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मांगलिक कार्यों  पर अब लगने जा रहा होलाष्टक का ब्रेक ,क्यों 16 संस्कारों की रहती है मनाही

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: February 9, 2026, 5:19:37 PM

धनबाद(DHANBAD): मांगलिक कार्यों पर अब लगेगा होलाष्टक का ब्रेक लगने वाला है.   खरमास के इंतजार के बाद फिलहाल मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो गई है.  फरवरी से लेकर जुलाई तक शुभ लग्न की भरमार है.  फरवरी के अंतिम सप्ताह में 8 दिनों तक मांगलिक कार्यों पर ब्रेक रहेगा.   24 फरवरी से होलाष्टक लगने जा रहा है.  इस दौरान शादी, विवाह समेत अन्य शुभ कार्यों पर रोक रहेगी.   फाल्गुन शुक्ल पक्ष अष्टमी से लेकर होलिका दहन तक की अवधि को होलाष्टक कहा जाता है.  एक मान्यता है कि होलाष्टक के प्रथम दिन ही महादेव ने कामदेव को भस्म कर दिया था.  इस काल में हर दिन अलग-अलग ग्रह उग्र रूप में होते है.  इसलिए होलाष्टक में शुभ कार्य नहीं किए जाते. 

इन आठ दिनों में शादी विवाह ,गृह प्रवेश, जनेऊ संस्कार  जैसे 16 संस्कार वर्जित माने गए है. होलाष्टक की उत्पत्ति पौराणिक कथा से भी जुड़ी बताई जाती है.  राक्षस राजा हिरण्यकश्यप स्वयं को भगवान मानता था और अपने विष्णु भक्त पुत्र प्रहलाद को अपने अधीन करने के लिए आठ दिन तक घोर यातनाएं देता रहा.  इसी आठ दिवसीय कठिन और अशुभ अवधि को होलाष्टक कहा गया है.  इसे नकारात्मक ऊर्जाओं से भरा समय माना जाता है, इसलिए इस अवधि में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है. 

होलाष्टक आठ दिनों की ऐसी अवधि है, जिसमें कुछ विशेष कार्यों को करना वर्जित माना जाता है, जबकि पूजा-पाठ और ध्यान करना शुभ होता है.  इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, नए व्यवसाय या किसी भी प्रकार के अन्य मांगलिक कार्य नहीं करने की सलाह दी जाती है.  ऐसा माना जाता है कि इन दिनों नकारात्मक ऊर्जाएं अपने चरम पर होती हैं, जिससे शुभ कार्यों में बाधाएं आ सकती हैं और इच्छित परिणाम नहीं मिल पाते। होली से ठीक आठ दिन पहले होलाष्टक की अवधि शुरू हो जाती है, जिसे ज्योतिषीय दृष्टि से नकारात्मक ऊर्जाओं से भरा माना जाता है.  इस दौरान किसी भी शुभ या मांगलिक कार्य को करने की मनाही होती है.  

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