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एक रेल फाटक ऐसा भी ! जहां ड्राइवर को ही उतरकर बंद करना पड़ता है गेट, जानिए ये दिलचस्प खबर

BY -
Samiksha Singh
Samiksha Singh
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 13, 2026, 2:27:50 PM

टीएनपी डेस्क (Tnp desk):- देश तरक्की के नये-नये मुकाम हासिल कर रहा है. तेजी से भागते इस जमाने में रेलवे भी नई-नई तकनीक के ईजाद से आगे बढ़ रही है. वंदे भारत जैसी हाईस्पीड ट्रेनों के खुलने से कुछ घंटों में ही मुसाफिर अपनी मंजिल पहुंच जा रहे हैं. लेकिन, इस विकास के बावजूद कुछ जगह ऐसे हैं. जहां आज भी ऐसा लगता है कि पुराने ढर्रे पर ही चलने की कवायद है. जहां बदलाव की जरुरत काफी तसल्ली से महसूस की जाती है.  

इधर, इतनी तरक्की के बावजूद कोडरमा-गिरिडीह नई रेल लाइन पर कोडरमा जिले के डोमचांच में बंगाईकला और मंझलीटांड़ में ऐसा मानवरहित समपार फाटक है. जहां यात्री ट्रेन गुजरने से पहले ड्राइवर ट्रेन को रोकता है और फिर पिछले डब्बे में मौजूद गार्ड इसे बंद करता है. इसके बाद ट्रेन को फाटक पार कराकर फिर इसे रोका जाता है. इसके बाद पिछले डिब्बे में सवार गार्ड उतरकर फाटक के गेट को खोलता है. इसके बाद ट्रेन अपने शिड्यूल के हिसाब से आगे अपना सफर तय करती है.इन दोनों समपार फाटक के एक तरफ कोडरमा टाउन स्टेशन है, तो दूसरी तरफ महेशपुर स्टेशन. बंगाईकला में यह रेलवे लाइन डोमचांच और बंगाईकला जाने वाला मार्ग पर है. जबकि मंझलीटांड में यह रेल लाइन डोमचांच-जयनगर मार्ग से होकर गुजरती है. ये चिजे सुनने में अजीब तो लगती होगी. लेकिन, हकीकत यही हैं. जो हमारे सिस्टम पर गहराई से सोचने के लिए मजबूर करती है.

हर दिन तीन जोड़ी ट्रेनें पार होती है

इस रेलवे रुट में हर दिन तीन जोड़ी ट्रेनों का परिचालन होता है. इसमें रांची-न्यू गिरिडीह इंटरसिटी एक्सप्रेस के साथ ही कोडरमा-महेशमुंडा पैसेंजर ट्रेन और कोडरमा-मधुपुर पैसेंजर ट्रेन शामिल है. इन तीनों ट्रेन के परिचालन के समय आगमन और प्रस्थान के वक्त मंझलीटांड़ और बंगाईकला में रेलवे फाटक को बंद करने और खोलने के दौरान यही प्रक्रिया अपनाई जाती है. दोनों रेलवे फाटक के बीच 500 मीटर की दूरी है. इस लाइन से गुजरने वाली हर ट्रेन को रेलवे फाटक बंद करने और खोलने के लिए हर पारी में चार बार रोका जाता है. इस दौरान चार से पांच मिनट लगते हैं.

फाटक के पास ही सवार होते हैं यात्री

ट्रेनों के रुकने के चलते बंगाईकला और मंझलीटांड़ क्षेत्रों में रहनेवाले लोग महेशपुर स्टेशन जाने के बजाए समपार फाटक से ही ट्रेन पर सवार होते हैं और उतरते हैं. लोगों की माने तो महेशपुर रेलवे स्टेशन की दूरी इस मानवरहित फाटक से तकरीबन 4 किलोमीटर की है. जहां जाने में काफी परेशानी होती है. इस रूट से गुजरने वाली तीनों ट्रेन फाटक के आगे और पीछे दो बार रूकती है. लिहाजा, ये एक प्लेटफार्म की ही तरह हो गया है मंझलीटांड़ रेलवे फाटक और बंगाईकला रेलवे फाटक का इस्तेमाल हर दिन मुसाफिर करते हैं और अपने गंतव्य तक जाते है.

रेलवे के अधिकारी बताते है कि इस तरह के सिस्टम परमिटेड हैं. क्योंकि इस तरह के नई रेल लाइन में कम ही ट्रेने चलती है. वन वे सिस्टम के चलते ड्राइवर और गार्ड ही क्रासिंग खोलते और बंद करते हैं.

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