धनबाद(DHANBAD): महासप्तमी के दिन रविवार को धनबाद शहर ढोल- नगाड़े और ताशे की आवाज से गूंज रहा था. गूंजे भी क्यों नहीं ,बंगाली समुदाय की महिलाएं वेल भरण अनुष्ठान के लिए ,जो सड़कों पर निकली थी. हीरापुर हरि मंदिर से गाजे-बाजे के साथ महिला- पुरुष पारंपरिक तरीके और पोशाक में कोलबोउ को लाने तालाब के घाट पर गए थे. यह दृश्य काफी विहंगम था. सड़क के दोनों ओर इस विहंगम दृश्य को देखने वालो की भी भीड़ थी. कार्यक्रम की विशेषता इसलिए भी थी कि हरि मंदिर दुर्गोत्सव का 90 साल पूरा कर रहा है.
90 महिलाएं एक ही पोशाक में चल रही थी
इस मौके को खास बनाने के लिए बंगाली समुदाय की 90 महिलाएं एक ही तरह की साड़ी और पोशाक में कोलबोउ को लाने पप्पू तलाब गई और फिर इसी रास्ते से मंदिर लौटी. सप्तमी तिथि पर रविवार को मां के कालरात्री स्वरूप की पूजा होगी. बांग्ला प्रभावित देवी मंदिरों में दुर्गा देवी जल से भरे कलश स्थापित किये जाएंगे. इसके बाद दुर्गा के नौ रूपों को नवपत्रिका रूपी विधि -विधान के साथ स्थापित किया जाएगा. नवपत्रिका प्रवेश और स्थापन के बाद सप्तमी की पूजा प्रारंभ होगी. दोपहर ढाई बजे संधि पूजा होगी.
शनिवार को हुई मां के कात्यायनी स्वरूप की पूजा
इसके पहले शनिवार को देवी मंदिरों में मां के कात्यायनी स्वरूप की पूजा की गई. कोयलांचल में पूजा का उत्साह चरम की ओर बढ़ चला है. गांव हो या शहर सभी जगह वातावरण पूजामय में हो गया है. ढोल, नगाड़े और ताशा की आवाज से इलाके गूंज रहे है. पट खुलने के साथ ही देवी माता लोगों को दर्शन दे रही हैं और लोग शत्रुओं पर विजय ,आरोग्यता और सकारात्मक ऊर्जा की लोग कामना कर रहे हैं.
