पलामू(PALAMU): कहते है कि सरकार की योजना और दावे कागजों पर अच्छे लगते है. क्योंकि यहां जमीन पर हकीकत कुछ और दिखती है. एक ऐसा ही मामला हुसैनाबाद से सामने आया. जहां ईलाज के अभाव में एक 22 साल के युवक की जान चली गई. उसका कसूर इतना था की वह गरीब था. क्योंकि सरकारी अस्पताल में बेहतर ईलाज तो सिर्फ उन्ही का होता है जिनकी पैरवी होती है.विडंबना ऐसी की जब युवक की रिम्स में मौत हुई तो उसके परिवार के पास शव घर ले जाने के भी पैसे नहीं थे.जिसके बाद पलामू सांसद के पहल पर शव वाहन की व्यवस्था की गई.
मामला हुसैनाबाद प्रखंड के देवरी खुर्द गांव का है. यहां के रहने वाले उमेश कुमार चंद्रवंशी के 22 वर्षीय इकलौते पुत्र आर्यन कुमार का निधन हो गया. वह लंबे समय से किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे. आर्यन की हालत लगातार बिगड़ती गई. लेकिन आर्थिक तंगी के कारण वह समुचित इलाज नहीं करा सका.
कुछ महीने पहले उसकी बुआ ने अपने खर्च पर फरीदाबाद के अमृता अस्पताल में इलाज कराया. जहां डॉक्टरों ने डायलिसिस के बाद किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह दी थी. लेकिन गरीबी के कारण आर्यन ने दवाइयां और डायलिसिस दोनों ही बंद कर दिए और आराम की जगह मेहनत मजदूरी करने लगा.
जिससे एक सप्ताह पूर्व तबीयत अचानक बिगड़ने पर उसे मेदिनीनगर के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से गंभीर स्थिति देखते हुए रिम्स रेफर किया गया. रिम्स में इलाज के दौरान ही उसने दम तोड़ दिया. स्थिति इतनी दयनीय थी कि परिजनों के पास रांची से शव लाने तक के पैसे नहीं थे. पलामू सांसद वीडी राम की पहल पर शव गांव पहुंच सका. इस घटना से पूरा गांव शोकाकुल है और परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है.