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आदिवासियों ने किया पारसनाथ रेलवे स्टेशन में रेल चक्का जाम करने का प्रयास, प्रशासन की तत्परता से नहीं हो पाई यातायात बाधित

आदिवासियों ने किया पारसनाथ रेलवे स्टेशन में रेल चक्का जाम करने का प्रयास, प्रशासन की तत्परता से नहीं हो पाई यातायात बाधित

गिरिडीह(GIRIDIH): विभिन्न मांगों को लेकर आदिवासी से मेल अभियान के बैनर तले स्थानीय आदिवासी समाज के लोगों ने पारसनाथ रेलवे स्टेशन पहुंचकर रेल यातायात को बाधित करने के उद्देश्य से रेलवे ट्रैक में बैठ गए. हालांकि रेलवे प्रशासन गिरिडीह जिला पुलिस बल और अनुमंडल प्रशासन की तत्परता से रेलवे यातायात बाधित करने आए आदिवासी सेंगल अभियान के बैनर तले आये आदिवासी समाज के लोगों को समझाते बुझाते किसी तरह रेलवे ट्रैक से बाहर किया तथा आश्वासन दिया कि आपकी आवाज को राज्य और केंद्र सरकार तक हम लोगों द्वारा पहुंचा दिया जाएगा. इस आश्वासन के बाद आदिवासी समाज के लोग रेलवे ट्रेक से बाहर हुए.

इस संबंध में यातायात आदिवासी नेता आनंद टूडू ने बताया कि आज पूरे भारत के 5 प्रदेशों में आदिवासी अपने विभिन्न मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन रोड जाम और रेल यातायात बाधित कर अपनी मांगों को सरकार के समक्ष रख रहें हैं. उसी के तहत आज पारसनाथ रेलवे स्टेशन में भी रेल रोको अभियान चलाया गया है.

2023 में हर हाल में सरना धर्म कोड लेना है

उन्होंने बताया कि आदिवासी सिंगल अभियान झारखंड, बिहार, बंगाल, उड़ीसा, असम के अलावे नेपाल-भूटान बांग्लादेश में भी आदिवासी सशक्तिकरण के लिए कार्यरत है तथा बताया कि भारत के आदिवासी प्राकृतिक पूजक हैं जिसे 2023 में हर हाल में सरना धर्म कोड लेना है. बताया कि अधिकांश आदिवासी ना ही हिंदू है ना ही मुसलमान और ना ही ईसाई हैं. आदिवासी का धर्म सरना है और हमें हमारा धर्म का कोड चाहिए, परंतु सरकार आदिवासियों के प्रति हमेशा उदासीनता अपनाते आयी है, परंतु अब कुछ भी हो 2023 में हमलोग अपना धर्म कोड ले कर रहेंगे.  

बताया कि झारखंड के पारसनाथ पहाड़ में अवस्थित आदिवासियों के ईश्वर मरांग बुरु को अविलंब जैनियों के कब्जे से मुक्त किया जाए और आदिवासियों को सुपुर्द किया जाए. बताया कि भारत देश में सभी पहाड़ों पर्वतों को आदिवासियों को सौंपा जाए, क्योंकि पहाड़ों में आदिवासियों की देवी-देवता रहते हैं और पहाड़ों की सुरक्षा तथा प्राकृतिक पर्यावरण और क्लाइमेट चेंज की रक्षा आदिवासी समाज कर सकता है.

आसाम अंडमान के झारखंडी आदिवासियों को अविलंब एसटी का दर्जा देने की मांग

उन्होंने बताया कि झारखंड प्रदेश अबुआ दिसुम अबुआ राज है आदिवासियों का गढ़ है, यहां संविधान कानून मानव अधिकारों को लागू कर ऐसे शहीदों के सपनों को सच बनाना है, जो आज लूट-झूठ भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है. वहीं उन्होंने मांग किया कि आसाम अंडमान के झारखंडी आदिवासियों को अविलंब एसटी का दर्जा दिया जाए तथा आदिवासी स्वशासन व्यवस्था या ट्राइबल सेल्फ रूल सिस्टम में जनतंत्र और सविधान को समाहित करते हुए इसमें सुधार लाकर इसे अविलंब समृद्ध किया जाए.

मरांग बुरु पारसनाथ पहाड़ को जैनियों के कब्जे से मुक्त कराने की मांग

उन्होंने आगे बताया कि 30 जनवरी 2023 तक संबंधित सरकारों द्वारा आदिवासियों के ईश्वर मरांग बुरु पारसनाथ पहाड़ को जैनियों के कब्जे से मुक्त कराने की मांग किया गया था किंतु इस मामले में अब तक कोई पहल नहीं किया गया है और ना ही सरना धर्म कोड पर कोई विचार किया गया है. इसे लेकर आज आदिवासी समाज एक होकर 11 फरवरी अर्थात आज के दिन शहीद तिलका मुर्मू के जन्म दिवस के अवसर पर राष्ट्रव्यापी अनिश्चितकालीन रोड, रेल रोड चक्का जाम का कार्यक्रम किया है.

रिपोर्ट: दिनेश कुमार 

 

 

Published at:11 Feb 2023 02:09 PM (IST)
Tags:Adivasi Sengal Abhiyantribals tried to jam the railtribals tried to jam the rail wheel at Parasnath railway stationParasnath railway station
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