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झारखंड के तांबा से सजेगा श्रीराम का दरबार! तैयारी देख कर घाटशिला बाग-बाग

झारखंड के तांबा से सजेगा श्रीराम का दरबार! तैयारी देख कर घाटशिला बाग-बाग

जमशेदपुर (JAMSHEDPUR)-अयोध्या में बनने वाले भव्य राम मंदिर में झारखंड के खदानों से उत्पादित तांबे का उपयोग होगा. राम मंदिर के निर्माण से जुड़ी एलएंडटी की टीम घाटशिला आइसीसी के दौरे पर आयी थी जहां से वो तांबे का सैंपल लेकर गयी है. बता दें कि राम मंदिर की दीवारों में करीब 34 टन तांबा लगाने की योजना बनाई गई है. टीम के दौरे से घाटशिला ताम्र नगरी वासियों में खुशी है. आईसीसी में काम करने वाले मजदूरों और अधिकारी भी खासे उत्साहित हैं. यहां के तांबे को राम मंदिर में सौंदर्यीकरण के लिए इस्तेमाल किया जाएगा.

राज्य की बड़ी उपलब्धि

घाटशिला ताम्र माइंस के अलावे जिला और पूरे राज्य की यह बड़ी उपलब्धि है कि यहां के तांबे के सैंपल को परीक्षण के लिए ले जाया गया है. राम मंदिर के इंटीरियर में करीब 34टन तांबा लगाने की योजना है. अगर सब कुछ सही रहा तो आईसीसी के तांबे को राम मंदिर के इंटीरियर में लगाया जाएगा. जो यहां के मजदूरों के लिए काफी उत्साहजनक बात है.

ब्रिटिश जमाने से हो रहा उत्पादन

घाटशिला को ताम्र नगरी के नाम से जाना जाता है. ब्रिटिश जमाने के समय 1924 से यहां पर तांबे यानि copper  के माइंस खोले गए थे. ब्रिटिश ज़माने में 1929 में मऊभंडार कारखाना की शुरुआत हुई थी. वहीं 1929 में मऊभंडार कारखाना में स्मेलटर की शुरूआत हुई. यहां से उत्पादित तांबा देश की आवश्यकताओं की पूर्ति करता है. अब यहां का तांबा राम मंदिर की शोभा बढ़ाने के लिए तैयार है. मऊभंडार आइसीसी कारखाना से उत्पादित तांबा राम मंदिर में लगाया जाता है तो घाटशिला का नाम देश दुनिया के लोग जानेंगे.

मुहर की देरी

राम मंदिर की दीवारों के सौन्दर्यकरण में इस्तेमाल होने वाला 34 टन तांबा की कीमत 2 करोड़ 30 लाख रुपए बताई जा रही है. लंदन मेटल एक्सचेंज (एलएमइ) के तहत एक टन तांबा की कीमत अभी 9 हजार डॉलर है. अगर भारतीय रुपयों में इसका आकलन किया जाये तो एक टन तांबा की कीमत छह लाख 75 हजार रुपए होती है. बता दें कि तांबे की जांच के बाद ही एलएंडटी की टीम अंतिम रूप से इसके इस्तेमाल को लेकर मुहर लगाएगी.

बगैर शोर शराबे के खामोशी से हुआ दौरा

एल एंड टी का ये दौरा 21अक्टूबर को हुआ था. एलएंडटी के पदाधिकारी रात भर मऊभंडार में रुके. दूसरे दिन शुक्रवार शाम को तांबे का सैंपल लेकर रवाना हो गए. एलएंडटी के पदाधिकारी और अन्य पदाधिकारी सैंपल देखकर यह तय करेंगे कि आइसीसी के तांबे को मंदिर निर्माण में उपयोग में लाया जाये या नहीं.

रिपोर्ट : अन्नी अमृता, जमशेदपुर

Published at:29 Oct 2021 01:15 PM (IST)
Tags:News
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