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दुर्घटना कर रही इंतजार, चुप बैठी है सरकार, बड़े धोखे हैं इस राह में

BY -
Shreya Gupta
Shreya Gupta
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 14, 2026, 7:26:59 AM

दुमका(DUMKA) को उपराजधानी का दर्जा प्राप्त है, लेकिन इन दिनों उप राजधानी में प्रवेश के तमाम रास्ते बदहाल हैं. सबसे खराब स्थिति दुमका देवघर मार्ग की है. जहां तक नजरें जाएंगी, सड़कों पर गड्ढे ही नजर आएंगे. आलम यह है इस मार्ग पर पैदल चलना भी मुश्किल है. यहां हमेशा जाम की स्थिति बनी रहती है. आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं और लोगों की जानें भी जाती है.  25 अगस्त 2020 को जामा थाना के सुगनीबाद गांव के पास चावल लदा एक ट्रक कार पर पलट गया था. इस घटना में 2 मासूम सहित छह लोगों की मौत हो गई थी. अब इस मार्ग पर चलने से लोग परहेज करते हैं. छोटे वाहन से दुमका से देवघर जाने वाले लोग हंसडीहा से चौपा मोड़ के रास्ते देवघर पहुंचते हैं. मुख्य मार्ग से 70 किलोमीटर की दूरी तय करने के बजाय लोग 100 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तय कर देवघर पहुंचते हैं. जनता टैक्स देती है ताकि सरकार उन्हें सुविधा दें, लेकिन उपराजधानी की जनता ही परेशान है. यहां न शासन और न प्रशासन को इनकी परेशानी से कोई लेना-देना है.

इसलिए बनी बदहाली की सड़क

पूर्ववर्ती सरकार ने पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से देवघर के बाबा बैद्यनाथ, दुमका के बाबा बासुकीनाथ और पश्चिम बंगाल के रामपुरहाट से तारापीठ को जोड़कर एक धार्मिक सर्किट बनाने की योजना बनाई थी. सरकार के जाते ही वह योजना अधर में लटक गई. अब बता दें कि देवघर दुमका मुख्य मार्ग की बदहाली के पीछे की कहानी. वर्ष 2019 तक देवघर और बासुकीनाथ में श्रावणी मेला लगता था. बाहर से आए श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखकर सरकार श्रावणी मेला से पूर्व इस सड़क का रखरखाव करती थी, लेकिन दो वर्षोंं से श्रावणी मेला नहीं लगने के कारण यह मार्ग उपेक्षित रह गया. दूसरी वजह यह है कि एक वर्ष पूर्व इस मार्ग को स्टेट हाईवे से नेशनल हाईवे में शामिल कर लिया गया. इस वजह से राज्य सरकार उदासीन हो गई. तीसरी वजह दुमका भागलपुर मुख्य मार्ग पर जामा थाना के भुरभुरी पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण तमाम वाहनों का परिचालन इसी मार्ग से होने लगा. ओवरलोड वाहनों के परिचालन से सड़कें खस्ताहाल होती चली गई. वैसे तो 10 महीने पूर्व इस मार्ग के निर्माण की आधारशिला रखी गई, लेकिन टेंडर प्रक्रिया फाइलों में उलझी हुई है. एन एच के अधिकारी दुमका में बैठते नहीं हैं, इसलिए आधिकारिक रूप से वस्तुस्थिति की जानकारी नहीं है. लेकिन सांसद सुनील सोरेन की माने तो टेंडर की तकनीकी समस्या का समाधान हो गया है. जल्द ही निर्माण का कार्य शुरू होगा.

 

 

रिपोर्ट : पंचम झा, दुमका

Tags:News

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