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सवाल-झक -झक खादी से भी और सरकार से भी: भूमिगत आग और कोयले का अवैध खनन और कितनी जानें लेगी

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: April 1, 2026, 1:22:02 PM

धनबाद(DHANBAD): जमीन के नीचे आग  और ऊपर खतरे में जिंदगी, आखिर ऐसा कब तक चलेगा? यह एक बहुत बड़ा सवाल है.  कतरास के सोनरडीह  में मंगलवार की देर शाम हुई भीषण धंसान  की घटना और तीन जिंदगियों  के असमय काल में समा जाने के बाद से यह सवाल और बड़ा हो गया है.  ऐसी बात नहीं है कि यह  कोई पहली घटना है.  इसके पहले भी घटनाएं होती रही हैं.  भरोसा मिलता रहा है लेकिन फिर भी जिंदगियां सुरक्षित नहीं हुई.  जिन तीन लोगों की मौत हुई है, उनके परिजनों के क्रंदन से पूरा इलाका दहशद में है.  लोग इलाका खली कर इधर -उधर शरण लेने के लिए घर छोड़ रहे हैं.  सवाल किये  जा रहे हैं कि भूमिगत आग  और कोयले के अवैध  उत्खनन से कब तक लोग बेमौत  मारे जाते रहेंगे? 

मंगलवार को भी ग्रामीण अवैध खनन का लगा रहे थे आरोप 

मंगल वार की शाम ग्रामीणों ने अवैध खनन का सीधा आरोप लगाया था.  पूछ रहे थे कि कब उनका पुनर्वास होगा? कतरास बाघमारा -इलाका तो कोयले के अवैध उत्खनन के लिए कुख्यात हो गया है.  लोग बताते हैं कि सोनाडीह में जिस जगह धंसान  की घटना हुई है.  वहां 30 जनवरी से ही गैस का रिसाव हो रहा था.  शिकायत पर बीसीसीएल ने गैस रिसाव के मुहाने को बंद कर दिया था.  फिर सवाल उठता है कि क्या मुहाने को बंद करने के लिए किसी तकनीकी टीम की मदद ली गई थी या जहां गैस दिख रही थी, वहां मुहाने को  बंद कर दिया गया.  सवाल तो कई हैं, वैसे तो कोयलांचल  की धरती 1995 से ही "कातिल" हो गई है.  वह अपने साथ किए गए "कुकृत्य"  का अब बदला  ले रही है.  

1995 से ही खोखली जमीन खतरनाक होने की दे रही संकेत 

अगर 1995 के बाद की घटनाओं को देखा  किया जाए तो सितंबर 1995 में केंदुआ  से झरिया वाली सड़क के किनारे धरती फटी थी.  उसे घटना में एक पति -पत्नी जमीन के अंदर समा गए थे.  उन्हें क्या मालूम था कि आज उनके लिए अंतिम रात होगी।  फिर 2017 में झरिया के इंदिरा चौक पर जमीन फटी और बबलू खान और उनका बेटा पाताल में समा गए.  फिर 2023  में एक रात जोगता   थाना क्षेत्र में जोरदार आवाज के साथ जमीन फटी और एक घर जमीन में समा गया.  दो युवक भी जमीन में समा गए .  किसी का शव नहीं मिला।  वर्ष 2025 में राम कनाली में धरती खिसकी  और सात  लोग  काल के गाल में  समा गए.  यह तो है मोटी -मोटी  घटनाओं का विवरण, इसके अलावे भी कई घटनाएं हुई है.   1995 में झरिया चौथाई कुल्ही में पानी भरने जाने के दौरान युवती जमींदोज हो गई थी.
 
