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लोहरदगा में बॉक्साइट-लिग्नाइट का प्रचुर भंडार, फिर भी पिछड़े इलाके में होती है पहचान, क्या समीर उरांव दिला पाएंगे बीजेपी को जीत, या ढहेगा किला

BY -
Sanjeev Thakur CW
Sanjeev Thakur CW
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 16, 2026, 2:51:15 PM

रांची (TNP Desk) : लोहरदगा सीट इस बार लोकसभा चुनाव में काफी हॉट रहेगी. बीजेपी ने इस बार तीन के बार सांसद सुदर्शन भगत को हटाकर समीर उरांव को उम्मीदवार बनाया है. देखना होगा कि विपक्ष की ओर से इस सीट पर किसे उम्मीदवार बनयेगी. विपक्ष से जो भी प्रत्याशी होगा इसबार बीजेपी को हराने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगा. लोहरदगा क्षेत्र की बात करें तो यहां कई समस्याएं है. जिसके वजह से यहां की जनता को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. भारत 4जी से 5जी की दुनिया में आ गया है. लेकिन झारखंड राज्य का लोहरदगा जिला अब भी काफी पिछड़ा हुआ है. इस क्षेत्र को प्रकृति ने बहुत कुछ दिया है, उसके बावजूद यहां की तस्वीर और तकदीर नहीं बदली है. यहां की मुख्य समस्या बेरोजगारी, पानी, बिजली, उद्योग, सिंचाई, सड़क आदि है. जिसके कारण विकास की गति यहां की थम सी गई है.

अनुसूचित जनजाति बहुल इलाका में बॉक्साइट- लिग्नाइट का भंडार 

लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र का पूरा इलाका वन, पहाड़ और पठार से भरा हुआ है. क्षेत्र में बॉक्साइट और लिग्नाइट प्रचूर मात्रा में पाये जाते हैं. फिर भी इस इलाके की पहचान आर्थिक रूप से पिछड़े इलाके में होती है. यह क्षेत्र अनुसूचित जनजाति बहुल इलाका है और यह सीट एसटी के लिए आरक्षित है. लोहरदगा सीट रांची, गुमला और लोहरदगा जिले में फैला हुआ है. लोहरदगा, रांची का मांडर और गुमला जिले का गुमला, विशुनपुर और सिसई मिलकर लोहरदगा संसदीय क्षेत्र बना है. लोहरदगा लोकसभा सीट में पड़ने वाले सभी विधानसभा क्षेत्र भी अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं. यहां हमेशा कांग्रेस  और बीजेपी के बीच टक्कर होती रही है. पिछले तीन चुनावों में सुदर्शन भगत ने बीजेपी को जीत दर्ज कराई है. सुदर्शन भगत मोदी सरकार में मंत्री भी रहे हैं. लेकिन इस बार सुदर्शन की जगह समीर उरांव को बीजेपी ने टिकट दिया है.

64 फीसदी वोटर एसटी हैं

बॉक्साइट- लिग्नाइट के अलावा कार्तिक उरांव और गुमला के परमवीर अल्बर्ट एक्का के कारण लोहदरगा लोकसभा क्षेत्र को पहचान मिली है. कार्तिक उरांव ने लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र और आदिवासियों के उत्थान के लिए काफी काम किया. आज भी कांग्रेस यहां कार्तिक उरांव के सपनों को पूरा करने के नाम पर वोट मांगती है. लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र में करीब 64 फीसदी एसटी मतदाता हैं. 

जंगल की लकड़ी बेचकर बड़ी आबादी का चलता है अपना घर 

एक आंकड़े के मुताबिक लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र की 96 फीसदी आबादी गांवों में रहती है, जो खेती और जंगल में लकड़ी काटकर अपना गुजर-बसर करती है. क्षेत्र में रोजगार के साधन नहीं हैं, जिसका असर यहां के लोगों के जन- जीवन पर दिखता है. जंगल की लकड़ी बेचकर बड़ी आबादी का घर चलता है.

मानव तस्करी बड़ी समस्या 

गुमला और लोहरदगा में मानव तस्करी एक बड़ी समस्या है. गरीबी की जकड़ में भोले-भाले आदिवासियों को मानव तस्कर भी शॉफ्ट टार्गेट करते हैं. लोगों को रोजगार का झांसा देकर तस्कर दूसरे राज्यों में बेच देते हैं यहां कहीं बंधक बन जाते हैं. हालांकि हाल के दिनों में मानव तस्करी की घटनाएं कम हुईं हैं. लेकिन पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है. लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र में लड़कियों को हायर एजुकेशन के लिए बाहर जाना पड़ता है. 

उद्योग धंधों का घोर अभाव

वहीं लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र में उद्योग धंधों का घोर अभाव है. बॉक्साइट का खनन तो यहां होता है, लेकिन इस पर आधारित उद्योग नहीं हैं. इसके कारण बेरोजगारी और पलायन भी यहां की बड़ी समस्याएं हैं. लोहरदगा के लोगों का कहना है कि पिछले 15 सालों में सांसद सुदर्शन भगत ने नये उद्योग लगाने की कोई पहल नहीं की. इस वजह से भी लोग बीजेपी से नाराज हैं. लोहरदगा शहर के लोग सालों से जाम की समस्या से जूझ रहे हैं. यहां खिलाड़ियों को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलती. लोकसभा क्षेत्र का पूरा इलाका रेड कॉरिडोर का हिस्सा है. हालांकि हाल के दिनों में नक्सलियों पर लगाम कसा गया है. लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र में समाज के हर तबके के लोगों की अपनी-अपनी समस्याएं हैं.

लोगों का क्या है कहना ?

वहीं मुख्य विरोधी दल कांग्रेस के नेता सांसद सुदर्शन भगत के कार्यकाल को पूरी तरह से फ्लॉप बता रहे हैं. लोहरदगा में सांसद और विरोधियों के अपने-अपने दावे हैं. लेकिन अब गेंद पूरी तरह से जनता के हाथों में है. लोगों का कहना है कि यहां बहुत समस्याएं है जिसका निराकरण पिछले 15 सालों में बीजेपी सांसद सुदर्शन भगत नहीं कर पाए हैं. पार्टी ने जो वादा किया उसपर खड़ी नहीं उतरी. लोगों की नाराजगी बीजेपी और सुदर्शन भगत से है. हालांकि कुछ लोगों का कहना है पूर्व केंद्रीय मंत्री ने काम किया है, लेकिन जैसा होना चाहिए वैसा नहीं हुआ है. अब देखना होगा कि आने वाले लोकसभा चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार समीर उरांव को जनता क्या जवाब देती है.

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