धनबाद (DHANBAD): एक ऐसी खोज, जिसकी चर्चा न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी हो रही है. संयोग से इस शोध पर काम करने वाले साइंटिस्टों में एक झारखंड के धनबाद से हैं. अरब सागर में पहली बार 1495 मीटर से 4119 मीटर तक की गहराई में जंतु विज्ञानियों ने प्रोटोजोआ समूह के विशेष प्रकार के परजीवियों की खोज की है. सिलिएटा परिवार के यह परजीवी सात प्रजातियों के हैं. राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान के विज्ञानियों की यह खोज परजीवियों के व्यवहार, उनके पोषण व जैव विकास के क्रम को समझने में मदद कर सकती है.
सभी परजीवी नेमाटोडा समूह के मिले ,जो बालू के नीचे थे
सभी परजीवी नेमाटोडा समूह के जीव (सूत्रकृमियों), जो बालू के नीचे मौजूद थे, उन पर रहते पाए गए हैं. उनसे ही यह पोषण ले रहे थे. विज्ञानियों की टीम में धनबाद के हीरापुर हरि मंदिर के पास रहने वाले जंतु विज्ञानी डाॅक्टर तापस चटर्जी और रूस के इवोर डवगल भी शामिल थे. डाॅक्टर तापस चटर्जी ने बताया कि परजीवी प्रोटोजोआ पहली बार इतनी गहराई में पाए गए हैं. सभी फाइलम नेमाटोडा के जीवों की काया में पनप रहे थे. शोध को न्यूजीलैंड के जर्नल जूटैक्सा में भी प्रकाशित किया गया है. विज्ञानियों की टीम को अरब सागर में अत्यधिक गहराई तक खोज करनी थी, इसलिए स्वदेश निर्मित समुद्र विज्ञान अनुसंधान पोत आरवी सिंधु साधना का सहारा लिया.
2019-20 में दिसंबर से जनवरी के बीच लिए गए थे नमूने
2019-20 में दिसंबर से जनवरी के बीच नमूने लिए गए. पोत पर सवार राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान के विज्ञानियों ने बड़ी मशक्कत के बाद नेमाटोडा पर मौजूद परजीवियों के नमूने लिए. इसके बाद नमूनों को अलग-अलग किया गया. डाॅ. तापस ने इन नमूनों की शारीरिक संरचना, कोशिकीय बनावट व परजीविता के लक्षणों का अध्ययन किया. शोध के दौरान फाइलम प्रोटोजोआ की कासिनेटा कैलिक्स, एक्टिनोसाइएथुला होमारी, लोरिकोफायरा बोस्पोरिका, एल स्ट्रेसेमान्नी, एसिनेटाइड्स ग्रुबेरी, ट्रेमाटोसोमा रोटुंडा और ब्राकाइयोसोमा प्रजातियां पाई गई. टीम में डाॅक्टर तापस चटर्जी, समुद्र विज्ञान संस्थान के सब्यसाची सौत्या, संतोष गायकवाड़, सनोफर एच खोखर व अमिता चौधरी समेत रूसी विज्ञानी इगोर डवगल शामिल थे.
रिपोर्ट : शाम्भवी सिंह के साथ प्रकाश
