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अधर में लटकी 4000 करोड़ की जलापूर्ति योजना,तो कोयलांचल की जनता को सताने लगी गर्मी में पानी की चिंता

BY - Priyanka Kumari CE

Published at: 05 Mar 2026 04:07 PM (IST)

अधर में लटकी 4000 करोड़ की जलापूर्ति योजना,तो कोयलांचल की जनता को सताने लगी गर्मी में पानी की चिंता

धनबाद(DHANBAD):धनबाद जिले में पेयजल आपूर्ति की तस्वीर चौंकाने वाली है. चार हजार करोड़ की बीते एक दशक में विभिन्न शहरी और ग्रामीण जलापूर्ति योजनाएं लंबित है.पाइपलाइन बिछी, जलमीनारें खड़ी हुईं, ट्रीटमेंट प्लांट बने,लेकिन बड़ी आबादी अब भी नियमित जलापूर्ति से वंचित है. कई इलाकों में नल तो लगे हैं, पर पानी नहीं पहुंचा.जिले में चल रही कई योजनाएं 70 से 85 प्रतिशत तक पूरी बताई जा रही है.लक्ष्य तिथि भी बीत चुकी है,फिर भी आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी. कहीं इंटेक वेल अधूरा है, कहीं पंप हाउस का काम लंबित है तो कहीं बिजली कनेक्शन नहीं मिल पाया. परिणामस्वरूप, पूरी संरचना खड़ी होने के बावजूद जलापूर्ति ठप है.

बलियापुर में प्लांट तैयार,ट्रायल के बाद आपूर्ति बंद

निरसा-गोविंदपुर मेगा योजना करीब 750 करोड़ रुपये की लागत से शुरू इस योजना का उद्देश्य सैकड़ों गांवों तक पानी पहुंचाना था. पाइपलाइन और टंकियों का निर्माण हुआ, लेकिन जल स्रोत से पानी उठाव और वितरण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी.ग्रामीण आज भी पुराने जलस्रोतों पर निर्भर है.ग्रामीण जलापूर्ति योजना के तहत ट्रीटमेंट प्लांट और जलमीनार बन चुके हैं। योजना तय समय में पूरी होनी थी, पर मोटर संचालन और ट्रायल रन में देरी के कारण दर्जनों गांवों में पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी.ट्रायल के बाद पानी शुरू हुई।लेकिन फिर से आपूर्ति बंद कर दी गई.इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने से जवाबदेही को लेकर सवाल उठ रहे है. एजेंसियों में बदलाव, तकनीकी खामियां और समन्वय की कमी को देरी का कारण बताया जा रहा है.

डीसी आदित्य रंजन ने क्या कहा

डीसी आदित्य रंजन ने कहा कि जलापूर्ति की नगर निगम और पेयजल विभाग से चलने वाली योजनाएं सालों से लंबित है. जल जीवन मिशन के तहत चलने वाली योजनाओं में फंड की कमी की दिक्कत हो रही थी, लेकिन अभी कुछ फंड आया है. जल जीवन मिशन के तहत चलने वाली योजनाओं को पूरा कराने का प्रयास किया जा रहा है. कुछ योजनाएं एनओसी के कारण लंबित रही. किसी में रेलवे ट्रैक तो किसी में एनएच जैसी समस्या खड़ी हो रही है. कई एनएच की चौड़ाई काफी कम है.अगर पाइप लाइन की एनओसी दे दी जाए, तो आधी सड़क कट जाएगी. इन कारणों से योजनाएं लंबित रही है.कुछ में वाटर एक्सट्रैक्शन की भी समस्याएं खड़ी हो रही। बायर एक्सट्रैक्शन के लिए डीवीसी से परमिशन नहीं मिला है. डीवीसी से परमिशन लेनी है. जलापूर्ति योजनाओं पर कार्य करने वाली एजेंसी का काम संतोषजनक नहीं रहा.गर्मी के पहले डीवीसी, निगम और सभी एजेंसी के साथ एक बैठक की जाएगी.कम बजट और कम मेहनत वाली जलापूर्ति योजनाओं को तत्काल शुरू करने की कोशिश की जाएगी. सिंगल विलेज स्कीम का सर्वे चल रहा है.

पढ़े क्यों समय पर नहीं पूरी हुई योजनाएँ

डीसी ने साफ किया कि तकनीकी अड़चन, एनओसी और एजेंसियों की धीमी कार्यशैली के कारण योजनाएं समय पर पूरी नहीं हो सकी.हालांकि प्रशासन अब गर्मी से पहले कुछ योजनाएं चालू करने की बात कह रहा है.स्थानीय लोगों का कहना है कि जलापूर्ति योजना के अधूरी रहने से उन्हें पानी खरीदकर इस्तेमाल करना पड़ रहा है.हर साल गर्मी में यही हाल होता है और इस बार भी राहत की उम्मीद कम ही दिख रही है.सिंदरी विधायक चंद्रदेव महतो ने कहा कि जलापूर्ति योजनाओं को पूरा करने वाली एजेंसी कार्य के प्रति कभी समर्पित नहीं रही है.काम को सिर्फ लीपापोती करने के चक्कर में लगे रहते है. ऐसी एजेंसियों को ब्लैक लिस्ट करने की जरूरत है.विधायक ने साफ शब्दों में कहा कि जब तक लापरवाह एजेंसियों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक योजनाएं समय पर पूरी नहीं होंगी.जिले में जलापूर्ति योजनाओं पर भारी राशि खर्च होने के बावजूद जनता को राहत नहीं मिल पा रही है. प्रशासन तकनीकी और प्रक्रियात्मक अड़चनों का हवाला दे रहा है, जबकि आम लोग पानी के लिए जूझ रहे है. अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि गर्मी से पहले कितनी योजनाएं धरातल पर उतर पाती हैं और धनबाद की प्यास कब बुझती है.

रिपोर्ट-नीरज कुमार

Tags:water supply schemeTrending newsViral newsJharkhandJharkhand newsJharkhand news todayDhanbadDhanbad news

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