रांची(RANCHI)- सरना धर्म कोड की मांग के लिए देश और विदेश से जुटे लाखों सरनाधर्मावलंबियों ने गैर आदिवासियों से शादी करने वाली महिलाओं का आदिवासी दर्जा समाप्त करने की मांग की है.
इस मौके पर मौजूद वक्ताओं ने कहा है कि हम किसी की व्यक्तिगत जिंदगी में दखल नहीं दे रहे हैं, हर शख्स अपनी जिंदगी का रास्ता चुनने को स्वंतत्र है, वह शादी-विवाह अपनी मर्जी से कर सकता है, लेकिन यदि कोई महिला किसी गैर आदिवासी से शादी करती है, तो हमारी मांग सिर्फ इतनी है, कि उसे एक आदिवासी के रुप में मिलने वाली सुविधाओँ को बंद किया जाय, आदिवासी को दिया जा रहा आरक्षण भी बंद किया जाय, ताकि हमारे समाज की शुचिता बनी रह सके, हमारी पहचान संकट में नहीं आये और गैर आदिवासी समाज हमारी महिलाओं को बरगला नहीं सके, आदिवासी समाज का आरक्षण और दुसरी सुविधाएं गैर आदिवासी समाज के हाथ नहीं लगे.
देश-विदेश से लाखों सरनाधर्मावलंबियों का जुटान
यहां हम बता दें कि राजधानी रांची में देश विदेश से जुटे लाखों सरनाधर्मलंबियों ने अपनी शक्ति का प्रर्दशन किया है, इनकी मांग हिन्दू, मुस्लिम, ईसाई से अलग हट कर अपने लिए जनगणना के कॉलम में अलग से सरना धर्म कोड प्रदान करने की मांग है.
धार्मिक आजादी की लड़ाई है सरना धर्म कोड
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि सरना धर्म को कोड की लड़ाई सिर्फ एक धार्मिक कोड की लड़ाई ना होकर धार्मिक आजादी का बिगुल है, हम उन सभी आदिवासी बंधुओं से आह्वान करते हैं, जो हिन्दू, मुस्लिम, ईशाई और बौद्ध नहीं, कि वह इस लड़ाई में हमारे साथ खड़े हो, हमें हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईशाई, बताना हमारे सरना धर्म का अपमान है, हम तो किसी गैर सरनाधर्मी को सरना नहीं बताते हैं, फिर हमें हिन्दू, मुस्लिम और ईशाई बताने की होड़ क्यों लगी रहती है, हमारा धर्म सरना है, हम प्रकृति के पूजक है, हम किसी भी सांगठनिक धर्म में विश्वास नहीं करते है.
2024 में सरनाधर्मलंबी दिखलायेंगे अपनी ताकत
वक्ताओं ने कहा कि हम जल्द ही दिल्ली में अपनी शक्ति का प्रर्दशन कर केन्द्र सरकार से सरना धर्म कोड की एक बार फिर से मांग करेंगे, बावजूद इसके यदि हमारी मांग नहीं मानी गयी तो सरनाधर्मलंबी 2024 में अपनी ताकत दिखलायेंगे, हम सिर्फ उस पार्टी को वोट देंगे जो हमारी मांग को पूरा करेगा.