☰
✕
  • Jharkhand
  • Bihar
  • Politics
  • Business
  • Sports
  • National
  • Crime Post
  • Life Style
  • TNP Special Stories
  • Health Post
  • Foodly Post
  • Big Stories
  • Know your Neta ji
  • Entertainment
  • Art & Culture
  • Know Your MLA
  • Lok Sabha Chunav 2024
  • Local News
  • Tour & Travel
  • TNP Photo
  • Techno Post
  • Special Stories
  • LS Election 2024
  • covid -19
  • TNP Explainer
  • Blogs
  • Trending
  • Education & Job
  • News Update
  • Special Story
  • Religion
  • YouTube
  1. Home
  2. /
  3. News Update

आदिवासी सेंगल अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष सालखन मूर्मू ने निकाला मशाल जुलुस, आदिवासी समाज के उत्थान का बताया शंखनाद

आदिवासी सेंगल अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष सालखन मूर्मू ने निकाला मशाल जुलुस, आदिवासी समाज के उत्थान का बताया शंखनाद

दुमका(DUMKA):  आदिवासी सेंगल अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष सालखन मुर्मू के नेतृत्व में दुमका शहर के पोखरा चौक से मशाल जुलूस निकाला गया. जुलूस से पूर्व सालखन मुर्मू ने पोखरा चौक स्थित सिदो कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया. शहर के बिभिन्न मार्गों से होते हुए जुलूस इंडोर स्टेडियम पहुंचा, जहां सेंगल माझी परगना सम्मान समारोह का आयोजन किया गया. इस मौके पर सालखन मुर्मू ने कहा कि आदिवासी समाज के सामाजिक और राजनीतिक उत्थान की नई परंतु जरूरी साहसिक पहल का शंखनाद हो रहा है.

नहीं हो रहा आदिवासी समाज का विकास

उन्होंने कहा कि आदिवासी संताल समाज का सामुदायिक विकास नहीं हो सका है. क्योंकि जिनके ऊपर इसके विकास का जिम्मा था उन्होंने खास योगदान नहीं किया है, सिवाय अपने पेट और परिवार को पालने के. आदिवासी संताल गांव- समाज में जनतंत्र, संविधान, कानून और मानव अधिकारों की चर्चा और अनुपालन नहीं हो सका है. भारतीय जनतांत्रिक व्यवस्था में राजनीति ही समाधान है. इस अहम तथ्य और इसकी उपयोगिता को अब तक नहीं समझा गया है. राजनीति को नकारात्मक रूप से लिया गया. बल्कि गांव- समाज में राजनीतिक चर्चा करना वर्जित है. यद्यपि मतदान हंड़िया -दारू, रुपयों आदि के लिए अबतक आदिवासी करते रहे हैं. इसके लिए बहुत हद तक ओल चिकी के निर्माता पंडित रघुनाथ मुर्मू और उनके अनेक समर्थक संगठन दोषी हैं. राजनीतिक जागरूकता की कमी के कारण राजनीतिक प्रक्रिया और राजनीतिक दलों तथा आदिवासी जनप्रतिनिधियों को आदिवासी समाज हित में कार्य करने के लिए कभी मजबूर नहीं किया जा सका हैं. अंततः राजनीतिक दल और आदिवासी एमएलए एमपी आदि इनको अपनी सत्ता सुख और स्वार्थों के लिए सदा दुरुपयोग करते रहे हैं. आदिवासी समाज का सामूहिक बड़ा कोई विजन, मिशन, एक्शन प्लान नहीं है. नतीजन उनका कोई व्यापक सामूहिक एजेंडा नहीं है. जैसे कि एकजुट होकर अपने हासा, भाषा, जाति, धर्म, रोजगार, इज्जत, आबादी, चास वास, प्रकृति पर्यावरण बचाना तथा संवैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष करना.

