल रखने को कहा गया है. इस बीच निगम चुनाव में संजीव सिंह की जीत के बाद इतना तो तय है कि सिंह मेंशन भाजपा का एक मजबूत केंद्र बन गया है. यह भी बात अब लगभग साफ है कि निगम चुनाव में जो उम्मीदवार बागी बनकर खड़े थे, अब उनके खिलाफ भाजपा कोई कार्रवाई नहीं करेगी, बल्कि गले लगाने की कोशिश करेगी। चिरकुंडा नगर परिषद अध्यक्ष के मामले में ऐसा ही देखा गया. भाजपा की बागी उम्मीदवार जब चुनाव जीत गई तो उन्हें भाजपा का बताने की होड़ मच गई थी.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