24 मई 2017 को क्या हुआ था झरिया में 

 24 मई 2017 को इंदिरा चौक के पास बबलू खान और उसका बेटा रहीम जमीन में समा गए थे. इस घटना ने भी रांची से लेकर दिल्ली तक शोर मचाया ,लेकिन परिणाम निकला शून्य बटा सन्नाटा. 2006 में शिमलाबहाल में खाना खा रही  महिला जमीन में समा गई थी. 2020 में इंडस्ट्रीज कोलियरी में शौच के लिए जा रही महिला जमींदोज हो गई थी. फिर   28 जुलाई 2023 को घनुड़ीह का रहने वाला परमेश्वर चौहान गोफ में चला गया .पहले तो बीसीसीएल प्रबंधन घटना से इंकार करता रहा लेकिन जब मांस जलने की दुर्गंध बाहर आने लगी तो झरिया सीओ की पहल पर NDRF की टीम को बुलाया गया.  टीम ने कड़ी मेहनत कर 210 डिग्री तापमान के बीच से परमेश्वर चौहान के शव का अवशेष निकाला था. 

धंसान की घटनाओं का सम्बन्ध माफियागिरी से भी 

लोग इन  घटनाओं धनबाद में माफिया  जोड़ते हैं.  जिसने भी उनकी ताकत और जलवा देखा  या सुना होगा ,कोयलांचल की  जमीन फटने को  उनसे जोड़ कर देख रहे हैं.   यह  एक सच्चाई भी है. कोयलांचल में  लोग गोफ  में समा कर काल के गाल में जा रहे है. . लेकिन उनके  सवालों को सुनेगा कौन?  कोयला उद्योग के राष्ट्रीयकरण के पहले तो निजी कोयला मालिक जैसे- तैसे कोयले का खनन किए, लेकिन राष्ट्रीयकरण के बाद भी कोयला खदानों की सही देखभाल नहीं हुई.  धनबाद कोयलांचल के कई माफिया स्वर्ग सिधार गए, उनके "यूथ विंग" आज हैं, लेकिन शायद वह भी यह सब देख कर हैरत में पड़ रहे  होंगे.  धनबाद कोयलांचल में जब बिहार के मुख्यमंत्री पंडित बिंदेश्वरी दुबे हुआ करते थे और धनबाद के उपायुक्त  मदन मोहन झा थे ,तो  देश का एक बहुत बड़ा घोटाला सामने आया था और यह घोटाला था बालू घोटाला. 

कोयला निकाला तो गया लेकिन बालू भरने में कोताही हुई 
 
जिन जगहों से कोयला निकाला गया, वहां सही ढंग से बालू की भराई नहीं की गई.  उस समय के जानकार बताते हैं कि नियम था कि बालू भरने के बाद प्रेशर से पानी डालना है ताकि बालू जगह बना ले और आगे धंसान  का कोई खतरा नहीं हो.  लेकिन हकीकत में ऐसा कुछ हुआ नहीं. जानकार बताते हैं कि उस वक्त धनबाद कोयलांचल में बालू सप्लायरो  की बाढ़ थी.  बीसीसीएल को घुटने पर लाकर मनमाफिक दर बालू सप्लायर तय करवा लेते थे.  बालू सप्लाई करने वालो को  सूर्यदेव सिंह  का भी शह मिलता था.  नतीजा होता था कि महीनों  हड़ताल चलती थी और फिर बालू के रेट में बढ़ोतरी होती थी.  फिर एरियर  भुगतान की बारी आती थी तो उसमें माफिया को हिस्सेदारी होती थी.  माफिया का डर  इतना अधिक था कि कोई कुछ बोलता नहीं था.  लेकिन जब मदन मोहन झा धनबाद आए और उन्होंने माफिया उन्मूलन अभियान शुरू किया तो बहुत बड़ा घोटाला सामने आया. उन्होंने माफिया डर के मिथक को भी तोड़ दिया. कालांतर में भूमिगत आग बुझाने के कई प्रयास किये गए  लेकिन सारे के सारे उत्साह में अधिक और विश्वास में कम दिखे. 

रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो

Tags:DhanbadJharkhandIllegal MiningDeathFireकोल miningIllegal coal mining

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