प्रत्येक संताल आदिवासी गांव- समाज में पारंपरिक वंशानुगत आदिवासी स्वशासन व्यवस्था के तहत नियुक्त माझी हड़ाम - परगाना आदि अधिकांश अनपढ़, संविधान कानून देश दुनिया से अनभिज्ञ होने से प्रत्येक संताल आदिवासी गांव समाज दिशाहीन है. जैसे किसी रेलगाड़ी का इंजन नशे में धुत कोई व्यक्ति के कब्जे में है. जाना कहां है? पता नहीं. आदिवासी गांव समाज में अबतक नशापान, अंधविश्वास, डायन प्रथा, डंडोम (जुर्माना), बरोंन ( सामाजिक बहिष्कार ), वोट की खरीद बिक्री, आदिवासी महिला विरोधी मानसिकता आदि को खत्म कर आगे बढ़ने के संकल्प पर विचार नहीं हुआ. गांव- समाज अब तक इसी दलदल में खड़ा है. जिसको खत्म करने की जगह इसको बढ़ाने में वंशुनागत स्वशासन व्यवस्था गलत योगदान कर रहा है. यह सती प्रथा से भी खतरनाक  स्वशोषण व्यवस्था बन चुका है. इसमें जनतांत्रिक और संवैधानिक तत्वों को समाहित किए बगैर गांव- समाज में लोग स्वपोषित गुलामी की जीवन जीने को मजबूर हैं.

आदिवासी समाज को पुनर्जीवित करने के लिए आगे आना होगा युवा छात्रों को

पढ़े लिखे और अधिकांश नौकरी पेशा में शामिल आदिवासियों को अपने पिछड़ रहे समाज के सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक न्याय और अधिकारों की समृद्धि में योगदान करना अविलंब जरूरी है. शिक्षित आदिवासी युवा- छात्रों को भी अपने मरणासन्न आदिवासी समाज को पुनर्जीवित करने में आगे आना पड़ेगा. छोटे बड़े सभी सामाजिक - राजनीतिक आदिवासी संगठनों और उसके नेतृत्वकर्ताओं को आदिवासी एजेंडा, बृहद एकता और समाज सुधार के कार्य योजना के साथ संघर्ष करना होगा. सही नेता, नीति, रणनीति, कार्य योजना, टारगेट आदि पर ईमानदार समीक्षा और पारदर्शिता के साथ काम करना भी जरूरी है. अन्यथा नेता, नीति, रणनीति विहीन जनसभाओं का आयोजन और भीड़ जुटाने से कुछ एक व्यक्ति/ नेता का चेहरा चमक सकता है लेकिन समग्र आदिवासी समाज को कोई खास फायदा नहीं हो सकता है.

उन्होंने कहा कि दुमका की धरती से एक ईमानदार पहल आदिवासी सेंगेल अभियान द्वारा किया जा रहा है. जिसका लक्ष्य आदिवासी समाज में अमूलचूल  सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तन और सुधार लाना है. आदिवासी एजेंडा विहीन निजी स्वार्थों में लिप्त सोरेन परिवार को आदिवासी समाज हित में बेनकाब और बेदखल करना बाध्यता है. राष्ट्रपति द्रौपदी  मुर्मू और उनको सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बैठाने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भरोसा करते हुए एक राजनीतिक विकल्प के निर्माण की कोशिश जरूरी है. पारंपरिक वंशानुगत आदिवासी स्वशासन व्यवस्था में जनतांत्रिक और संवैधानिक तत्वों को समाहित करते हुए अधिकांश अनपढ़, नासमझ माझी हड़ाम आदि की जगह सेंगेल माझी और सेंगेल परगाना सर्वत्र नियुक्त करने के फैसले को जमीन में उतारना भी जरूरी है. इसी के तहत 5 प्रदेशों में नियुक्त हुए सैकड़ों सेंगेल माझी और सेंगेल परगाना को पीला पगड़ी पहनाकर और नियुक्ति सर्टिफिकेट देते हुए सेंगेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व सांसद सलखान मुर्मू सबको सम्मानित किया. सालखन मुर्मू के नेतृत्व में आदिवासी सेंगेल अभियान को पूर्ण विश्वास है कि आज के मशाल जुलूस और सेंगेल माझी परगना सम्मान समारोह से आदिवासी समाज और संथाल परगना की दिशा और दशा में सामाजिक और राजनीतिक  परिवर्तन सुनिश्चित है.

रिपोर्ट: पंचम झा, दुमका 

Published at:27 Feb 2023 07:59 PM (IST)
Tags:jharkhanddumkasalkhan murmupokhara chowkadivasi sengal abhiyan
  • YouTube

© Copyrights 2023 CH9 Internet Media Pvt. Ltd. All rights reserved.